गांधीनगर नगर निगम परिणाम: मनपा की 44 में से 41 सीट पर भाजपा की जीत, आप के कारण गांधीनगर में भी कांग्रेस साफ

Gandhinagar Nagar Nigam Resultगांधीनगर महानगर पालिका के चुनाव में भाजपा 44 सीट में से 41 सीटों पर विजयी रही। मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई देते हुए कहा कि भाजपा अध्‍यक्ष पाटिल अब विधानसभा की 182 सीट जीतने की तैयारी में लग गये हैं।

Babita KashyapTue, 05 Oct 2021 08:49 AM (IST)
गांधीनगर महानगर पालिका के चुनाव में भाजपा को मिली बंपर जीत

अहमदाबाद, जागरण संवाददाता। गांधीनगर महानगर पालिका के चुनाव में भाजपा को बंपर जीत मिली है, 44 सीट में से भाजपा ने 41 पर कब्‍जा जमाया जबकि कांग्रेस 2 व आप 1 सीट ही जीत सकी। आम आदमी पार्टी सूरत के बाद गांधीनगर में भी कांग्रेस के लिए घातक साबित हुई। मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई देते हुए कहा कि भाजपा अध्‍यक्ष पाटिल अब विधानसभा की 182 सीट जीतने की तैयारी में लग गये हैं। उधर पाटिल का कहना है कि गुजरात में तीसरी पार्टी के लिए कोई जगह नहीं है। चुनाव परिणाम आते ही कार्यकर्ताओं ने गांधीनगर से लेकर सूरत तक जश्‍न मनाया, जश्‍न में शामिल होने मुख्‍यमंत्री व प्रदेश अध्‍यक्ष गांधीनगर भाजपा कार्यालय पर पहुंचे।

गांधीनगर महानगर पालिका सहित 3 नगरपालिका के चुनाव गत रविवार को हुए जिसमें एक नगरपालिका को छोडकर सभी पर भाजपा को भारी बहुमत मिला। गांधीनगर महानगर पालिका में भाजपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी के बीच मुकाबला था जिसमें भाजपा ने 44 में से 41 सीट जीतकर मनपा पर कब्‍जा बरकरार रखा है। गांधीनगर मनपा में भाजपा को पहली बार पूर्ण बहुमत मिला है, गांधीनगर के अलावा थरा व ओखा नगर पा‍लिका में भी भाजपा को जीत हासिल हुई जबकि 25 साल बाद कांग्रेस ने भाणवड नगर पालिका भाजपा से छीन ली। आम आदमी पार्टी का हाल काफी बुरा रहा। मनपा में जीत के दावे करने वाली पार्टी को महज एक सीट पर ही संतोष करना पडा। आम आदमी पार्टी को गांधीनगर मनपा चुनाव से काफी उम्‍मीद थी, पार्टी ने इस चुनाव में पूरी ताकत लगा दी थी। दिल्‍ली के उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी यहां रोड शो किया लेकिन चुनाव परिणाम ने आप की उम्‍मीदों पर पानी फेर दिया। आप के चलते सूरत मनपा में कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका था, गांधीनगर में भी कमोबेश ऐसा ही रहा।

गुजरात में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गांधीनगर महानगर पालिका के चुनाव को सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा था जिसमें भाजपा को प्रचंड जीत मिली। इससे पहले फरवरी-मार्च 2021 में हुए निकाय व पंचायत चुनाव में भी भाजपा 90 फीसदी सीटें जीतने में कामयाब रही थी। भाजपा की कमान पाटिल के हाथ में आने के बाद से गुजरात में भाजपा का वर्चस्‍व तेजी से बढा है, गुजरात में नेत्रत्‍व परिवर्तन के प्रयोग पर गांधीनगर के मतदाताओं ने अपनी मुहर लगा दी है। मनपा चुनाव में खुद मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र पटेल, प्रदेश अध्‍यक्ष सी आर पाटिल सहित कई वरिष्‍ठ मंत्री व युवा नेता भी प्रचार के लिए उतरे थे। कांग्रेस ने भी अपने दो दर्जन नेताओं को चुनाव का जिम्‍मा सौंपा था लेकिन भाजपा के सामने कांग्रेस व आप की रणनीति फेल हो गई।

टिकट रद करा दें आप नेता- पाटिल

प्रदेश भाजपा अध्‍यक्ष सी आर पाटिल ने शाम को अभिवादन कार्यक्रम में आप नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दिल्‍ली से अहमदाबाद की टिकट रद्द करा दो, गुजरात में तीसरी पार्टी के लिए कोई जगह नहीं है। एक सीट जीतने वाली पार्टी गांधीनगर मनपा में सत्‍ता में आने के सपने देख रही थी। विरोधी कहते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता घट रही है, चुनाव परिणाम से उसका जवाब मिल गया है। प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता उत्‍तरोत्‍तर बढती जा रही है। गुजरात की जनता यहां का शासन किसी ओर के हाथ में देने को तैयार नहीं है।

पाटिल 182 सीट जीतने की तैयारी में

मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रदेश भाजपा कार्यालय पर पाटिल को जीत की बधाई दी, इसके बाद कार्यकर्ताओं से कहा कि पाटिल अब विधानसभा की सभी 182 सीट जीतने की तैयारी में लग गये हैं। मुख्‍यमंत्री ने बताया कि पाटिल ने उन्‍हें चुनाव परिणाम की सूचना देते हुए कहा कि गांधीनगर मनपा में हम 3 सीट हार गये हैं। पाटिल के इस तरह के रुख से मुख्‍यमंत्री खुद हैरान हुए ओर कहा कि सभी सीट जीतने का उनका सपना विधानसभा में जरूर पूरा होगा।

3 अक्टूबर रविवार को हुआ था मतदान 

गुजरात की राजधानी गांधीनगर महानगर पालिका व तीन नगर पालिकाओं के लिए हुए चुनाव की मतगणना शुरू हो चुकी है। गांधीनगर महानगरपालिका के लिए 3 अक्टूबर रविवार को मतदान हुआ था। वर्ष 2016 के अनुपात में इस बार करीब 5 फ़ीसदी अधिक रहा। ‌ गांधीनगर महानगर पालिका में दो लाख 80 हजार मतदाता है। 11 वार्ड की 40 सीटों के लिए 161 प्रत्याशी मैदान में थे। गांधीनगर महानगर पालिका का चुनाव हर बार रस्साकशी भरा होता है। पिछले चार चुनाव में भाजपा को यहां बहुमत नहीं मिला लेकिन हर बार महापौर भाजपा का ही चुना जाता है। पिछली बार भाजपा में कांग्रेस दोनों को 15-15 सीटें मिली लेकिन कांग्रेस के मेयर पद के उम्मीदवार भाजपा में शामिल हो गए जिसके बाद भाजपा का बोर्ड बन गया था।

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