सिविल अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा नहीं, रेफर होते हैं मरीज

-अस्पताल प्रबंधन ने कई माह पहले भेजी थी डिमांड अब तक हलचल नहीं

JagranSat, 27 Nov 2021 06:06 PM (IST)
सिविल अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा नहीं, रेफर होते हैं मरीज

जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ :

शहर के सिविल अस्पताल को 200 बेड का दर्जा तो मिल गया, मगर अभी भी यहां पर कुछ जरूरी आधुनिक सुविधा नहीं है। लेप्रोस्कोपिक सर्जरी (दूरबीन से आपरेशन) को ही लें, तो अभी तक यहां पर ऐसी सुविधा मरीजों को नहीं मिल रही। अभी भी यहां पर मैनुअल तरीके से ही आपरेशन होते हैं। अधिकतर मरीज इस सर्जरी से पीछे हट जाते हैं। ऐसे में उन्हें रोहतक पीजीआइ रेफर कर दिया जाता है। मजबूरी में काफी मरीज तो निजी अस्पताल का रुख कर लेते हैं।

सिविल अस्पताल परिसर में अब 40 करोड़ से नया भवन बन रहा है। इसके बाद यहां पर कुछ व्यवस्थाएं तो हो जाएंगी, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में भी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा की यहां पर शिद्दत से दरकार है। उसकी तरफ अभी सरकार द्वारा ध्यान नहीं दिया गया है। कई महीने पहले भेजी डिमांड, अभी तक हलचल नहीं :

अस्पताल के सर्जरी विभाग में हर्निया, अपेंडिक्स, पित्त, गुर्दे की पत्थरी समेत अन्य बीमारियों से ग्रस्त होकर इलाज के लिए आते है। यहां केवल ओपन सर्जरी की सुविधा ही मिल पाती है। ओपन सर्जरी को लेकर मरीजों में डर बना रहता है। इसीलिए यहां पर कम आपरेशन होते है। काफी लोग ओपन सर्जरी से पीछे हट जाते हैं और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की मांग करते हैं। यह सुविधा जब सिविल अस्पताल में नहीं मिल पाती तो मजबूर होकर निजी अस्पतालों में पहुंच जाते हैं। दूरबीन से आपरेशन में स्वाभाविक रूप से खर्च ज्यादा है, लेकिन इसमें मरीज जल्दी रिकवर करता है। इधर, अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी डा. देवेंद्र मेघा ने बताया कि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को लेकर विभागीय महानिदेशक को पत्र लिखा जा चुका है। डिमांड पूरी हो जाती है तो अस्पताल में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की सुविधा दी जाएगी। ये होती है लेप्रोस्कोपिक सर्जरी :

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी यानी दूरबीन से आपेरशन। इससे सर्जरी के बाद रोगी को परेशानी नहीं होती और जल्द ही डिस्चार्ज हो जाता है और 24 घंटे के अंदर चलने-फिरने की स्थिति में आ जाता है। इस सर्जरी में पेट में छेद कर एचडी कैमरे से बीमारी का इलाज किया जाता है। लेप्रोस्कोपी सर्जरी से गाल ब्लैडर (पित्त की थैली), पेल्विस, अपर और लोवर जीआइ ट्रैक्ट, थोरेक्स सर्जरी, अपेंडिक्स, हर्निया के अलावा बड़ी व छोटी आंत का आपरेशन संभव है। इस सर्जरी को तय करने से पहले मरीज की स्थिति, स्वास्थ्य और बीमारी की गंभीरता परखी जाती है। ओपन सर्जरी की तुलना में यह सरल प्रक्रिया है। सिविल अस्पताल के सर्जन डा. विजय अहलावत ने बताया कि अभी सिविल अस्पताल में ओपन सर्जरी ही हो पा रही है।

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