गुजरात में गर्मी से बचने के लिए कार को गोबर से ढक दिया

अहमदाबाद, एएनआइ। गुजरात मेें इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। गर्मी से बचने के लिए अहमदाबाद निवासी सेजल शाह ने अपनी कार को गोबर से ढक दिया। उनके मुताबिक, गर्मी असहनीय हो रही थी। मैंने अपने घर में फर्श के लिए गोबर का इस्तेमाल किया और मैंने अपनी कार को भी गोबर से ढक दिया।  

गौरतलब है कि गुजरात में गर्मी शुरू होते ही भीषण जलसंकट गहराने लगा है। इसके चलते अब राज्य सरकार उद्योगों को उपयोग के लिए 75 फीसद तक रिसायकल वाटर उपलब्ध कराएगी। इस बीच, महानगर पालिका को दिए जाने वाले पानी के दाम में भी प्रति हजार 29 पैसा बढ़ा दिया है। राज्यों के नर्मदा बांध सहित प्रमुख बांधों में पानी का स्रोत नीचे चला गया है। करीब 110 बांध ऐसे हैं, जिनमें पानी की एक बूंद भी नहीं बची है।

सौराष्ट्र, कच्छ व उत्तर गुजरात में सिंचाई व पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। कच्छ से कई पशुपालक परिवार अपना घर छोड़कर अहमदाबाद, सूरत व राजकोट जैसे शहरों के आसपास पड़ाव डाल रहे हैं। राज्य सरकार ने जनवरी में ही 300 करोड़ का जल संरक्षण व जलस्रोतों के पुनरुद्धार का कार्यक्रम चलाया है, लेकिन लोकसभा चुनाव आ जाने से अभियान जोर नहीं पकड़ पाया।

पिछले वर्ष भी सरकार ने जनभागीदारी से ऐसा अभियान चलाकर राज्या के जलसंग्रह में हजारों लाख घन फुट की बढ़ोतरी की थी, लेकिन सरकार व प्रशासन के अकुशल जलप्रबंधन के चलते अप्रैल से ही राज्यभर में लोगों को जलसंकट का सामना करना पड़ गया। मुख्यपमंत्री विजय रूपाणी ने जिला कलेक्टरों के साथ बैठक कर जलसंकट से निपटने के निर्देश दिए। दूरदराज इलाकों में जहां पाइप लाइन से पानी नहीं पहुंचाया जा सकता, वहां टैंकर से पानी भेजने की बात कही गई।

उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल का कहना है कि राज्य में जुलाई तक पानी की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। राज्योंं के बांधों में पानी है। उधर, सरकार ने उद्योगों को दिए जाने वाले पानी में कटौती करते हुए उन्हें व्यवसायिक उपयोग के लिए 75 फीसद रिसायकल पानी काम में लेने को कहा है। सरकार इन्हें अब पहले की तरह नर्मदा का शु्द्ध पानी उपलब्ध नहीं कराएगी। सरकार ने अहमदाबाद म‍हानगर पालिका को दिए जाने वाले पानी के दाम प्रति हजार लीटर 29 पैसा बढ़ा दिए हैं।

पिछले वर्ष सरकार मनपा को दो रुपये 85 पैसे प्रति हजार लीटर के भाव से पानी उपलब्ध कराती, जिसके बदले अब तीन रुपये 14 पैसे वसूल करेगी। वर्ष 2009-10 में मनपा को एक रुपये 33 पैसे प्रति हजार लीटर के भाव से पानी उपलब्ध कराया जाता था। सरकार नर्मदा मुख्य नहर, कोतरपुर वाटर प्लांट, जासपुर वाटर प्लांट से मनपा को पानी उपलब्ध कराती है। राजस्व विभाग के मुताबिक, राज्य के 110 डैम पूरी तरह सूख गए हैं, जिनमें एक बूंद पानी भी नहीं बचा है। 203 बांध ऐसे हैं, जिनमें बीस फीसद पानी भरा है। सरदार सरोवर नर्मदा बांध में भी 51 फीसद पानी है, लेकिन एक निश्‍चित लेवल से नीचे के पानी का उपयोग करने के लिए सरकार को नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी से मंजूरी लेनी पड़ती है।

कच्छ से पलायन
चारा व पानी की समस्या के चलते कच्छ भुज के बन्नीे इलाके के एक दर्जन से अधिक गांव लूणानाना, बुरकुल, हाजीपीर, सरोडानाना, सरोडा मोटा, भीटारा,उधमा आदि गांवों के करीब 150 महिला, पुरुष व बच्चों ने पशुओं के साथ अहमदाबाद साणंद के इयावागांव में शरण ली। इनमें 40 बच्चेे हैं, चारा व पानी के अभाव में एक दर्जन भैसों की मौत भी हो चुकी है। प्रशासन व ग्रामीण इनके अस्थायी रूप से रहने व खाने की व्यवस्था कर रहे हैं।

जलसंचय अभियान एक नजर में
मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने गुजरात के स्थापना दिवस पर भरूच जिले के अंकलेश्वर तालुका के कोसमड़ी में तालाब की मिट्टी खोद कर सुजलाम सुफलाम जल संचय अभियान का उद्घाटन किया। इसके तहत एक माह में 11000 लाख घन फुट वर्षा जल के संचय का लक्ष्य रखा गया। इसके तहत उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने अपने गृह जिले महेसाणा में व अन्य मंत्रियों ने विभिन्न जिलों में इस अभियान की शुरुआत की।

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