कोरोना के मामले में अभी कुछ सप्ताह सतर्क रहने की जरूरत : डा.गुलेरिया

कोरोना के मामले में अभी कुछ सप्ताह सतर्क रहने की जरूरत : डा.गुलेरिया

आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस(एम्स)के निदेशक डा.रणदीप गुलेरिया ने फरीदाबाद में कोरोना की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की।

Publish Date:Tue, 24 Nov 2020 06:25 PM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, फरीदाबाद : आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंस(एम्स)के निदेशक डा.रणदीप गुलेरिया ने कोविड-19 से निपटने के लिए टीम की तरह कार्य करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पाजिटिव केस के संपर्कों को ढूंढ कर उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने के कार्य को हम गंभीरता के साथ लेते हैं, तभी इस महामारी को रोकने में सफल हो सकते हैं। डा.गुलेरिया मंगलवार को जिला में कोविड की स्थिति की समीक्षा करने पहुंची केंद्र सरकार की तीन सदस्यीय टीम का नेतृत्व करते हुए औद्योगिक जिले में पहुंचे थे। उन्होंने लघु सचिवालय में जिले के अधिकारियों के साथ करीब तीन घंटे तक समीक्षा बैठक के दौरान यह बातें कही। बैठक में केंद्र की ओर से आई टीम के सदस्यों में डा.वी.बी.दास और डा.संजय निदिग शामिल थे। जबकि जिला प्रशासन की ओर से जिला उपायुक्त यशपाल, नगर निगम आयुक्त डा.यश गर्ग, पुलिस उपायुक्त डा.अर्पित जैन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.रणदीप सिंह पूनिया, ईएसआई मेडिकल कॉलेज से डीन डा.असीम दास मौजूद थे।

जिला उपायुक्त यशपाल यादव ने उन्हें जिला में कोविड-19 की स्थिति, प्रबंधों और निपटने के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डा.रणदीप गुलेरिया ने कहा कि समीक्षा बैठक में उन्होंने महसूस किया है कि अभी जिला फरीदाबाद में मौजूदा स्थिति में बिस्तरों की संख्या पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में बेड, आइसीयू व वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से बाजारों में भीड़ को नियंत्रित करने व लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करने के लिए गतिविधियां चलाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि हमें कोविड-19 के लिए निर्धारित नियमों का पालन करना है और अगले कुछ सप्ताह ज्यादा जागरूक होने की आवश्यकता है। डा.रणदीप गुलेरिया ने कोरोना नियंत्रण के लिए इस बात को जरूरी बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया जाए। ऐसे मरीजों को होम आइसोलेशन में ना रखने की बात कही, साथ ही कहा कि मरीजों को रेफर करने के लिए एंबुलेंस व्यवस्था दुरुस्त की जाए। उन्होंने कान्टेक्ट ट्रेसिग सिस्टम पर जोर दिया।

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