बेसहारा पशुओं के लिए नगर निगम बनाएगा गोशाला

शहर के विभिन्न क्षेत्रों में घूम रहे बेसहारा पशुओं को आश्रय देने के उद्देश््य नगर निगम गोशाला बनवाएगा।

JagranTue, 26 Oct 2021 09:30 PM (IST)
बेसहारा पशुओं के लिए नगर निगम बनाएगा गोशाला

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : शहर के विभिन्न क्षेत्रों में घूम रहे बेसहारा पशुओं को आश्रय देने के लिए नगर निगम अपनी गोशाला बनाएगा। शुरुआती दौर में गोशाला में करीब दो हजार पशुओं को आश्रय दिया जाएगा। नगर निगम की प्लानिग शाखा गोशाला के लिए जमीन चयनित करने में जुट गई है। अभी तक शहर में नगर निगम की अपनी कोई गोशाला नहीं है। सामाजिक संगठनों के सहयोग से गोशालाएं चल रही हैं। मौजूदा समय में तीन निजी गोशालाओं में पशुओं को आश्रय की व्यवस्था है। गोशालाओं में हैं करीब 4600 पशु

शहर की प्रमुख गोशालाओं में पांच हजार से अधिक पशु हैं। गांव मवई की गोशाला में 1850, विश्व हिदू परिषद की ओर से संचालित श्री गोपाल गोशाला में 1594 तथा ऊंचा गांव की गोशाला में 600 पशु हैं। इन तीनों गोशालाओं को पशु आहार के लिए नगर निगम की ओर से हर महीने 17 लाख रुपये अनुदान दिया जाता है। सिद्धदाता आश्रम की ओर से संचालित श्री नारायण गोशाला में 300 पशु तथा गांव नीमका में सर्वोदय फाउंडेशन की चल रहे देवाश्रय पशु चिकित्सालय और गोशाला में लगभग 300 पशु हैं। सड़कों पर हैं 15 हजार से अधिक बेसहारा पशु

नगर निगम के रिकार्ड की बात करें, तो सड़कों पर करीब 15 हजार पशु घूमते दिखाई देते हैं। सफाई निरीक्षक राजेंद्र दहिया के अनुसार बहुत से पशु पालक ऐसे हैं, जो सुबह पशुओं को सड़क पर बेसहारा छोड़ देते हैं। ये पशु शाम को घर चले जाते हैं। पशु पालकों को सोच बदलने की जरूरत है। अगर पशु पालक अपनी जिम्मेदारी समझें, तो सड़क पर नजर आने वाले पशुओं की संख्या कम हो जाएगी। गांव की दो गोशालाओं के विस्तार पर चल रहा विचार

गांव भूपानी और नवादा में दो गोशालाएं हैं। पहले गोशालाओं का संचालन पंचायत के पास था। नगर निगम में शामिल किए गए 24 गांवों में यह दो गांव भी हैं। इन गांवों की गोशालाओं को विस्तार पर नगर निगम विचार कर रहा है। सर्वोदय फांउडेशन ने दिया था सुझाव

सर्वोदय फांउडेशन की टीम ने पिछले दिनों निगमायुक्त यशपाल यादव से मिल कर बेसहारा पशुओं को आश्रय उपलब्ध कराने के मुद्दे पर चर्चा की थी। फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष अंशु गुप्ता ने कहा कि शहर में एक बड़ी गोशाला की जरूरत है। इस गोशाला में बेसहारा पशुओं को सहारा मिलेगा, तो इनसे होने वाले

सड़क हादसे भी कम होंगे। जहां तक पशु आहार की बात है, तो इस पर होने वाला खर्चा गोबर से उत्पाद बनाकर बाजार में बेचने से पूरा किया जा सकता है। प्लानिग शाखा को जगह चिन्हित करने को पत्र लिखा गया है। जगह तय होने के बाद गौशाला निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। गोशाला के संचालन में सामाजिक संगठनों की मदद ली जाएगी। हम प्रयास करेंगे कि गाय के गोबर से अलग-अलग उत्पाद बनाएं जाएं।

-डा. नितिश परवाल, स्वास्थ्य अधिकरी, नगर निगम।

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