Taliban ने महिलाओं के काम पर लगाई रोक तो भड़के जावेद अख्तर, कहा- वे लोग कहां जो 3 तलाक के खिलाफ थे...

मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर बॉलीवुड की उन हस्तियों में से एक हैं जो सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर बेबाकी से बोलते हैं। वह हमेशा से खुलकर अपनी राय भी देते रहते हैं। पिछले महीने तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था।

Anand KashyapMon, 20 Sep 2021 12:33 PM (IST)
मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर, Image Source: Mid-day

नई दिल्ली, जेएनएन। मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर बॉलीवुड की उन हस्तियों में से एक हैं जो सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर बेबाकी से बोलते हैं। वह हमेशा से खुलकर अपनी राय भी देते रहते हैं। पिछले महीने तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद से तालिबानी नेता वहां की महिलाओं के खिलाफ नए-नए फरमान जारी कर रहे हैं।

तालिबानी नेताओं के फरमान के खिलाफ जावेद अख्तर हमेशा से आलोचना करते रहे हैं। अब एक बार फिर से उन्होंने तालिबानी नेताओं के एक फरमान पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। साथ ही इस्लामिक संगठनों को इसके खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तालिबान के उस फरमान की आलोचना की जिसमें कामकाजी महिलाओं को घर में रहने के आदेश दिए गए हैं।

जावेद अख्तर सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहते हैं। वह कई मुद्दों पर इसके जरिए अपनी राय देते रहते हैं। जावेद अख्तर ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा, 'अल जजीरा ने बताया है कि काबुल के मेयर ने फरमान जारी किया है कि सभी कामकाजी महिलाएं घर पर ही रहेंगी, मैं उम्मीद करता हूं कि सभी इस्लामिक संगठनों को इसका विरोध करना चाहिए, क्योंकि यह उनके धर्म के नाम पर किया जा रहा है। वह लोग कहां गायब हैं जो कल तक 3 तलाक के विरोध में चिल्ला रहे थे।'

सोशल मीडिया पर जावेद अख्तर का यह ट्वीट तेजी से वायरल हो रहा है। गीतकार के फैंस और तमाम सोशल मीडिया यूजर्स उनके ट्वीट को पसंद कर रहे हैं। साथ ही अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। इससे पहले जावेद अख्तर ने उन देशों पर अपना गुस्सा जाहिर किया था, जिन्होंने तालिबान का समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि हर लोकतांत्रिक सरकार को तालिबान को मान्यता देने से इनकार कर कर देना चाहिए। साथ ही अफगानिस्तान की महिलाओं के दमन के लिए तालिबान का विरोध करना चाहिए।

जावेद अख्तर ने यह बात ट्विटर के जरिए कही थी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा था, 'हर सभ्य व्यक्ति, हर लोकतांत्रिक सरकार, दुनिया के हर सभ्य समाज को तालिबानियों को मान्यता देने से इनकार करना चाहिए और अफगानिस्तान में महिलाओं के इस तरह के दमन की निंदा करनी चाहिए या फिर न्याय, मानवता और विवेक जैसे शब्दों को भूल जाना चाहिए।' 

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