दानों में श्रेष्ठ दान है भूमिदान : गीता देवी

शहर के श्री अनन्त प्रेम मंदिर में पावन कार्तिक मास की कथा चल रही है। मंदिर की परमाध्यक्षा गीता देवी महाराज ने कहा कि राजा बलि द्वारा आयोजित यज्ञ में वामन भगवान पधारे और उन्होंने उनसे तीन पग भूमि तप करने के लिए मांगी।

JagranTue, 09 Nov 2021 06:52 PM (IST)
दानों में श्रेष्ठ दान है भूमिदान : गीता देवी

अंबाला शहर (वि) : शहर के श्री अनन्त प्रेम मंदिर में पावन कार्तिक मास की कथा चल रही है। मंदिर की परमाध्यक्षा गीता देवी महाराज ने कहा कि राजा बलि द्वारा आयोजित यज्ञ में वामन भगवान पधारे और उन्होंने उनसे तीन पग भूमि तप करने के लिए मांगी। गीता देवी महाराज ने कहा कि भूमि दान करने से जीव आवागमन से मुक्त होकर भगवान विष्णु के परमपद को प्राप्त होता है, इसलिए भूमि दान से उत्तम दान न कोई हुआ है और न ही होगा। जब राजा बलि भूमि दान करने के लिए संकल्प करने को तैयार हुआ तो राजा बलि के गुरु शुक्राचार्य सूक्ष्म रूप बनाकर संकल्प करने वाले लोटे की टूंटी में जल रोककर बैठ गए क्योंकि उन्होंने अपने तपोबल से यह जान लिया था कि भगवान स्वयं वामन रूप में आए हुए हैं। वामन भगवान ने एक कुशा लोटे की टूंटी में डाल दी जिससे शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई और वह दर्द से परेशान होकर पीछे हट गए और राजा बलि ने भूमि का संकल्प दे दिया। उसी समय वामन भगवान ने विराट रूप धारण कर लिया और ब्रह्म लोक तक बढ़ गए और दो पगों में ही सारा ब्राह्मांड नाप लिया। वामन भगवान के पांव के अंगूठे से ब्राह्मांड फूट गया और फूटे हुए मार्ग से जल की अनेक धाराएं बह निकली यह जल से वामन भगवान का पैर पखारता हुआ सुमेरू पर्वत पर पड़ा और गंगा के नाम से विख्यात हुआ। उन्होंने कहा कि कार्तिक के पावन पवित्र मास में जो गंगा के जल में स्नान कर लेता है उसके स्नान व गंगा-गंगा कहने मात्र से ही प्राणी के जन्म जन्मातंरों के सारे पाप धुल जाते हैं। मंदिर के प्रवक्ता पंडित तिलक राज, सुरेश शर्मा ने बताया कि कथा सुबह 5 से 6 बजे तक मंदिर के प्रांगण में हो रही है। 12 नवंबर को सुबह 4 बजे से प्रभात फेरी निकाली जाएगी। 19 नवंबर को कथा का समापन होगा।

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