Nepotism को लेकर इन 12 टेलीविजन सेलेब्स का ये है स्टेटमेंट

मुंबई। करण जौहर और कंगना रनौत के बीच नेपोटिज्म को लेकर हुए विवाद के बाद एक बार फिर इसको लेकर बवाल होना शुरू हो गया है। हाल ही में न्यूयॉर्क में हुए आइफा अवॉर्ड शो में एक एक्ट में नेपोटिज्म को लेकर कंगना का मजाक उड़ाया गया था। अब नेपोटिज्म को लेकर टीवी इंडस्ट्री के सेलेब्स का क्या है कहना आइए आपको बताते हैं। 

आइफा में एक्ट को डायरेक्टर करण जौहर, एक्टर सैफ अली खान और वरुण धवन ने परफॉर्म किया था। हालांकि करण, सैफ और वरुण ने कंगना से इसके लिए मांफी मांग ली थी। नेपोटिज्म एेसा मुद्दा है जो चर्चाओं में रहा है। तो बॉलीवुड की तरह टीवी इंडस्ट्री में भी नेपोटिज्म है, इसको लेकर टीवी सेलेब्स का ये है कहना। 

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शुभांगी अत्रे: टेलीविजन इंडस्ट्री में नेपोटिज्म के लिए कोई जगह नहीं है। मुझे लगता है कि, यहां पर लोगों को आसानी से ग्रो करना का मौका मिलता है। लेकिन सर्वाइव करने के लिए टैलेंट जरूरी है। मैं खुदको लकी मानती हूं कि मुझे हमेशा लीड रोल ही अॉफर किए गए। अगर हम फिल्मों की बात करें तो एेसा लगता है कि नेपोटिज्म है लेकिन किसी भी स्टार किड की लॉन्चिंग एक्सपेक्टेड रहता है चूंकि जैसे ही वो पैदा होते हैं मीडिया उन्हें पॉपुलर बना देती है। 

देवोलीना भट्टाचार्य: बतौर एक्ट्रेस टेलीविजन ने मुझे एक्सेप्ट किया है और मुझे अपने आपको प्रूव करने का मौका दिया है। मैंने कभी भी अपने वर्किंग एनवायर्नमेंट में नेपोटिज्म को फेस नहीं किया। लेकिन हां, हम सभी बॉलीवुड के सपना लेकर ही बड़े होते हैं। तो बाद में लगता है कि नेपोटिज्म कही न कही है।

अदिती गुप्ता: नेपोटिज्म की टेलीविजन इंडस्ट्री में कोई जगह नहीं है। मुझे हमेशा टैलेंट के कारण रोल्स मिले हैं। मैं पर्सनल लाइफ को प्रोफेशनल लाइफ के साथ मिक्स करने के बारे में सोच भी नहीं सकती। बात करें बॉलीवुड की तो टीवी में टैलेंट को ज्यादा स्कोप मिलता है और अब ये छोटा परदा नहीं रह गया है। और मेरी फैमिली से इंडस्ट्री में कोई नहीं है जिससे मैं नेपोटिज्म को एंजॉय कर सकूं। 

रिद्धिमा पंडित: जिस प्रकार फिल्म्स में नेपोटिज्म है टेलीविजन में नहीं है। जबकि टेली टाउन ने तो बहुत सारे एक्टर्स को मौका दिया है उनके टैलेंट को शो करने का। टेलीविजन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री एेसी धरती है जहां मौके ही मौके हैं। टेली स्क्रीन अब छोटी नहीं रह गई है जो पहले हुआ करती थी। ये बॉलीवुड की तरह ग्रो कर रही है। 

माहिका शर्मानेपोटिज्म सिर्फ एक मौका दिला सकता है लेकिन एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में लाइफ जीने के लिए टैलेंटेड होना जरूरी है। अगर आपके अंदर एबिलिटी नहीं है तो कोई भी आपको स्टार नहीं बना सकता। बॉलीवुड में ही बहुत सारे उदाहरण है जहां नेपोटिज्म काम नहीं आता जबकि लोग स्टार फैमिली से होते हैं। पहले लोग बैक रूम अॉडिशन की बात करते थे और अब नेपोटिज्म। इससे इंडस्ट्री पॉल्यूट हो रही है। 

नीती टेलर: टीवी टाउन में नेपोटिज्म नहीं है। मैं इस इंडस्ट्री का हिस्सा हूं और हार्डवर्क को एंजॉय कर रही हूं। यहां से मुझे आगे बढ़ने के लिए सपोर्ट और पॉजिटिविटी मिलती है। एक्टिंग स्किल्स के कारण ही रोल्स मिलते हैं। बॉलीवुड की बात करें तो कुछ को एजी लॉन्च मिल जाता है लेकिन फिर से बात लाइफ को एक आर्टिस्ट की तरह जीने की बात आती है जिसके लिए टैलेंट आवश्यक है। बिना टैलेंट के तो रेफरेंस भी काम नहीं करते। 

मनीष गोपलानी: टेलीविजन इंडस्ट्री में नेपोजिज्म के लिए कोई जगह नहीं है। टेलीविजन सबके लिए एक जैसा है। अगर आपके पास स्किल्स है तो आप ग्रो करोगे। जितना ज्यादा आप काम करोगे उतनी ज्यादा ग्रोथ मिलेगी। अगर बॉलीवुड में नेपोटिज्म है तो स्टारकिड आसानी से खुदको शोकेस कर पाते हैं। दूसरों की तुलना में स्टारकिड आसानी से लॉन्च हो जाते हैं।

श्रेनू पारिख: मुझे नहीं लगता कि टीवी इंडस्ट्री के लिए नेपोटिज्म मीनिंगफुल वर्ड है। नए टैलेंट के लिए टेलीविजन बेस्ट मीडियम है जिसमें से मैं एक हूं। मेरा या मेरी फैमिली का किसी से कनेक्शन नहीं है पर फिर भी मैं अच्छा कर रही हूं। एेसे कई उदाहरण हैं। मुझे लगता है टीवी फेयरेस्ट मीडियम है। 

यश सिन्हा: मैं टेलीविजन और इंडियन फिल्म इंडस्ट्री दोनों का हिस्सा रहा हूं। एक्सपीरियंस कहता है कि, नेपोटिज्म के लिए टेलीविजन एंटरटेननेंट इंडस्ट्री में कोई जगह नहीं है। मैं सहमत हूं कि, बॉलीवुड में मेकर्स तक पहुंचने का कारण होता है क्योंकि वो साथ में बड़े होते हैं। एक दूसरे को जानते हैं। और इसमें गलत क्या है जब टैलेंट आपके सामने है तो उसका उपयोग क्यों न किया जाए। मुझे लगता है फिल्म फैमिली के बच्चों को अपना खुद स्ट्रगल करना होता है। मैं महसूस करता हूं कि नेपोटिज्म हर फील्ड में है। कई एक्टर्स एेसे भी हैं जिनका कोई कनेक्शन नहीं था लेकिन वो अच्छा कर रहे हैं। 

तेजस्वी प्रकाश: टेली इंडस्ट्री से नेपोटिज्म बर्ड का कोई रिलेशन नहीं है। टेली स्क्रीन सबको बराबर मौका देती है अपने टैलेंट को दिखाने का। यह सब आपके टैलेंट और हार्डवर्क पर डिपेंड करता है कि आप बतौर आर्टिस्ट कितना ग्रो करते हैं। नेपोटिज्म और ब्यूटी से बड़ी ग्रोथ हासिल नहीं की जा सकती। न ही कपड़े उतारने से। यह सब सिर्फ आपको हेडलाइन्स में ला सकता है। अगर आपके अंदर टैलेंट है तो आप एक आर्टिस्ट की लाइफ को जी सकते हैं और अच्छी ग्रोथ हासिल कर सकते हैं। फिर वो टीवी हो, बॉलीवुड हो या हॉलीवुड। 

रूप दुर्गापाल: टैलेंट और हार्डवर्क का कोई सब्सटीट्यूट नहीं है, चाहे वो कोई भी इंडस्ट्री हो। यह जरूरी नहीं कि नेपोटिज्म है या नहीं जबतक कि आपके अंदर क्वालिटी न हो। नहीं तो आप ज्यादा सर्वाइव नहीं कर सकते। यह जरूरी है कि अपनी लर्निंग और स्किल्स को लगातार बढ़ाया जाए। 

तान्या शर्मा: मुझे नहीं लगता कि नेपोटिज्म होता है। अगर एेसा है तो वो लंबे समय तक नहीं चल सकता। इंडस्ट्री में लाइफ बिताने के लिए हार्डवर्किंग और टैलेंटेड होना जरूरी है।

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