त्रिलोकपुर मंदिर में कोरोना के कारण नहीं लगेगा मेला

त्रिलोकपुर मंदिर में कोरोना के कारण नहीं लगेगा मेला

चंदेश चोपड़ा नारायणगढ़ शिवालिक की पहाडि़यों में हरियाणा-हिमाचल की सीमा कालाआम्ब से

JagranMon, 12 Apr 2021 08:10 AM (IST)

चंदेश चोपड़ा, नारायणगढ़: शिवालिक की पहाडि़यों में हरियाणा-हिमाचल की सीमा कालाआम्ब से छह किलोमीटर की दूरी पर हिमाचल के सिरमोर में गांव त्रिलोकपुर है। जिसमें लगभग चार सौ वर्ष पुराने प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां बाला सुंदरी मंदिर है। मंदिर में साल में दो बार चैत्र व अश्विन मास में नवरात्रों में पहले नवरात्र से मेला लगता है। जिसमें हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, यूपी तथा उत्तराखंड सहित देश से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु सोना, चांदी, नकदी माता के चरणों में भेंट स्वरूप चढ़ाकर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। लेकिन कोरोना के कारण हिमाचल मेलों को रद्द कर दिया है। त्रिलोकपुर माता बाला सुन्दरी मन्दिर में मेले के दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु आते थे, लेकिन कोरोना के कारण मेले में दुकाने लगाने के लिए दुकानदार मेले से पहले दुकानें लगाने के लिए जगह किराये पर लेते हैं और समान आदि भी खरीद लेते हैं। लेकिन अब रोजी रोटी छीन गई है।

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माता बाला सुंदरी की पिडी नमक के बोरे में आयी थी

भक्त लाला रामदास के 21वीं पीढ़ी के वंशज रामु का कहना है कि माता बाला सुन्दरी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के देवबन्द नामक स्थान से पिडी के रूप में नमक का व्यापार करने वाले लाला रामदास के साथ नमक की बोरी में त्रिलोकपुर से आयी थी। जो कि लाला रामदास की दुकान थी आज मन्दिर है। 1463 में शक्कर लेने के लिय ऊटों से देबबन्द गया, वहां पर मीठा का रेट तेज होने के कारण खाली हाथ क्या जाना उसने नमक के बोरे ले आया था। लाला ने देबबन्द से लाया नमक दुकान में रख दिया और उसे बेचते गए लेकिन हैरानी की बात कि नमक खत्म नहीं हुआ। लाला प्रतिदिन पीपल को जल चढ़ाया करते थे। लाला ने नमक बेचकर काफी धन कमाया और उन्हें चिता होने लगी कि नमक खत्म क्यों नहीं हो रहा। लाला की चिता देखकर बाल रूप में माता ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिये और कहा कि मैं तुम्हारी भक्ति से अत्यधिक प्रसन्न हूं। जो नमक नहीं खत्म हो रहा उसका कारण मेरी पिडी उसमें विराजमान है तुम यहां मेरे मन्दिर का निर्माण करवाओ। सिरमौर के राजा प्रदीप प्रकाश को स्वप्न में दर्शन देकर सारा वृत्तांत सुनाया था।

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दो समय होती है आरती

भक्त रामु का कहना है कि चैत्र मास का मेला सबसे बड़ा मेला होता। सुबह व शाम को माता की आरती करते हैं। कोरोना के कारण मेले व मन्दिर के कपाट बंद कर दिये गए हैं। नारायणगढ़ के सुशील अग्रवाल का कहना है कि माता बाला सुन्दरी उनकी कुल देवी है। अध्यापिका हर्ष चोपड़ा का कहना है कि सुसराल वाले शुरू से ही माता बाला सुन्दरी को पूजा करते हैं।

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