अवकाश के दिन नहीं उठ रहा कूड़ा, फिर भी होगा ठेकेदारों को भुगतान

जागरण संवाददाता, अंबाला शहर: 5.36 लाख रुपये प्रतिदिन को डोर टू डोर कूड़े का ठेका तो नगर निगम कमिश्नर ने जारी कर दिया लेकिन आज तक ठेकेदारों से यह पूछना लाजमी नहीं समझा कि उसके पास कितने कर्मी हैं। नगर निगम के सभी 20 वार्ड में स्थित 1.12 लाख घरों और प्रतिष्ठानों से रोजाना कूड़ा उठाने के लिए तीनों ठेकेदारों के पास महज 350 कर्मी ही हैं। इन कर्मियों के अवकाश पर चले जाने के बाद ठेकेदारों के पास कोई भी विकल्प निगम के पास नहीं है। हर रविवार को कर्मियों का अवकाश होता है। इसके अलावा सरकारी अवकाश के दिन भी ज्यादातर कर्मी छुट्टी पर ही रहते हैं। साल की बात करें तो पूरे साल में औसतन 52 रविवार आते हैं। इस तरह ठेकेदारों को बिना कूड़ा उठवाए ही नगर निगम दो करोड़ 78 लाख 72 हजार रुपये देगा। दरअसल, किसी भी कर्मी से सप्ताह में सात दिन काम नहीं लिया जा सकता। चाहे वह ठेके पर ही क्यों न लगे हों। यदि दिन में सप्ताह में एक दिन कर्मियों को रूटीन में एक-एक दिन करके अवकाश दिया जाता है तो प्रतिदिन 50 कर्मियों की छुट्टी करनी होगी। जोकि संभव नहीं होता। इसीलिए कर्मी मर्जी से रविवार को ही अवकाश कर लेते हैं। इसीलिए रविवार को ट्विन सिटी से कहीं भी कूड़ा नहीं उठता। हालांकि कर्मियों का छुट्टी करना अधिकार बनता है लेकिन जब कूड़ा नहीं उठता तो ठेकेदारों पर जुर्माना क्यों नहीं? इन दिनों की कटौती क्यों नहीं?

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सरकारी अवकाश के दिन भी यही हाल

होली, दीपावली, दशहरा, रविदास जयंती, विश्वकर्मा जयंती आदि 20 अवकाश ऐसे हैं जब कूड़ा नहीं उठता। ऐसे में 3 करोड़ 80 लाख से ज्यादा रुपये ठेकेदारों को नगर निगम के अफसर मुफ्त में देंगे।

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कई जगह से कूड़ादान ही हटाया

डोर टू डोर कूड़ा ठेकदारों को डं¨पग प्वाइंट से कूड़ा न उठाने पर 4 हजार रुपये जुर्माना लगाने की शर्तें तय की गई हैं। डं¨पग प्वाइटों से कूड़ा नहीं उठ रहा। ऐसे में ठेकेदारों ने मौके से कूड़ेदान ही उठवा दिए हैं। जब कूड़ेदान ही नहीं होंगे तो जुर्माना कैसे लगेगा? विकास विहार मार्केट में पिछले तीन साल से दो डस्टबिन रखे थे जिन्हें हाल ही में उठवा दिया गया है। अब यहां पर बिना डस्टबिन के कूड़ा पड़ा रहता है।

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निगम कमिश्नर ने साधा मौन

पूरे मामले में नगर निगम कमिश्नर मीनाक्षी दहिया ने मौन साध रखा है। उनसे जब इस बारे में बातचीत करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन उठाना लाजमी नहीं समझा।

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