बंदरों के लिए विकसित होगा वन क्षेत्र

शहर में बंदरों के लिए वन क्षेत्र विकसित किया जाएगा।

JagranWed, 27 Oct 2021 09:12 PM (IST)
बंदरों के लिए विकसित होगा वन क्षेत्र

अनिल बेताब, फरीदाबाद : शहर में बंदरों के लिए वन क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इस क्षेत्र में तालाब, फलों के पेड़ तथा फाइबर शेड भी होगा। इससे उन क्षेत्रों के लोगों को राहत मिल जाएगा, जहां बंदरों के काटे जाने के मामले आते रहे हैं।

नगर निगम ने इसके लिए विस्तृत योजना तैयार की है। इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए कई सामाजिक संगठन नगर निगम का सहयोग करने को आगे आए हैं। सामाजिक संगठन सेव अरावली और सतश्री लाल जी मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डा. नितिश परवाल से मिलकर सहयोग करने का आश्वासन दिया है। एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर छोड़ दिए जाते थे बंदर

नगर निगम ने पहले आवासीय क्षेत्रों से बंदरों को पकड़ कर वन क्षेत्र में छोड़ने का ठेका दिया हुआ था। एनआइटी, ओल्ड फरीदाबाद और बल्लभगढ़ का ठेका अलग-अलग ठेकेदार को दिया गया था। नगर निगम के पास लोगों की जब शिकायतें आती थीं कि उनके क्षेत्र में बंदरों का उत्पात है। कई लोगों को गंदरों ने काटा है। ऐसे में ठेकेदार के कर्मचारी एक क्षेत्र से बंदरों को पकड़ कर दूसयरे क्षेत्र में छोड़ देते थे। जबकि उन्हें बंदरों को अरावली वन क्षेत्र में बंदरों को छोड़ना चाहिए। ठेकेदार के पिछले काम को देखते हुए अब नगर निगम पूरे नगर निगम क्षेत्र के लिए एक ही ठेकेदार को काम सौंपेगा। निगम क्षेत्र में हैं करीब 10 हजार बंदर

नगर निगम ओल्ड फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और एनआइटी में 3500 से अधिक सफाई कर्मी हैं। इनकी अलग-अलग वार्डों में ड्यूटी लगती है। नगर निगम ने सफाई निरीक्षकों के माध्यम से पिछले वर्ष बंदरों का आंकड़ा तैयार करवाया था। नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डा. नितिश परवाल के अनुसार करीब 10 हजार बंदर हैं। अरावली वन क्षेत्र तो वन्य जीवों के लिए ही है। नगर निगम से हमने पहले कई बार इस तरह के प्रस्ताव पर चर्चा की है। अब अगर नगर निगम इस तरह की पहल कर रहा है, तो सराहनीय है। शहर के आवासीय क्षेत्रों से बंदरों को वन क्षेत्र में छोड़ा जाना चाहिए। तालाब भी विकसित होने चाहिए। हम निगम का साथ देने को तैयार हैं।

-जितेंद्र भडाना, संस्थापक, सेव अरावली। हमारे ट्रस्ट की अनखीर में दो एकड़ जमीन है। हम नगर निगम को ट्रस्ट की ओर से सहयोग करना चाहते हैं।

हमने सुझाव दिया है कि इस जमीन पर पेड़-पौधे लगाए जाएं। आवासीय क्षेत्रों से लाकर यहां बंदर छोड़ दिए जाएं। ट्रस्ट की ओर से हर संभव सहयोग किया जाएगा।

-गोस्वामी श्याम लाल, संस्थापक, सतश्री लाल जी मिशन चैरिटेबल ट्रस्ट। हम वन क्षेत्र में कुछ जगह विकसित करना चाहते हैं। इस क्षेत्र में फाइबर के शेड़ बनाए जाएंगे। कुछ एरिया में तालाब भी विकसित किए जाएंगे। फलों के पेड़ विकसित किए जाएंगे। सामाजिक संगठनों के सहयोग से नए वर्ष में वन क्षेत्र विकसित होगा। नए सिरे से बंदरों की संख्या का अनुमान लगाने के लिए सफाई निरीक्षकों को रिपोर्ट देने को कहा गया है, ताकि पता चल सके कि मौजूदा समय में अपने शहर में कितने बंदर हैं। वन क्षेत्र विकसित करने को वन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।

-डा. नितिश परवाल, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम

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