दिल्ली

उत्तर प्रदेश

पंजाब

बिहार

उत्तराखंड

हरियाणा

झारखण्ड

राजस्थान

जम्मू-कश्मीर

हिमाचल प्रदेश

पश्चिम बंगाल

ओडिशा

महाराष्ट्र

गुजरात

बाढड़ा ग्राम पंचायत के प्रयासों से रुका सैंकड़ों प्रवासी श्रमिकों का पलायन

बाढड़ा ग्राम पंचायत के प्रयासों से रुका सैंकड़ों प्रवासी श्रमिकों का पलायन

बाढड़ा ग्राम पंचायत की सजगता केवल बातों में ही नहीं बल्कि धरातल पर भी स

JagranSat, 24 Apr 2021 08:00 AM (IST)

पवन शर्मा, बाढड़ा : बाढड़ा ग्राम पंचायत की सजगता केवल बातों में ही नहीं बल्कि धरातल पर भी साफ देखने को मिलती है। उपमंडल का दर्जा पाने के बावजूद यहां पर ग्राम पंचायत विकास योजनाओं की देखरेख करती है। पिछले साल कोरोना काल में जब सब अपने घरों में कैद होकर रह गए और हर वस्तु या सुविधा के लिए केवल प्रशासन पर निर्भर थे तो उस समय युवा सरपंच राकेश श्योराण ने लगभग तीन माह के विकट दौर में न केवल बाहरी राज्यों के श्रमिकों को उनके पास जाकर सूखे राशन की कीट वितरित की बल्कि स्वयं सप्ताह में तीन बार सैनिटाइजिग अभियान चलाकर कोरोना मुक्त वातावरण बनाया। पिछले वर्ष जब कोरोना महामारी ने पैर पसारे तो तत्कालीन एसडीएम विरेंद्र सिंह ने सभी ग्राम पंचायत मुखियाओं को बताया कि कोई भी व्यक्ति लॉकडाउन में बाहर नहीं आएगा और बाहरी राज्यों से आने वाले व्यक्तियों को कोरोना जांच के अलावा होम क्वारंटाइन करवाने में सरपंच सजग प्रहरी की भूमिका निभाएं।

सरपंच राकेश श्योराण ने उसी समय अपनी गाड़ी पर माइक लगाकर सारे बाजार में मुनादी करवा दी कि कोई भी व्यापारी लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन नहीं करेगा। जिसको जो जरूरत हो वह दूरभाष पर उनसे संपर्क करे। सूखा या बना हुआ राशन तथा सुबह शाम ताजा घी, दूध उनके पास भेजा जाएगा। इसके अलावा उन्होंने श्रमिक बस्ती में जाकर राजस्थान, एमपी, बिहार, यूपी के श्रमिकों को भरोसा दिया कि वे खाने-पीने के सामान के लिए बाहर न जाएं। उनके पास दिन में तीन बार स्वच्छ पानी टैंकर के अलावा भोजन कीट पहुंच जाएगी। व्यापारियों ने किया सहयोग

कोरोना काल में युवा सरपंच राकेश के इस मिशन में कस्बे के व्यापारियों ने तन मन धन से सहयोग दिया वहीं वयोवृद्ध खिलाड़ी रामकिशन शर्मा, कुलदीप शास्त्री समेत कई सफाई कर्मचारियों ने दिनरात सफाई की और बार बार सैनिटाइजर छिड़काव किया। श्रमिकों की मदद से मिला सुकून : राकेश

सरपंच राकेश बाढड़ा ने बताया कि पहले तो उनको भी कुछ दिक्कतें आईं, लेकिन आरंभ में श्रमिकों को खाना, पानी उपलब्ध करवाने का काम शुरू किया तो मन को सुकून मिला। उसके बाद कस्बे के लोगों को बना हुआ व सूखा राशन तथा सुबह शाम ताजा दूध वितरण करने के अलावा एक माह बाद श्रमिकों को गांव गांव से खोजकर उनके मूल राज्यों में वापसी शुरू करवाई तो बहुत अच्छा लगा। व्यापारियों व ग्रामीणों के सहयोग से उन्होंने उस समय कोरोना पर विजय पाई।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.