इंडियन एयरफोर्स की नौकरी छोड़ एक्टर बने थे रंजीत, एक फिल्म हासिल करने के लिए करना पड़ा था इतना संघर्ष

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रंजीत फिल्मों में विलेन का किरदार करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बहुत सी फिल्मों में अपने दमदार विलेन किरदार से खूब सुर्खियां बटोरी हैं। अब वह अपने संघर्ष के दिनों को याद करने की वजह से चर्चा में हैं।

Anand KashyapSun, 26 Sep 2021 02:44 PM (IST)
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रंजीत, तस्वीर, Instagram: ranjeetthegoli

नई दिल्ली, जेएनएन। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रंजीत फिल्मों में विलेन का किरदार करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने बहुत सी फिल्मों में अपने दमदार विलेन किरदार से खूब सुर्खियां बटोरी हैं। अब वह अपने संघर्ष के दिनों को याद करने की वजह से चर्चा में हैं। रंजीत ने खुलासा किया है कि वह फुलबॉल प्लेयर थे, जिन्हें गोली कहते हैं। इतना ही नहीं रंजीत और उनके दोस्तों ने इंडियन एयरफोर्स के लिए एक्जाम दिया था, जिसे उन्होंने निकाल भी दिया था, लेकिन बाद में कलाकार बन गए।

रंजीत ने अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया को इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने फिल्मी करियर के अलावा निजी जिंदगी को लेकर ढेर सारी बातें कीं। रंजीत ने मुंबई में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा, 'मैं एक फुटबॉलर था और गोली नाम से जाना जाता था। मनोरंजन के लिए, मैंने और तीन अन्य दोस्तों ने वायु सेना की परीक्षाओं के लिए आवेदन किया था, जिन्हें पास करना बहुत मुश्किल था। लेकिन हम पास करने में कामयाब रहे और कोयंबटूर में ट्रेनिंग कर रहे थे। दुर्भाग्य से, वहां मेरा सुपरवाइजर के साथ तनाव रहता था जिसकी वजह से वह नौकरी मुझे छोड़नी पड़ी।'

रंजीत ने आगे कहा, 'जब मैं दिल्ली लौटा, तो मुझे नहीं पता था कि क्या करना है। मैं एक पार्टी में शामिल हो रहा था, जब मेरी मुलाकात रणजीत सिंह से हुई, जो रॉनी के नाम से जाने जाते थे, जो मुझे एक फिल्म में कास्ट करना चाहता था। वह नए लोगों को फिल्म के लिए ढूंढ रहे थे। तब तक मैंने फिल्मवालों के बारे में कहानियां सुनी थीं कि युवाओं को फिल्में देने का वादा किया जाता था और फिर उनका शोषण किया जाता था, इसलिए मैं सावधान था लेकिन मैंने रॉनी को अपनी सहमति दे दी थी।'

रंजीत ने आगे कहा, 'मुझे हीरो की भूमिका निभानी थी, जो एक ट्रक ड्राइवर का हेल्पर था। मैंने अपने दोस्तों को इस फिल्म के बारे में नहीं बताया था, क्योंकि मुझे नहीं लगता था कि मेरे पास एक अभिनेता की पर्सनालिटी या लुक था और मेरे परिवार को इस बारे में बताना का सवाल ही नहीं था क्योंकि वह इतने रूढ़िवादी थे, हीरोइन की तस्वीरों के साथ एक फिल्म पत्रिका भी नहीं पढ़ सकते थे, लेकिन जब रॉनी बंबई आए, तो इंडस्ट्री में उनके दोस्तों ने उन्हें सलाह दी कि वह न्यूकमर के साथ फिल्म न बनाएं क्योंकि वह खुद भी एक न्यूकमर थे। इसलिए, उन्होंने मुझे एक पोस्टकार्ड भेजा, जिसमें कहा गया था कि वह मुझे फिल्म में उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका के लिए कास्ट करेंगे।'

रंजीत ने कहा, 'मैं बंबई आया और यहां अपने दूसरे दिन सुनील दत्त से मिला और भोजन किया, जिन्होंने मुझे तुरंत पसंद कर लिया। अगले दिन मेरी मुलाकात राज (कपूर) साब से हुई। मैं पहली बार नीली आंखों और इतने गोरे गाल वाले आदमी से मिला था। मूल रूप से, मैं 15-20 दिनों के भीतर इंडस्ट्री के ज्यादातर लोगों से मिला। दुर्भाग्य से, एक दिन अचानक रॉनी ने मुझसे कहा कि वह फिल्म को ठंडे बस्ते में डाल देंगे। मुझे फाइव स्टार होटल से बाहर जाना पड़ा जहां मैं उनके साथ रह रहा था। फिर दिलीप (कुमार) साहब के छोटे भाई के आग्रह पर एक बंगले में जाना पड़ा। मैं काम की तलाश में नहीं जाना चाहता था, इसलिए मैंने दिल्ली वापस जाने का फैसला किया।'

रंजीत ने कहा, 'एक दोस्त ने मुझसे प्रोडक्शन हाउस में कुछ काम दिलाने के लिए कहा और शहर छोड़ने से ठीक पहले मैं उसे दत्त साहब के ऑफिस ले गया। वहां, मैनेजर ने मुझे बताया कि दत्त साहब मुझसे नाराज थे क्योंकि वह एक भूमिका के लिए मुझसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे और नहीं कर पा रहे थे। इस तरह से मैं 'रेशमा और शेरा' से डेब्यू किया। अगले दिन, मोहन सहगल ने मुझे फोन करके पूछा कि क्या मैं उनकी फिल्म 'सावन भादों' में एक छोटी सी भूमिका करना चाहता हूं, तो मैंने हां बोल दिया। इस तरह मैंने अपना करियर शुरू किया।' 

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