Valentine Week के बीच श्रेया घोषाल ने लव लाइफ को लेकर किया खुलासा, कहा- मैंने जिनसे प्यार किया, उन्हीं से शादी की

Special Interview Of Shreya Ghoshal She Talks About Her Love Life Personal And Professional Life

वैलेंटाइन डे पर ही नहीं छोटी-छोटी चीज हर दिन होती है। हर साल प्यार बढ़ता जाता है। वह चुपचाप से बहुत सारी चीजें मेरे लिए कर देते हैं। जब से वह मेरी जिंदगी में आए हैं मैं रिलैक्स हो गई हूं।

Priti KushwahaFri, 12 Feb 2021 11:45 AM (IST)

मुंबई, प्रियंका सिंह। बीते साल लॉकडाउन के दौरान प्रख्यात गायिका श्रेया घोषाल ने घर बैठे अपना नया ओरिजनल गाना 'अंगना मोरे...' तैयार किया। खास बात यह है कि इस गाने को श्रेया ने न सिर्फ गाया बल्कि लिखा और कंपोज भी किया है। उनके भाई सौम्यदीप घोषाल ने म्यूजिक वीडियो को प्रोड्यूस किया है। इस गाने, संगीत जगत की मुश्किलें और वैलेंटाइन डे को लेकर श्रेया से हुई बातचीत के अंश। 

लॉकडाउन में स्टूडियो जाना कितना मिस किया, जिसे आप मंदिर कहती हैं? 

बहुत मिस किया है। लॉकडाउन के बाद जब घर से काम नहीं हो पा रहा था, तो मैं बीच में एक-दो बार स्टूडियो गई थी। स्टूडियो जाना मेरी आदत में शुमार था। वह वाकई मेरे लिए मंदिर है, जहां नई क्रिएशन, नई सोच का जन्म होता है। अब घर में ही छोटा सा मंदिर बना लिया है, जहां से गाने रिकॉर्ड कर रही हूं, लेकिन कोई बगल में बैठकर नहीं बताता है कि गाने में कुछ और भी कर सकते हैं। जिंदगी तन्हा सी लगती है।

'अंगना मोरे...' गाना लॉकडाउन के दौरान आपने बनाया है। इस बार लेखन में भी हाथ आजमाया है... 

फिल्मों का गाना जैसा आता है, वैसा कर लेते हैं, उसमें मेरे हाथ में कुछ नहीं है। इंडिपेंडेंट गाने में छूट होती है। मेरे भाई ने इस म्यूजिक वीडियो को प्रोड्यूस किया है। बतौर कंपोजर यह मेरा दूसरा गाना था, इसे लिखना मेरे लिए नया अनुभव था। ज्यादा सोचा नहीं, नैचुरली गाना बनता गया। मेरे और भाई के बीच हल्के-फुल्के क्रिएटिव मतभेद होते थे, लेकिन हमारी आपसी समझ बहुत कमाल की है। हमारी पसंद एक जैसी है। जो जानकारियां उन्हें थी, वह उन्होंने शामिल की, जहां मुझे लगा की उनकी मदद करनी चाहिए, वहां मैंने की। 

इंडिपेंडेंट गानों के दौर में क्या अब गायकों को टाइपकास्ट करना संभव है? 

मैं अपने करियर के शुरुआती दौर में ही इस दायरे से निकल गई थी, क्योंकि मुझे 'ये इश्क हाय'..., 'चिकनी चमेली..., 'मेरे ढोलना...' जैसे अलग तरह के गाने मिले थे। टाइपकास्ट होने से बच गई थी। वैसे भी हिदीं फिल्म इंडस्ट्री में कोई जॉनर नहीं होता है। एक ही फिल्म में अलग-अलग तरह के गाने सुनने को मिलते हैं। भारतीय संगीत में लोक, शास्त्रीय हर तरह का संगीत होता है। 

आपने कई रोमांटिक गाने गाए हैं। वैलेंटाइन डे भी बहुत करीब है। वास्तविक जीवन में आप कितनी रोमांटिक हैं?  

मैं बहुत ही इमोशनल इंसान हूं। मेरे जैसे लोगों को प्यार भी जल्दी हो जाता है और दिल भी जल्दी टूट जाता है। रियल लाइफ रोमांस में बहुत भाग्यशाली रही हूं। मैंने जिनसे प्यार किया, उन्हीं से शादी हुई है। मेरी प्रेम कहानी बहुत खूबसूरत है। मैं रोमांटिक फिल्में या किसी की लव स्टोरी सुनकर जल्दी से हंस या रो देती हूं, इसका मतलब यह है कि मैं बहुत ही रोमांटिक इंसान हूं। अगर आपकी जिंदगी में प्यार नहीं होगा, तो जिंदगी बहुत ही नीरस और बोरिंग हो जाएगी।

वैलेंटाइन डे पर आपके पति ने आपके लिए कुछ खास किया हो, जो याद रह गया हो? 

सिर्फ वैलेंटाइन डे पर ही नहीं, छोटी-छोटी चीज हर दिन होती है। हर साल प्यार बढ़ता जाता है। वह चुपचाप से बहुत सारी चीजें मेरे लिए कर देते हैं। जब से वह मेरी जिंदगी में आए हैं, मैं रिलैक्स हो गई हूं। पहले मैं छुट्टियां नहीं लेती थी, उन्होंने मुझे अहसास कराया कि अगर मैं जिंदगी का आनंद नहीं ले रही हूं, तो बहुत सी चीजें मिस कर रही हूं। वह मेरे लिए सरप्राइज छुट्टियां प्लान कर लेते हैं, जो आखिरी मिनट में पता चलता है। वह कहते हैं कि सामान पैक करो, हम बाहर जा रहे हैं। पहले गुस्सा आता है कि बताया क्यों नहीं, लेकिन अब मैंने वह कहना छोड़ दिया है। लॉकडाउन में उन्हीं छुट्टियों की यादें सबसे खूबसूरत थीं। 

आप गायिका हैं, आपके लिए प्यार को जताना आसान होता होगा? 

यह गलतफहमी है कि मैं गायिका हूं, तो मैं अपने प्यार को आसानी से व्यक्त कर पाऊंगी। मुझे प्यार जताना बिल्कुल नहीं आता है। मेरा तरीका ही अलग है। मैं उनमें से नहीं हूं, जो अच्छी प्लानिंग कर सके। पति के जन्मदिन पर मुझे बहुत तनाव हो जाता है कि क्या स्पेशल करूं। मैं वही चीजें करती हूं, जो दिल से आती है। गुस्सा आता है, तो गुस्सा निकाल देती हूं, प्यार आ रहा है, तो वह भी जता देती हूं।

आप जब गाने बनाती हैं, तो किसे सबसे पहले सुनाती हैं? 

अब जैसे अंगना मोरे गाना घर पर ही बना था, तो सबसे पहले मेरे पति ने सुना था। वह अपनी सच्ची प्रतिक्रिया देते हैं। मेरे माता-पिता, पति वही पहले श्रोता होते हैं, उनसे पता चल जाता है कि मैं सही राह पर हूं या नहीं। मेरा आत्मविश्वास बढ़ जाता है।

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