Valentines Day 2021 : कभी पहली नजर में हो जाता था प्यारा..., अब फिल्मों में बदला रोमांस का अंदाज

Valentines Day Special Story Know About Love Stories And Romance Change In Bollywood

स्टार किड की लांचिंग के लिए रोमांटिक या प्रेम कहानी हमेशा से फिल्ममेकर्स की पसंद रही हैं। रोमांटिक फिल्म माशूक से डेब्यू करने वाले दिलीप कुमार के भतीजे और अभिनेता अयूब खान का कहना है कि पहले हिंदी सिनेमा में रोमांस को लेकर बहुत ही गलत किस्म की समझ थी।

Priti KushwahaSat, 13 Feb 2021 11:30 AM (IST)

मुंबई, जेएनएन। हीरोइन को देखते ही पहली नजर में हीरो को प्यार होना। उसका पीछा करना, दोनों का एक-दूसरे के लिए इकरार करना और सामाजिक दीवारों को तोड़ते हुए अपने प्यार की खातिर किसी भी हद से गुजर जाना जैसी प्रेम कहानियों का दौर अब सिनेमाई पर्दे से लगभग गायब हो गया है। यह वह जॉनर है जो नवोदित कलाकार या स्टार किड को लांच करने के लिए सेफ माना जाता था। आमिर खान, सलमान खान जैसे कलाकारों ने रोमांटिक फिल्मों से डेब्यू किया था, पर अब सफलता का यह फार्मूला पीछे छूट चला है। स्टार किड्स भी रोमांटिक के बजाय दूसरे जॉनर से लांच हो रहे हैं। आने वाले दिनों में सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी, डैनी के बेटे रिंजिंग एक्शन फिल्म से लांच होंगे। हालांकि फिल्मी जानकारों का यह भी कहना है कि जॉनर कोई भी हो उसकी पृष्ठभूमि में प्रेम हमेशा मौजूद रहेगा। रोमांटिक फिल्मों के बदलते ट्रेंड की पड़ताल कर रहे हैं प्रियंका सिंह व दीपेश पांडेय...

आने वाले दिनों में सुनील शेट्टी के बेटे अहान शेट्टी, बोनी कपूर की दूसरी बेटी खुशी कपूर, शाह रुख खान की बेटी सुहाना खान, संजय कपूर की बेटी शनाया कपूर की लांचिंग पर सभी की निगाहें टिकी हैं। स्टार किड की लांचिंग के लिए रोमांटिक या प्रेम कहानी हमेशा से फिल्ममेकर्स की पसंद रही हैं। रोमांटिक फिल्म 'माशूक' से डेब्यू करने वाले दिलीप कुमार के भतीजे और अभिनेता अयूब खान का कहना है कि पहले हिंदी सिनेमा में रोमांस को लेकर एक बहुत ही गलत किस्म की समझ थी। लड़की को छेडऩा या उनसे बद्तमीजी करने से ही रोमांस की शुरुआत होती थी। अब इन सब चीजों से हटकर स्वाभिमान, एक-दूसरे का सम्मान और अपने साथी के विचारों की स्वीकृति और आपसी सहमति को रोमांस के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा। यह जरूरी भी था, वरना फिल्में देखने के बाद लोगों में यह समझ विकसित होती थी कि लड़की को छेडऩा रोमांस कहलाता है।

नए कलाकारों के लिए किफायती जॉनर

अभिनेत्री पूनम ढिल्लो के बेटे अनमोल ठकेरिया ढिल्लो रोमांटिक फिल्म 'ट्यूजडेज एंड फ्राइडेज' से लांच हो रहे हैं। संजय लीला भंसाली और भूषण कुमार के प्रोडक्शन हाउस तले बनी इस फिल्म का निर्देशन तरनवीर सिंह ने किया है। वह कहते हैं, 'दूसरे जॉनर्स की तुलना में रोमांस नए कलाकारों के लिए थोड़ा आसान होता है। हालांकि एक्शन, साइंस फिक्शन और क्राइम थ्रिलर की अपेक्षा रोमांस जॉनर की फिल्में कम बजट में बनती हैं। इससे निर्माताओं के लिए भी नए चेहरों पर जोखिम कम हो जाता है। सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया में रोमांस जॉनर सबसे किफायती माना जाता है। नए कलाकारों के लिए अपना हुनर दिखाने का यह अच्छा मौका होता है।'

 

जो सब कर रहे हम क्यों करें

हालांकि नए कलाकारों की अपनी सोच है। जहां सनी देओल के बेटे करण देओल, मोहनीश बहल की बेटी प्रनूतन ने रोमांटिक फिल्म से डेब्यू किया, वहीं भाग्यश्री के बेटे अभिमन्यु दसानी ने फिल्म 'मर्द को दर्द नहीं होता' से डेब्यू किया था, जिसमें उन्होंने दुर्लभ बीमारी से पीडि़त का किरदार निभाया था। अभिमन्यु कहते हैं कि कला का मतलब होता है कि कुछ ऐसा करो जो बाकी लोगों ने नहीं किया हो। मेरी आने वाली फिल्म 'निकम्मा' एक्शन कॉमेडी है, जबकि 'आंख मिचौली' कॉमेडी फिल्म है। आगे इंटेंस रोल करना चाहता हूं।

भेड़चाल ने कम किया रोमांस का जादू

आदित्य पंचोली के बेटे सूरज और सुनील शेट्टी की बेटी अथिया शेट्टी को फिल्म हीरो, अनिल कपूर के बेटे हर्षवर्धन कपूर को 'मिर्जिया', रणबीर कपूर-सोनम कपूर को 'सांवरिया' जैसी रोमांटिक फिल्मों से लांच किया गया, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर चली नहीं। विशुद्ध रोमांटिक फिल्मों की संख्या में आती कमी को लेकर 'हम तुम', 'फना' जैसी रोमांटिक फिल्में बना चुके निर्देशक कुणाल कोहली कहते हैं कि बॉलीवुड में अब अच्छी रोमांटिक फिल्में ही नहीं बन रही हैं, ऐसे में यह कहना आसान हो जाता कि यह जॉनर ही नहीं चल रहा है। लोगों का मन होता है अच्छी फिल्में देखने का वह रोमांटिक, थ्रिलर, हॉरर कुछ भी हो सकती है। भेड़ चाल वाले सिस्टम की वजह से रोमांटिक फिल्में नहीं बन पा रही हैं। इस वक्त साउथ की फिल्मों के रीमेक का ट्रेंड है। पहले निर्माता-निर्देशक बैठकर तय करते थे कि कैसी फिल्म बनानी है, उस हिसाब से एक्टर को चुना जाता था। आजकल कई निर्णय हीरो ले रहे हैं। ऐसे में वह अपने बारे में पहले सोचेंगे। रोमांटिक फिल्मों में हीरोइन का काम अहम होता है। 'कुछ कुछ होता है', 'हम तुम', 'फना' जैसी फिल्मों में हीरोइन का रोल हीरो के टक्कर का था। इन फिल्मों में हीरो तभी हीरो बने, जब उन्होंने हीरोइन का दिल जीता। रोमांटिक फिल्म बनाना मेहनत का काम है। हर सीन पर मूमेंट क्रिएट करना पड़ता है। जिसकी तैयारी जिम में नहीं हो सकती है। चार-पांच गाने और उनकी सिचुएशन बनानी पड़ती है। रोमांटिक फिल्मों में अच्छे संगीत की जरूरत पड़ती है, जबकि एक्शन फिल्मों में आइटम सांग की। संगीत जगत को भी इससे चोट पहुंची है।

 

प्यार अब भी फिल्मों का अहम हिस्सा

राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फैंटेसी रोमांटिक फिल्म 'मिर्जिया' से डेब्यू करने वाली सैयामी खेर इस बात से इत्तेफाक नहीं रखती हैं कि प्यार फिल्मों से कम हुआ है। वह कहती हैं कि मेरी पहली फिल्म का निर्देशन राकेश ओमप्रकाश मेहरा और लेखन गुलजार साहब ने किया था। पांच साल पहले नवोदित कलाकर होने के नाते बड़े स्केल वाली रोमांटिक फिल्म करना मेरे लिए बड़ी बात थी। 'सांवरिया', 'ओम शांति ओम' जैसी बड़ी रोमांटिक फिल्मों से रणबीर कपूर, सोनम कपूर, दीपिका पादुकोण ने डेब्यू किया है। रोमांटिक फिल्में आज भी बनती हैं। मराठी फिल्म 'सैराट' ने हर तरह के दर्शकों से कनेक्ट किया। ऐसा नहीं है कि लोग चैलेंजिंग रोल पसंद कर रहे हैं तो रोमांटिक फिल्में नहीं बनेंगी। रिलेशनशिप फिल्ममेकिंग का अहम हिस्सा रहा है। हाल ही में रिलीज हुए मेरी फिल्म 'अनपॉज्ड' में लव स्टोरी का एंगल था, 'चोक्ड- पैसा बोलता है' फिल्म में भी पति-पत्नी के रिश्ते की कड़वाहट के बाद प्यार वाली बात थी। प्यार को फिल्मों से निकाला नहीं जा सकता है।

जिसमें बेस्ट हैं, वह करना बेहतर

अभिनेता विंदू दारा सिंह के बेटे फतेह रंधावा इस साल फिल्मों में डेब्यू कर सकते हैं। विंदू कहते हैं कि मैं दारा सिंह का बेटा हूं, जिसके रगों में ही एक्शन है। मैंने खुद रोमांटिक फिल्म नहीं की क्योंकि लोग दारा सिंह के बेटे को पर्दे पर रोमांस करते हुए देखना पसंद नहीं करते। मुझे एक्शन हीरो बनकर ही आना था। रोमांस के लिए हीरो में जो चार्म होना चाहिए, वह मुझमें नहीं है। मैं अपने बेटे के लिए चाहता था कि वह एक्शन फिल्मों से ही शुरुआत करे, लेकिन वह रोमांस वाली फिल्मों की ओर आकर्षित हैं। दरअसल, आजकल की पीढ़ी स्मार्ट है। वह जिसमें बेस्ट होते हैं, उसी में आगे बढऩे के बारे में सोचते हैं।

कोई सेट फॉर्मूला नहीं

कुछ कलाकार अपनी पहली फिल्म में ही कुछ अलग प्रयोग करना बेहतर मानते हैं। अमरीश पुरी के पोते वर्धन पुरी ने साल 2019 में रोमांटिक थ्रिलर फिल्म 'ये साली आशिकी' से डेब्यू किया था। उनकी अगली फिल्म 'द लास्ट' शो कॉमेडी होगी। उनका कहना है कि अगर कलाकार अपनी पहली फिल्म में ही कुछ अलग साबित कर सकें तो बड़ी बात होती है। इसी वजह से मुझे मेरी दूसरी और तीसरी फिल्म भी अलग-अलग जॉनर्स से मिली है। मैंने जॉनर के मुकाबले कहानी और किरदार को प्राथमिकता दी। मुझसे शाह रुख खान सर ने कहा था कि रोमांटिक फिल्मों से ही डेब्यू करने का कोई सेट फॉर्मूला नहीं होता। उन्होंने भी करियर की शुरुआत में 'डर' और 'बाजीगर' में निगेटिव किरदार किए थे और आज वह हिंदी सिनेमा के बेहतरीन रोमांटिक हीरो हैं। निडरता से पहली फिल्म का चयन करना काम करने के ऐसे मौके देता है जिन्हें करके कलाकार सुकून की नींद सो सकता है।'

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