श्रीदेवी को हंटर से मारने के बाद बंद कमरे में चीख-चीखकर रोए थे रंजीत, एक्टर ने बताया ये खास किस्सा

हिंदी सिनेमा के दिग्गज और मशहूर अभिनेता रंजीत बॉलीवुड के उन कलाकारों में से एक हैं जिन्होंने अपनी करियर की ज्यादातर फिल्मों में विलेन का किरदार कर काफी सुर्खियां बटोरी है। रंजीत के किरदार को दर्शकों ने भी हमेशा पसंद किया है।

Anand KashyapSun, 26 Sep 2021 12:40 PM (IST)
मशहूर अभिनेता रंजीत और अभिनेत्री श्रीदेवी , तस्वीर, Instagram: ranjeetthegoli/sridevi.kapoor

नई दिल्ली, जेएनएन। हिंदी सिनेमा के दिग्गज और मशहूर अभिनेता रंजीत बॉलीवुड के उन कलाकारों में से एक हैं जिन्होंने अपनी करियर की ज्यादातर फिल्मों में विलेन का किरदार कर काफी सुर्खियां बटोरी है। रंजीत के किरदार को दर्शकों ने भी हमेशा पसंद किया है। उन्होंने बॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकारों के साथ काम कर बड़े पर्दे पर अपनी अमिट छोड़ी है। अब रंजीत ने अपने करियर की जुड़े एक किस्सों को साझा किया है।

उन्होंने बताया कि है कि एक फिल्म में दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी को हंटर से मारने के बाद वह बंद कमरे में खूब रोए थे। रंजीत ने हाल ही में अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अपनी फिल्मी करियर के साथ निजी जिंदगी को लेकर ढेर सारी बातें कीं। रंजीत ने अपने फिल्मी करियर से जुड़े एक किस्से को साझा करते हुए कहा, 'क्या आप जानते हैं कि जिस दिन मेरे पिता का निधन हुआ, उस दिन मैं एक फिल्म की शूटिंग के लिए हैदराबाद गया था? मैं चट्टान की तरह था, लेकिन जब वह मर गए, तो मैं एक पत्ते की तरह हिल गया था।'

रंजीत ने आगे कहा, 'परिवार में सबसे बड़े होने के कारण अंतिम दर्शन के लिए देश भर से रिश्तेदार आने लगे, लेकिन मैंने फ्लाइट से उड़ान भरी। मैंने अपने हिस्से की शूटिंग करने का फैसला किया ताकि सेट बर्बाद न हो। मेरे पिता, जिन पर कभी भी जीवन में किसी भी गलत काम का आरोप नहीं लगाया गया था। उनकी मौत के लिए असफल शूटिंग के लिए दोषी नहीं ठहराया गया। तो, मैं वहां गया, कैमरे के लिए एक खलनायक की तरह जोर से हंसा।'

रंजीत ने आगे कहा, 'शूटिंग के बाद मैं अपने कमरे में वापस गया और जोर-जोर से होने लगा लगा। श्रीदेवी को एक हंटर से मारा था। रोते हुए कमरे में लौट आया था। मैं शॉट्स के बीच में ठंडे सोडा से अपना चेहरा धोता रहा ताकि किसी को पता न चले।' इसके साथ ही रंजीत ने अपने आगे के करियर को लेकर भी ढेर सारी बातें की हैं। उन्होंने कहा, 'मेरा खासतौर अब ध्यान अपना और अपने स्वास्थ्य पर होता है, ताकि मैं अपने बच्चों पर बोझ न बन जाऊं।'

रंजीत ने कहा, 'जो काम मेरे हाथ में आता है मैं वही करता हूं। प्लान बनाने का कोई मतलब नहीं है, जो इस महामारी ने हमें सिखाया है। 'जय सोमनाथ' उपन्यास पढ़ने के बाद, केवल एक ऐतिहासिक फिल्म थी जिसे बनाने का मैं इच्छुक था, लेकिन मैं लोगों का पीछा नहीं कर सकता। अगर उन्हें लगता है कि मैं इसे बना सकता हूं, तो वह मेरे पास आ सकते हैं। यह एक अच्छी सीरीज भी हो सकती है। मेरे बच्चे दोनों स्टार मटेरियल हैं, और मेरा बेटा जल्द ही अपनी शुरुआत करेगा।'

 

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