बदहाल व्यवस्था में बीमार बेटी को लेकर भटकता रहा बेबस बाप

जिला नागरिक बादशाह खान अस्पताल के चिकित्सकों ने कोरोना की दूसरी लहर में अपनी सेवा एवं समर्पण भाव से सरकारी तंत्र पर विश्वास जगाया था मगर अब अस्पताल का स्टाफ फिर से पुराने ढर्रे पर लौटने लगा है।

JagranSun, 26 Sep 2021 08:21 PM (IST)
बदहाल व्यवस्था में बीमार बेटी को लेकर भटकता रहा बेबस बाप

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद: जिला नागरिक बादशाह खान अस्पताल के चिकित्सकों ने कोरोना की दूसरी लहर में अपनी सेवा एवं समर्पण भाव से सरकारी तंत्र पर विश्वास जगाया था, मगर अब अस्पताल का स्टाफ फिर से पुराने ढर्रे पर लौटने लगा है। रविवार को एक पिता अपनी बच्ची को लेकर अस्पताल में इधर से उधर भटकता रहा, लेकिन उसे यह बताने वाला कोई नहीं मिला कि एंबुलेंस एवं रजिस्ट्रेशन के लिए किस काउंटर पर जाना है। शनिवार को भी इलाज में देरी होने से सात वर्षीय बच्चे ने अपने अभिभावक की गोद में दम तोड़ दिया था।

तिगांव के रहने वाला रविदर राम रविवार सुबह 11 बजे करीब अपनी आठ महीने की बेटी रोशनी के इलाज के लिए नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे थे। इमरजेंसी में तैनात डाक्टर ने रोशनी की नाजुक हालत को देखते हुए उसे दिल्ली रेफर कर दिया और कैनुला लगाकर दवा चढ़ा दी। रविदर का आरोप है कि स्टाफ ने उसे रोशनी को इमरजेंसी में बेड पर रोशनी को लिटाने नहीं दिया।

रविदर राम ने बताया कि बच्ची को बल्लभगढ़ से नागरिक अस्पताल रेफर किया गया था। उन्होंने एंबुलेंस के लिए आवश्यक कार्रवाई के लिए कई लोगों से पूछा, लेकिन किसी ने सही से उत्तर नहीं दिया। इससे परेशान होकर वह अपनी बेटी रोशनी व पत्नी सुनीता सहित अस्पताल के बाहर आकर पार्क में आकर बैठ गए। बच्ची के हाथों पर कैनुला लगा देखकर कई लोगों ने उन्हें इमरजेंसी ले जाने की सलाह दी। रजिस्ट्रेशन काउंटर पर नहीं था कर्मचारी

नागरिक अस्पताल में 40 नंबर काउंटर पर रेफरल स्लिप बनाई जाती है। यहां रविदर राम कई बार आए थे, लेकिन कोई मौजूद नहीं था और उन्होंने काफी देर तक इंतजार भी किया था। इमरजेंसी में तैनात डाक्टर के अनुसार बच्ची की छाती में कफ से भरी हुई थी और निमोनिया की वजह से हालत गंभीर थी। उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी और शिशु रोग विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही उसे रेफर किया गया है। हमारे पास बच्चों के आइसीयू की सुविधा नहीं है। इसके चलते उस बच्ची को रेफर किया गया था। इमरजेंसी कार्ड खुद डाक्टर बनाते हैं और 40 नंबर काउंटर पर रजिस्ट्रेशन के बारे में बताकर भेजते हैं। शनिवार को हुई बच्चे की मौत के बारे में जानकारी नहीं है। इसका पता किया जाएगा।

-डा. सविता यादव, प्रधान चिकित्सा अधिकारी

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