निवाले पर डाका : चावल घोटाले में आरपीएफ इंस्पेक्टर और कांस्टेबल ठहराए जिम्मेदार, पोस्ट से हटाया

दैनिक जागरण की पड़ताल में उजागर हुए चावल घोटाले पर उत्तर रेलवे ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है।

JagranTue, 21 Sep 2021 06:03 AM (IST)
निवाले पर डाका : चावल घोटाले में आरपीएफ इंस्पेक्टर और कांस्टेबल ठहराए जिम्मेदार, पोस्ट से हटाया

दीपक बहल, अंबाला: दैनिक जागरण की पड़ताल में उजागर हुए चावल घोटाले पर उत्तर रेलवे की इंटरनल विजिलेंस ग्रुप (आइवीजी) ने अपनी मुहर भी लगा दी है। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) अंबाला छावनी पोस्ट के इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल को जिम्मेदार ठहराते हुए चार्जशीट जारी करने के आदेश दिए गए हैं। इंस्पेक्टर को पोस्ट से भी हटा दिया गया है। फूड कारपोरेशन आफ इंडिया (एफसीआइ) की जिन बोरियों के गायब होने पर अंबाला रेल मंडल के अधिकारी इसे चोरी का मामला नहीं बता रहे थे, अब इसी घोटाले में आइवीजी ने मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। आरपीएफ के आइजी एसएन पांडेय ने मुकदमा दर्ज करने के भी आदेश जारी कर दिए हैं। यानी कि जिस वारदात को अधिकारियों ने दर्ज करने की बजाए रफा-दफा कर दिया था, अब उसे दर्ज करना ही पड़ेगा। इतना ही नहीं अब एफसीआइ से चावल की बोरियों को चोरी करने वाले और फिर बाद में खेल रचने वाले सभी कर्मचारी व अधिकारी आपराधिक मामले में उलझते नजर आ रहे हैं। मुकदमा आरपीएफ दर्ज करेगी या फिर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) इसको लेकर माथापच्ची चल रहा है। दैनिक जागरण ने 5 सितंबर 2021 के अंक में इस घोटाले का पर्दाफाश किया था, जिसमें आरपीएफ और कामर्शियल विभाग ने अपने कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। हालांकि इस प्रकरण की अभी एफसीआइ की विजिलेंस भी कर रही है। एजीएम रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में विजिलेंस जांच कर रही है। यह बोरियां हैफेड के गोदामों से धूलकोट रेलवे स्टेशन पर पहुंची थीं, जिसके बाद खेल हो गया। एफसीआइ विजिलेंस जांच में भी गड़बड़झाला सामने आ चुका है, लेकिन अभी इसमें अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।

इस तरह हुआ खेल

चौदह अगस्त 2021 को अंबाला शहर के धूलकोट रेलवे स्टेशन पर छत्तीसगढ़ से मालगाड़ी सेला चावल लेकर पहुंची थी। करीब 28 हजार बोरियां प्राइवेट कारोबारी ने मंगवाई थीं, जिसने शाम तक रेलवे की साइडिग खाली कर दी थी। इसी स्टेशन पर चौदह अगस्त की रात को ही एफसीआइ की एक मालगाड़ी आजमगढ़ के लिए रवाना हुई थी। इस दौरान चावल की बोरियों को चोरी कर ठिकाने लगा दिया गया। मालगाड़ी जाने के बाद आरपीएफ जवान ने बोरियों को देखकर आरपीएफ पोस्ट पर सूचना दी। बोरियों को कब्जे में लेकर मामला दर्ज कर लेने की जगह बोरियों को ही गायब कर दिया गया। कागजों में खेल करने के लिए कामर्शियल विभाग से 1890 रुपये की वारफेज की पर्ची कटवा ली गई ताकि रिकार्ड में यह हो जाए कि धूलकोट स्टेशन पर बची बोरियां एफसीआइ की नहीं बल्कि प्राइवेट फर्म की थीं। इस खेल के लिए आरपीएफ के सीनियर गुड्स क्लर्क को भी चार्जशीट जारी की गई। पांच सितंबर को जब जागरण ने इस मामले का पर्दाफाश किया, तो अलग-अलग एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी। जागरण की पड़ताल पर तीन एजेंसियां सत्यता की मुहर लगा चुकी हैं, जबकि एफसीआइ की जांच जारी है। इंस्पेक्टर को पोस्ट से हटा दिया : आइजी

उत्तर रेलवे के आइजी एसएन पांडेय ने बताया कि आइवीजी ने आरपीएफ के इंस्पेक्टर व कांस्टेबल को जिम्मेदार ठहराया था, जिन्हें चार्जशीट दी जा रही है। इंस्पेक्टर को पोस्ट से हटा दिया गया है। इस मामले में मुकदमा दर्ज करने के भी आदेश जारी किए गए हैं।

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