पशु क्रेडिट कार्ड योजना से हाथ खड़े कर रहे बैंक

पशु क्रेडिट कार्ड योजना से हाथ खड़े कर रहे बैंक
Publish Date:Sun, 27 Sep 2020 06:30 AM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, बहादुरगढ़ : किसान क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर ही पशु क्रेडिट कार्ड को लेकर सरकार की ओर से तो जोर दिया जा रहा है, मगर बैंक इसमें हाथ खड़े कर रहे हैं। यही वजह है कि झज्जर जिले में जो 55 हजार कार्ड बनाने का लक्ष्य है, उसके मुकाबले अभी तक संख्या काफी कम है। शहर और गांवों को मिलाकर आवेदन तो बड़ी संख्या में पशुपालक कर चुके हैं, लेकिन बैंक इससे पीछे हट रहे हैं।

दरअसल, इसमें भी किसान क्रेडिट कार्ड की तरह ही पशुपालकों को गाय और भैंस के रखरखाव के लिए न्यूनतम खर्च का आंकलन करके ऋण देने का प्रावधान है। मगर दिक्कत यह है कि बैंकों को यह रास नहीं आ रही है। किसान क्रेडिट कार्ड में तो बैंकों के पास किसानों की जमीन की सिक्योरिटी होती है लेकिन पशु क्रेडिट कार्ड में तो बैंक रिकवरी को लेकर ज्यादा रिस्क मान रहे हैं। इसीलिए वे क्रेडिट कार्ड आसानी से नहीं बना रहे और आवेदक कभी बैंकों के तो कभी विभाग के चक्कर लगा रहे हैं। यह है योजना

पशु क्रेडिट कार्ड के लिए पशुपालन विभाग की ओर से गाय का 40 हजार और भैंस का 60 हजार वार्षिक खर्च का आकलन करके एक लाख 60 हजार तक का ऋण बिना किसी गारंटी के देने की योजना है। जबकि तीन लाख तक का ऋण लेने के लिए बैंकों को गारंटी देनी होती है। तीन लाख तक के ऋण पर ब्याज दर सात फीसद वार्षिक है। यदि समय पर भुगतान किया जाता है तो इसमें पशुपालक को तीन फीसद की छूट मिलती है। यानी ब्याज दर चार फीसद रह जाती है। समय पर भुगतान न होने पर सात फीसद ब्याज देना होता है। तीन लाख से ज्यादा के ऋण पर ब्याज दर ज्यादा है और उसमें कोई छूट भी नहीं होती। पशुपालन को बढ़ावा देने का उद्देश्य

सरकार का मानना है कि जिन पशुपालकों के पास गाय-भैंस के अच्छे आहार के लिए पैसे नहीं होते, उनकी मदद के लिए यह योजना है। ताकि, उनका रोजगार भी चलता रहे और पशुपालन को भी बढ़ावा मिले। इन दिनों शहर और गांवों में पशुपालकों के क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए विभाग की ओर से आवेदन फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। क्षेत्र में जितने भी बैंक हैं, उन सभी का सर्विस एरिया तय है। ऐसे में एरिया के अंतर्गत आने वाले पशुपालकों का बैंकों की ओर से पशु क्रेडिट कार्ड बनाना होता है। दिक्कत यह आ रही है कि इसमें बैंक रूचि नहीं दिखा रहे हैं। उन्हें इस योजना के तहत दिए जाने वाले ऋण में डिफाल्टरों की संख्या बढ़ने का अंदेशा है। ऐसे में बैंक कोई न कोई बहाना बनाकर इस तरह के कार्ड बनाने से बच रहे हैं। यह स्थिति पशुपालन विभाग के अधिकारी भी स्वीकार रहे हैं। विभाग की ओर से पशु क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करवाए जा रहे हैं। बैंकों का इसमें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। अधिकारियों को इसको लेकर रिपोर्ट भेजी गई है।

डा. रवींद्र सहरावत, एसडीओ, पशुपालन विभाग बहादुरगढ़।

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