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Gujarat: भुज के बाद सूरत में फिटनेस टेस्ट के नाम पर उतरवाए महिलाओं के कपड़े, महिला आयोग ने मांगी रिपोर्ट

सूरत, एएनआइ। गुजरात में भुज के बाद सूरत में फिटनेस टेस्ट के नाम पर महिलाओं के कपड़े उतरवाने का मामला सामने आया है। सूरत में महिला प्रशिक्षु क्लर्क को निर्वस्त्र कर स्त्री रोग संबंधी जांच की गई। इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने मुख्य सचिव (आईएएस), और डॉ जयंती एस रवि, प्रमुख सचिव (आईएएस) को मामले की जांच कर आयोग को रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है।

पीरियड्स की जांच के नाम पर कॉलेज ने पार की हदें

गुजरात में भुज स्थित श्री सहजानंद ग‌र्ल्स इंस्टीट्यूट (एसएसजीआइ) में पीरियड की जांच करने के लिए करीब 68 छात्राओं के अंत:वस्त्र (अंडरगार्मेंट्स) जबरन उतरवाने का मामला सामने आया है। ये छात्राएं अब संस्थान के अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही हैं। राष्ट्रीय एवं गुजरात महिला आयोग ने इस घटना पर संज्ञान लिया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोप सामने आने और हंगामा मचने के बाद पुलिस की एक टीम इंस्टीट्यूट पहुंची और जांच शुरू की। यह इंस्टीट्यूट स्वामीनारायण मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित है और घटना 11 फरवरी की है। कच्छ पश्चिम के पुलिस अधीक्षक सौरभ तोलुंबिया ने बताया, 'पी़ि़डतों से बात करने के लिए हमने महिला इंस्पेक्टर के नेतृत्व में एक पुलिस टीम भेजी थी और हम एफआइआर दर्ज करने की प्रक्रिया में हैं। हालांकि लड़कियां आगे आने को तैयार नहीं हैं, लेकिन हमें भरोसा है कि कम से कम एक ल़़डकी तो एफआइआर दर्ज करवाने आगे आएगी।'

गुजरात राज्य महिला आयोग ने घटना पर स्वत: संज्ञान लेकर भुज पुलिस से घटना की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। क्रांतिगुर श्यामजी कृष्ण वर्मा कच्छ यूनिवर्सिटी के प्रभारी वाइस चांसलर दर्शन ढोलकिया ने भी घटना की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है। एसएसजीआइ इसी यूनिवर्सिटी से संबद्ध है।

नियमों के मुताबिक, साथ नहीं खा सकतीं खाना

इंस्टीट्यूट में नियम है कि पीरियड्स के दौरान छात्राएं अन्य छात्राओं के साथ खाना नहीं खा सकतीं। कुछ छात्राओं ने इस नियम का उल्लंघन किया। ढोलकिया ने बताया, 'जब मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो कुछ लड़कियों ने खुद ही महिला कर्मचारी को उन्हें जांचने की अनुमति दी। ल़़डकियों ने मुझे बताया कि हॉस्टल के नियम तो़ड़ने के लिए उन्होंने अधिकारियों से माफी मांगी थी। ल़़डकियों ने मुझे बताया कि उन्हें धमकाया नहीं गया और इसमें उन्हीं की गलती थी। तकनीकी रूप से इस मामले में कुछ करने के लिए बचा नहीं है।' बताते हैं कि हॉस्टल नियमों के मुताबिक पीरियड्स के दौरान ल़़डकियों का दूसरों को छूना और कुछ स्थानों पर प्रवेश करना भी वर्जित है।

लड़कियां चाहती हैं सख्त कार्रवाई

हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा ने बताया कि एक महिला कर्मी 60 से ज्यादा छात्राओं को वॉशरूम लेकर गई थी और पीरियड्स की जांच करने के लिए उनसे अपने अंडरगार्मेट्स उतारने के लिए कहा। उक्त छात्रा ने कहा, 'कॉलेज की प्राचार्य रीता रणिंगा के इशारे पर हॉस्टल अधिकारियों ने हमें इस तरह प्रता़ि़डत किया। हम प्राचार्य और इस घटना में शामिल अन्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई चाहते हैं।'

एनसीडब्लू ने गठित की जांच समिति

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्लू) ने भी एक जांच समिति गठित की है जो इंस्टीट्यूट जाकर छात्राओं से मुलाकात करेगी और घटना के बारे में जानकारी हासिल करेगी। आयोग ने इस घटना के बारे में श्री सहजानंद ग‌र्ल्स इंस्टीट्यूट कॉलेज के ट्रस्टी प्रवीण पिंडोरा और प्राचार्य रीता रणिंगा से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, प्रभारी वाइस चांसलर दर्शन ढोलकिया और डीजीपी शिवानंद झा से मामले की विस्तृत जांच कर जल्द से जल्द कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा है।

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