जुई में करीब सात सौ घरों की बस्ती को तोड़े जाने का मंडरा रहा खतरा

जुई में करीब सात सौ घरों की बस्ती को तोड़े जाने का मंडरा रहा खतरा

कस्बा जुई शुरू से ही सौहार्द व प्रेम का प्रत्येक रहा है। यहां सभी वर्ग व जातियों के लोग काफी मेलमिलाप से रहते है लेकिन कुछ दिनों से अनुसूचित जाति के मकान तोड़े जाने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है। अनुसूचित जाति के करीब सात सौ मकान तोड़े जाने के नोटिस भेजे जाने के बाद बवाल खड़ा हो गया है। अनुसूचित जाति के लोगों ने इस मामले को लेकर बुधवार को पंचायत भी बुलाई। जिसमें गांव से पलायन करने का निर्णय लेने पर विचार किया।

JagranThu, 25 Feb 2021 07:10 AM (IST)

जागरण संवाददाता, भिवानी : कस्बा जुई शुरू से ही सौहार्द व प्रेम का प्रत्येक रहा है। यहां सभी वर्ग व जातियों के लोग काफी मेलमिलाप से रहते है, लेकिन कुछ दिनों से अनुसूचित जाति के मकान तोड़े जाने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद बना हुआ है। अनुसूचित जाति के करीब सात सौ मकान तोड़े जाने के नोटिस भेजे जाने के बाद बवाल खड़ा हो गया है। अनुसूचित जाति के लोगों ने इस मामले को लेकर बुधवार को पंचायत भी बुलाई। जिसमें गांव से पलायन करने का निर्णय लेने पर विचार किया।

जुई कलां निवासी वाल्मीकि समुदाय, धानक व अन्य अनुसूचित जाति के लोगों ने सरपंच व प्रशासन पर उनके घर तोड़ने की साजिश रच कर बेघर करने का आरोप लगाया जा रहा है। जिससे तंग आकर वह गांव से पलायन करने पर मजबूर है। 15 वर्षों से न्याय पाने के लिए अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे है। परंतु न्याय नहीं मिला। अनुसूचित जाति के लोग सीधा आरोप लगा रहे हैं कि कसूर बस इतना है कि वर्तमान सरपंच को वोट नहीं दिया। इसी कारण सरपंच तंग कर रहा है। जुई के ही अनुसूचित जाति के बाबूलाल आर्य, नरेश रापरिया, रामेश सिगला, राजेश, सुरेश धानक, विनोद , खेताराम, रामनिवास ने कहा कि वह धमकी दे रहा कि अगर मकान खाली नही किए तो सामान बहार फेंक दिया जाएगा। वह हमेशा ही जातिसूचक शब्द का प्रयोग करता है और गाली - गलोच करता है। वह जान से मारने की धमकी भी देता है। जुई पुलिस थाने में शिकायत दे चुके है, परंतु अभी तक उसके खिलाफ किसी भी प्रकार कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण मानसिक, आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा। अब गांव में बुधवार को पंचायत कर गांव छोड़ने का निर्णय लिया गया है।

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