Gujarat: राजीनामे के आधार पर महिला को पिता की संपत्ति पर अधिकार से बेदखल नहीं कर सकतेः हाई कोर्ट

Gujarat महिला को पिता की संपत्ति में हिस्से के उसके अधिकार से महज ऐसे राजीनामे के आधार पर बेदखल नहीं किया जा सकता जिस पर उसने अपना अधिकार छोड़ने के संदर्भ में हस्ताक्षर किए हों। यह बात गुजरात हाई कोर्ट ने कही।

Sachin Kumar MishraWed, 14 Jul 2021 08:14 PM (IST)
राजीनामे के आधार पर महिला को संपत्ति के अधिकार से बेदखल नहीं कर सकतेः हाई कोर्ट। फाइल फोटो

अहमदाबाद, प्रेट्र। गुजरात हाई कोर्ट ने कहा है कि एक महिला को पिता की संपत्ति में हिस्से के उसके अधिकार से महज ऐसे राजीनामे के आधार पर बेदखल नहीं किया जा सकता जिस पर उसने अपना अधिकार छोड़ने के संदर्भ में हस्ताक्षर किए हों। जस्टिस एवाई कोजे की पीठ ने भावनगर जिले की एक महिला रोशन डेराइया की याचिका पर यह आदेश दिया। रोशन ने जिला प्रशासन के उस फैसले को चुनौती दी थी जिसमें उसने राजीनामे को स्वीकार करते हुए जमीन के राजस्व रिकार्ड में उनका नाम शामिल करने से इन्कार कर दिया था। रोशन और उनकी बहन हसीना ने अक्टूबर, 2010 में अपने पिता की मृत्यु से पहले उनके समक्ष राजीनामे पर हस्ताक्षर किए थे।

इस राजीनामे के मुताबिक उन्होंने जमीन के अपने हिस्से पर अधिकार अपने तीन भाइयों के समर्थन में छोड़ दिए थे। इसी राजीनामे के आधार पर राजस्व रिकार्ड से उनके नाम बाहर कर दिए गए थे।पिता की मृत्यु के बाद जब जमीन याचिकाकर्ता के भाइयों के नाम पर हस्तांतरित की गई तो उन्होंने डिप्टी कलेक्टर से संपर्क किया और उस राजीनामे के आधार उनका नाम राजस्व रिकार्ड से बाहर करने पर सवाल उठाया जिस पर उन्होंने अपने पिता के जीवित रहते हस्ताक्षर किए थे। लेकिन डिप्टी कलेक्टर और कलेक्टर ने उनका आवेदन खारिज कर दिया। वहीं, देरी के आधार पर राजस्व विभाग ने भी जून, 2020 में उनकी अपील ठुकरा दी। सोमवार को उपलब्ध कराए गए आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि मृत्यु के बाद जमीन पर पिता के हिस्से के उत्तराधिकार के लिहाज से याचिकाकर्ता के अधिकार की पड़ताल की जानी चाहिए थी।

अदालत ने कहा, 'राजीनामे को पिता की मृत्यु के बाद उनके हिस्से में से याचिकाकर्ता के अधिकार को छोड़ने की तरह नहीं माना जा सकता। इसलिए प्रासंगिक सामग्री पर विचार नहीं करने के आधार पर डिप्टी कलेक्टर का आदेश गलत है। अगर राजीनामे को अधिकार छोड़ने के आधार के तौर पर इस्तेमाल करना भी है तो इसे पुख्ता सुबूत द्वारा स्थापित करना होगा।'याचिकाकर्ता का अदालत से कहना था कि उनकी आपत्ति के बावजूद अधिकारियों ने राजीनामे को स्वीकार किया और उनके पिता के हिस्से की जमीन को उनकी अनुमति या सहमति के बिना उनके तीन भाइयों में वितरित कर दिया। जब उन्होंने राजस्व विभाग से संपर्क किया तो उसने देरी का हवाला देते हुए कहा कि वह पिता की मृत्यु के छह साल बाद दावा कर रही हैं।

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