यमला पगला दीवाना का टाइटल मेड इन पंजाब था, निर्देशक समीर कार्णिक ने बताया, क्यों बदला नाम

धर्मेंद्र और उनके दोनों बेटे सनी देओल और बॉबी देओल। फोटो- यू-ट्यूब

धर्मेंद्र सनी और बॉबी के काम करने की शैली काफी अलग है। धर्मेंद्र जी डायलॉग्स अपने मन से बना लेते हैं। सनी साहब भी जो लिखा है उसे बदलकर बोलते हैं। वहीं बॉबी हमेशा स्क्रिप्ट को फॉलो करते हैं। बॉबी के साथ मेरी चार फिल्में हो गई हैं।

Manoj VashisthFri, 26 Feb 2021 05:29 PM (IST)

स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। फिल्म 'अपने' के बाद सदाबहार अभिनेता धर्मेंद्र और उनके दोनों बेटे सनी देओल और बॉबी देओल वर्ष 2011 में आई फिल्म 'यमला पगला दीवाना' में नजर आए थे। बॉक्स ऑफिस पर हिट इस फिल्म में 30 साल पहले बिछुड़े परिवार का मिलन, बाप और छोटे बेटे का ठग होना, छोटे बेटे की प्रेम कहानी जैसे पहलुओं को शामिल किया गया था। फिल्म से जुड़ी यादें साझा कर रहे हैं निर्देशक समीर कार्णिक...

फ़िल्म का टाइटल मेड इन पंजाब था

'यमला पगला दीवाना' पर तो मैं किताब लिख सकता हूं। मेरे पास उसकी कई अच्छे यादें हैं और बुरी भी। इस फिल्म की शुरुआत आसान नहीं थी। हमारे पास पैसे नहीं थे। मैंने सनी देओल से कहा कि थोड़े पैसे अरेंज करके पहला शेड्यूल कर लेते हैं। मगर वापस आने के लिए हमारे पास पैसे नहीं हैं। सनी ने कहा कि आप पापा और बॉबी को इस बारे में मत बताना हम दोनों कर लेते हैं। जब हम फिल्म की शूटिंग शुरू करने वाले ही थे, तब नितिन मनमोहन आए। उन्होंने कहा कि वह फिल्म को प्रोड्यूस करेंगे। इस तरह हम दोनों निर्माता बन गए।

हमने शूटिंग आरंभ की। पंजाब का 55 दिन का शेड्यूल था। फिल्म का टाइटल पहले 'मेड इन पंजाब' था। उसके बाद कुछ और टाइटल जेहन में आए। 'मैं जट यमला पगला दीवाना' गाना धर्मेंद्र की फिल्म 'प्रतिज्ञा' का था। मैंने धरम जी से कहा कि यह शीर्षक दिमाग में आया है। उन्होंने कहा कि गाने की लाइन से 'मैं जट' काट दे, 'यमला पगला दीवाना' रख ले। इसलिए फिल्म में हमने वह गाना भी रखा।

महेश्वर में बनाया वाराणसी

फिल्म में वाराणसी का जिक्र है, पर हम शूटिंग के लिए वारणसी नहीं गए थे। मध्य प्रदेश में इंदौर से 90 किमी की दूरी पर महेश्वर एक जगह है। वहां पर हमने इसकी शूटिंग की थी। फिल्म के लिए इस लोकेशन को मैंने ही खोजा था। बाद में इस लोकेशन पर 'पैडमैन' समेत कई फिल्मों की शूटिंग हुई है। पंजाब में शूटिंग के अनुभव बहुत अच्छे रहे। हमने पटियाला में पूरे होटल को स्टार कास्ट के लिए बुक कर लिया गया था। वह एक तरह से हमारे लिए 50 दिनों के लिए प्राइवेट प्रॉपर्टी बन गई थी। हम वहां पर ऐसे रह रहे थे जैसा हमारा घर हो। उतने दिन वहां पर आम लोगों के लिए रेस्त्रां बंद थे।

रनिंग शॉट में फंस जाते हैं बॉबी

बहरहाल, धर्मेंद्र, सनी और बॉबी के काम करने की शैली काफी अलग है। धर्मेंद्र जी डायलॉग्स अपने मन से बना लेते हैं। सनी साहब भी जो लिखा है उसे बदलकर बोलते हैं। वहीं बॉबी हमेशा स्क्रिप्ट को फॉलो करते हैं। बॉबी के साथ मेरी चार फिल्में हो गई हैं। बॉबी को जब लाइन दे दें तो खुश हो जाते हैं, लेकिन उन्हें रनिंग शॉट में फंसा दो तो हक्के-बक्के हो जाते हैं। तीनों को मैंने अलग-अलग कहानी सुनाई थी। तीनों ने सुनने के बाद स्वीकृति दे दी थी। धर्मेंद्र जी ने तो बस यह पूछा था कि मेरा रोल क्या होगा।

ऐसे आया शोले का टंकी वाला सीन

सुपरहिट फिल्म 'शोले' के पानी की टंकी वाले सीन को हमने इसमें इस्तेमाल किया। बॉबी का किरदार अपने प्यार को पाने की कोशिश कर रहा है। सनी कहते हैं कि वह दिन गए जब टंकी पर चढने से बात बन जाती थी। तू टंकी पर चढ़ जाएगा, तब भी लड़की नहीं मिलने वाली। आज जमाना बदल गया है। ये बातें हमारे बीच डिस्कस हुई थीं, फिर मुझे नॉस्टैलजिया हो गया कि धरम जी टंकी पर चढ़ गए थे। वह हिंदी सिनेमा का कालजयी सीन है। ऑडियंस के पास उस सीन की यादें ताजा रहती हैं। यही वजह है कि बॉबी को हमने वही कॉस्ट्यूम पहनाया था, जो धर्मेंद्र जी ने 'शोले' के उस सीन में पहना था।

गांव वालों ने निभाया 'भीड़' का किरदार

इसी तरह फिल्म में एक सीन है, जिसमें सनी साहब मंच पर भाषण देते हैं। मेरे पास भीड़ तो नहीं थी। मैंने प्रोडक्शन वालों से कहा कि आसपास लोगों को बता दो कि सनी देओल यहां पर शूटिंग कर रहे हैं। जैसा सोचा था वैसा हुआ। वहां पर उनकी फैन फालोइंग गजब की है। पूरा गांव आ गया। वह असली भीड़ थी। उन्हें जैसे निर्देश दो वे वैसा ही चिल्लाते थे। फिल्म में खुली जीप वाला सनी देओल का एक सीन हो रहा था तो मैं जीप के बोनट पर लटका हुआ था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वह सही डायलॉग बोल रहे हैं। उस सीन को हमने तीन-चार बार किया था। उसके लिए मुझे केबल से बांधा गया था ताकि मैं गिर न जाऊं।

काम कर गयी अनुपम खेर की सलाह

शूटिंग के दौरान अनुपम खेर ने एक बात कही थी, उसे मैं भूल नही सकता हूं। फिल्म में वह बार-बार हवा में खाली रिवाल्वर को फायर करते हैं। यह कभी स्क्रिप्ट में था ही नहीं। अनुपम ने कहा कि मैं यह एलिमेंट फिल्म में रखता हूं। मैंने कहा, ऐसा क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा, जब फिल्म मुंबई के गेटी गैलेक्सी में रिलीज होगी, तब तुम मेरे पास आना और हम साथ में उसे देखने जाएंगे। फिल्म रिलीज के समय हम साथ में गेटी गैलेक्सी गए थे। वह अंदाज वाकई हिट हो गया। उन्होंने कहा, देखो पब्लिक क्या बोल रही है। यह फिल्म मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगी।

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