पर्याप्त जानकारियां न होने से भू स्वामित्व योजना को लेकर बना असमंजस, बढ़ रहे हैं विवाद

संवाद सहयोगी बाढड़ा राजस्व विभाग द्वारा लाल डोरा की हदबस्त के अंदर बने वर्षों पुराने मकान

JagranFri, 30 Jul 2021 11:44 PM (IST)
पर्याप्त जानकारियां न होने से भू स्वामित्व योजना को लेकर बना असमंजस, बढ़ रहे हैं विवाद

संवाद सहयोगी, बाढड़ा : राजस्व विभाग द्वारा लाल डोरा की हदबस्त के अंदर बने वर्षों पुराने मकानों को स्वामित्व पहचान देने की योजना को लेकर ग्रामीणों को पर्याप्त जानकारी न होने से उनमें असमंजस का माहौल बना हुआ है। नई योजना से भविष्य में भले ही प्रत्येक घर का मालिकाना हक स्पष्ट होगा। अधिकतर मकानों का पंजीकरण करवाने की प्रक्रिया का ना तो ग्रामीणों को ज्ञान है और ना ही विभाग की टीमों ने उनको इस बारे में पर्याप्त जानकारियां मुहैया करवाई है। जिसके चलते भू स्वामित्व योजना को अमलीजामा पहनाए जाने से ग्रामीणों का आपस में विवाद बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार ने ग्राम सभाओं को सारा अधिकार देकर अंतिम नक्शा पारित करने की खुली छूट देने से अब पीड़ित लोग कहां फरियाद करें इसे लेकर असमंजस का माहौल है। प्रदेश सरकार ने पहली बार सालों से आबाद बस्ती में रिहायश करने वाले आमजन को उसका मालिकाना हक देने के लिए लाल डोरा हदबस्त भूमि स्वामित्व योजना आरंभ की है। जिससे समस्त गांव की ड्रोन सिस्टम से पैमाइश करवा कर एक विशेष प्रारूप तैयार करवा कर उसको ग्राम सभा से पारित करवाया जा रहा है। इसके बाद एक तरह से अपने मकान की जगह पर राजस्व विभाग द्वारा स्वयं का मालिकाना हक देने से एक तरह से आपसी विवाद कम होने की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन गांव गांव में नक्शा तैयार करने में बरती जा रही अनियमितता ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। बाढड़ा उपमंडल में दो दर्जन के लगभग गांवों में लाल डोरे की रिहायशी भूमि का पंजीकरण करने में अधिकतर ग्रामीणों को पूरी जानकारी नहीं होने से उनका भूमि स्वामित्व का नाम पंजीकृत नहीं हो पाया है और उनको जब पता चला तो अधिकारी निर्धारित एक माह में विरोध दर्ज ना करवाने का हवाला देते हुए कागजी रिकार्ड में किसी तरह का हस्तक्षेप करने को तैयार नहीं है। राज्य मुख्यालय को भेजा रिकार्ड

ग्रामीण सूरजभान, विकास, उमेद सिंह, अनिल शर्मा, राजेंद्र सिंह इत्यादि ने बताया कि पंचायत व राजस्व विभाग की टीम ने रिकार्ड तैयार करवा कर राज्य मुख्यालय भेज दिया और अब उनके सामने सिविल कोर्ट में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। गरीब परिवारों के समक्ष अब अपनी पुश्तैनी भूमि का सही पंजीकरण करवाने के लिए परेशानी खड़ी हो रही है।

इस बारे में नायब तहसीलदार शेखर नरवाल से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया धीरे-धीरे कार्यवाही कर ग्राम पंचायतों में अंतिम रूप दिया गया है। अब सामने आई त्रुटियों को लेकर राज्य सरकार से जो भी दिशा निर्देश मिलेगा उसी के तहत आगामी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।

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