वर्षा के श्रृंगार से खिल उठा अरावली का सौंदर्य, बड़खल झील में पहुंचा झरने का पानी

लगातार हुई बारिश ने मानों अरावली का श्रृंगार कर दिया है इसका सौंदर्य फिर से खिल उठा है। अरावली में जगह-जगह झरने शुरू हो गए हैं।पाली बणी गांव मोहब्ताबाद और परसोन मंदिर के हाथी कुंड में बड़े झरने देखे जा सकते हैं। इनकी प्राकृतिक छठा देखते ही बन रही है।

Prateek KumarSun, 12 Sep 2021 06:53 PM (IST)
अरावली में झर-झर कर झर रहे झरने।

हरेंद्र नागर [फरीदाबाद]। झर-झर झरते झरने और पानी से लबालब बड़खल झील कभी अरावली का सौंदर्य में चार चांद लगाते थे। मगर अंधाधुंध खनन ने अरावली का यह सौंदर्य छीन लिया। खनन पर रोक के बाद अब अरावली अपने पुराने स्वरूप में लौट रही है। लगातार हुई बारिश ने मानों अरावली का श्रृंगार कर दिया है, इसका सौंदर्य फिर से खिल उठा है। अरावली में जगह-जगह झरने शुरू हो गए हैं। पाली बणी, गांव मोहब्ताबाद और परसोन मंदिर के हाथी कुंड में बड़े झरने देखे जा सकते हैं। इनकी प्राकृतिक छठा देखते ही बन रही है।

पहाड़ी से झरते झरनों की झर-झर करती मोहक आवाज दूर तक सुनाई दे रही है। परसोन मंदिर के हाथी कुंड के झरने का पानी बड़खल झील तक पहुंच रहा है। इससे बड़खल झील में भी काफी मात्रा में पानी जमा हो गया है, सालों बाद यह फिर से मनोरम दिखाई दे रही है। फरीदाबाद सहित दिल्ली-एनसीआर के प्रकृति प्रेमियों के लिए अरावली में झरनों का प्रस्फूटन और बड़खल झील में पानी जमा होना सुखद अनुभूति है। इस प्राकृतिक सौंदर्य को निहारने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। झरनों के नीचे नहाने के लिए युवाओं की भीड़ जुट रही है। इससे पहले साल 2015 और 2016 में अच्छी बारिश हुई थी। तब भी अरावली में झरने शुरू हो गए थे और बड़खल झील में पानी दिखाई देने लगा था।

गांव मोहब्ताबाद निवासी कपिल भडाना ने बताया कि करीब 25-30 पहले तक पाली बणी और मोहब्ताबाद में बड़े झरने हुआ करते थे। ये हमेशा बहने वाले झरने थे। बारिश के दिनों में इनका सौंदर्य देखने लायक होता था। दूर-दूर से लोग इन झरनों को निहारने पहुंचते थे। खनन ने अरावली में पानी का मार्ग बदल दिया। पत्थर खनन से जगह जगह गहरी खान बन गई। बारिश का पानी उनमें एकत्र होने लगा। इससे झरने बंद हो गए थे।

करीब 15 साल पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अरावली में खनन पूरी तरह बंद हो गया। इतने वर्षो में अब पानी ने फिर से अपना मार्ग बना लिया है। ऐसे में अच्छी बारिश के बाद झरने फिर से शुरू हो जाते हैं, मगर बारिश के बाद ये बंद हो जाते हैं। सेव अरावली संस्था के संस्थापक जितेंद्र भडाना ने बताया कि इस समय तीन बड़े झरनों के अलावा अरावली में जगह जगह छोटी-छोटी जलधाराएं निकलकर पहाड़ी से नीचे गिर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर अरावली को इसी तरह संरक्षित रखा जाए और ज्यादा छेड़छाड़ ना हो तो इसका पुराना स्वरूप फिर से प्राप्त किया जा सकता है।

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