‘थलाइवी’ में जयललिता की मां बनने के लिए भाग्यश्री को करनी पड़ी इतनी मेहनत, पर्दे पर वापसी को लेकर कही ये बात

पहले तो मैंने यही पूछा था कि मां का किरदार फिल्म में कितना अहम है। जयललिता जी की मां संध्या जी के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी इंटरनेट पर नहीं थी। मैंने जयललिता जी के कई इंटरव्यू देखे जिसमें उन्होंने अपनी मां का काफी जिक्र किया था।

Anand KashyapMon, 27 Sep 2021 11:08 AM (IST)
‘मैंने प्यार किया’ अभिनेत्री भाग्यश्री, तस्वीर, Instagram: bhagyashree.online

प्रियंका सिंह। उम्र को केवल संख्या मानती हैं भाग्यश्री। ‘मैंने प्यार किया’ से प्रसिद्ध हुईं यह अभिनेत्री हालिया रिलीज ‘थलाइवी’ में नजर आईं। उन्होंने साझा किए अपने दिल के जज्बात, प्रियंका सिंह के साथ...

‘थलाइवी’ को अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। जब किरदार चुना था, तो क्या कुछ जेहन में था?

पहले तो मैंने यही पूछा था कि मां का किरदार फिल्म में कितना अहम है। जयललिता जी की मां संध्या जी के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी इंटरनेट पर नहीं थी। मैंने जयललिता जी के कई इंटरव्यू देखे, जिसमें उन्होंने अपनी मां का काफी जिक्र किया था। यह ऐसा किरदार था, जो मुख्य किरदार की जिंदगी को प्रभावित करता था, भले ही वह स्क्रीन पर न भी हो। बस जब मुझे वजन बढ़ाने के लिए कहा गया, तो मैं सोच में पड़ गई थी। कास्ट्यूम डिपार्टमेंट को श्रेय जाता है कि उन्होंने ऐसे कपड़े दिए, जिससे मैं उस किरदार के करीब पहुंच पाई।

आप अपनी फिटनेस का काफी ध्यान रखती हैं। कभी उम्र को आड़े आने नहीं दिया...

मैं खुद कहती हूं कि मैं 52 साल की हूं। लोग सोचते हैं कि 50 साल के बाद जिंदगी खत्म हो जाती है। मेरा मानना है कि 50 के बाद जिंदगी शुरू होती है। अगर हम यह नजरिया रखें, तो जिंदगी आसान हो जाएगी। सही मात्रा में खाना खाएं। मूवमेंट भी एक दवा की तरह काम करती है। जो इंसान ज्यादा बैठा रहता है, वह यूं ही बूढ़ा हो जाता है। घरेलू सहायक होने के बावजूद मैं अपना काम खुद करती हूं।

पहले और आज के वक्त में कैमरे के सामने आने पर क्या बदलाव महसूस हुआ? जिंदगी के अनुभवों ने अभिनय को कितना आसान बना दिया?

जिंदगी के सफर ने खुद पर आत्मविश्वास बढ़ा दिया है। ‘मैंने प्यार किया’ के दौरान मैं सिर्फ 18 साल की थी। तब आत्मविश्वास कम था। आज के बच्चों को इतनी जानकारी होती है। हम वैसे नहीं थे।

एक फिल्म से मिली इतनी स्टारडम कम ही एक्टर्स देखते हैं। उस वक्त आपने कई नियम बना रखे थे कि आपको किन चीजों से दूर रहना है। क्या उसका असर आपकी स्टारडम पर पड़ा था?

हां, वह निर्णय बहुत मुश्किल था, क्योंकि फैंस का किसी सितारे के प्रति पागलपन कम ही सितारों को मिलता है। मेहनत के बाद ही कलाकार वह मुकाम हासिल कर पाते हैं। मेरा मानना है कि जीवन में प्राथमिकताएं अगर स्पष्ट हों, तो हर निर्णय आसान हो जाता है। मेरे लिए मेरा परिवार पहले आता है। ग्लैमर और प्रसिद्धि पल भर की मेहमान होती है। मुझे भी नहीं पता था कि 30 साल तक लोग मुझे भूलेंगे नहीं, लेकिन उस वक्त लगता था कि यह प्रसिद्धि शायद तीन महीने तक ही रहेगी, उसके बाद न जाने क्या होगा।

जो नियम तब बनाए थे, उसमें आज कितना बदलाव आया है?

जैसे-जैसे जमाना और समाज बदला, वैसे-वैसे नियम भी बदल गए हैं। आज जिंदगी बहुत अलग है। उस वक्त हम प्रणाम और नमस्कार करते थे। आज हैलो, हाय करते हैं। कई सारे तरीके ही बदल गए हैं।

अब आपके दोनों बच्चे बड़े हो गए हैं। अब मां की ड्यूटी बदल गई होगी?

अंगुली पकड़कर आप एक हद तक ही बच्चे को चला सकते हैं। जिंदगी में गिरकर संभलना, संभलकर उठना यह जिंदगी जीने का तरीका है। अगर हम हमेशा बच्चों को सहारा देंगे, उन्हें गिरने नहीं देंगे, तो वह कभी खड़े रहना नहीं सीखेंगे। बतौर मां मैं अपने बच्चों के लिए मौजूद हूं, लेकिन आगे का रास्ता खुद तय करना होगा। कठिनाइयों का सामना करने की कला भी उनको ही सीखनी चाहिए। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है।

आपकी बेटी भी फिल्म इंडस्ट्री में दिलचस्पी रखती हैं। क्या चाहेंगी कि वो भी आपकी तरह कुछ नियम बनाएं?

मैंने आज के जमाने को देखकर उन्हें बहुत छूट दी है। मैंने उन्हें यही सिखाया है कि अपनी और दूसरों की इज्जत करना कभी मत भूलना। बेटी मुझे काम करते हुए देखकर बहुत खुश है। वह कहती है कि मैं स्क्रीन के लिए बनी हूं, इसलिए मुझे काम करते रहना चाहिए। अच्छा लगता है जब बच्चे चाहते हैं कि मैं जिंदगी अपने तरीके से जिऊं।

बेटे अभिमन्यु दसानी भी एक्टिंग कर रहे हैं। उनके साथ काम करने की कोई योजना है?

अगर कोई ऐसी स्क्रिप्ट आए, जहां हम दोनों अपने किरदार से खुश हों, तो जरूर करेंगे। (हंसते हुए) शायद मुझे ‘थलाइवी’ में देखने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा होगा कि मम्मी इतनी भी खराब एक्टिंग नहीं करती हैं।

आप इंटरनेट मीडिया पर भी काफी सक्रिय हैं। इस माध्यम पर होना क्यों जरूरी लगा?

मेरा मानना है कि बच्चे बहुत कुछ सिखाते हैं। अगर हम अपनी सोच को उड़ान भरने दें, तो नए दौर में नई दिशाएं हैं। वक्त के साथ चलेंगे तभी प्रासंगिक रह पाएंगे।

पहले के मुकाबले अब सेट पर महिलाओं को काम करते हुए देखती हैं, तो एक बड़ा बदलाव क्या नजर आता है?

फिल्में समाज का आईना होती हैं। पहले के मुकाबले अब महिलाएं ज्यादा आजाद नजर आ रही हैं। वह बाहर निकलकर काम करना पसंद कर रही हैं। यही वजह है कि इसकी झलक फिल्मों में भी नजर आ रही है। कहानियां भी वैसी ही लिखी जा रही हैं।

माध्यम आपके लिए कितना मायने रखता है? आगे किन प्रोजेक्ट्स में काम कर रही हैं?

मेरे लिए किरदार जरूरी है, माध्यम नहीं, लेकिन माध्यम उतना भी छोटा न हो, जिनकी पहुंच ही दर्शकों तक न हो। अन्यथा सारी मेहनत बेकार हो जाएगी। मैंने एक वेब सीरीज और एक फिल्म साइन की 

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