Interview: साउथ सिनेमा में निडरता के साथ विषय चुने जाते हैं, हम डर-डरकर फ़िल्में बना रहे हैं- मीज़ान

Meezaan Interview साउथ में जो सिनेमा बनाते हैं वो बिल्कुल निडर होकर टॉपिक चुनते हैं। मुद्दों पर बात करते हैं। खुलकर फ़िल्में बनाते हैं। हमारे यहां भी वैसी फ़िल्में बनायी जाती थीं लेकिन अब हम थोड़ा डर-डरकर चल रहे हैं। ज़्यादातर साउथ के रीमेक्स ही बना रहे हैं।

Manoj VashisthWed, 21 Jul 2021 02:01 PM (IST)
Meezaan in Film Hungama 2. Photo- Instagram

मनोज वशिष्ठ, नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के लीजेंडरी हास्य कलाकार जगदीप के पोते और जावेद जाफरी के बेटे मीज़ान ने मलाल से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। अब प्रियदर्शन निर्देशित फ़िल्म हंगामा 2 में मीज़ान मुख्य भूमिका में हैं। यह फ़िल्म डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर 23 जुलाई को रिलीज़ हो रही है। मीज़ान से जागरण डॉटकॉम की ख़ास बातचीत के अंश।

हंगामा 2 में आपने इतने सारे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया है। कलाकारों की इस भीड़ में खोने का कोई डर नहीं था?

नहीं सर, बिल्कुल नहीं। मेरा जो किरदार है, वो असल में मुख्य किरदार है। उसकी जो कहानी है, वो सबसे जुड़ी हुई है। मेरे जो सींस हैं, कभी राजपाल सर के साथ, फिर कभी परेश जी के साथ तो कभी आशुतोष राणा जी के साथ तो कभी शिल्पा जी के साथ हैं। हां, इसके साथ एक ज़िम्मेदारी भी आ जाती है, क्योंकि मुझे उनके जितना ही अच्छा परफॉर्म करना था। मैं एक प्रतिस्पर्द्धी कलाकार हूं। कोशिश करता हूं कि मेरा काम सबसे अच्छा दिखे। इसके साथ डर तो लगा था कि इस फ़िल्म में इतने बड़े अभिनेता हैं। उनके स्तर की परफॉर्मेंस देना और उनके सामने ख़ुद को साबित करना। मुश्किल काम था, लेकिन जब कैमरे के सामने आता हूं तो इन सब चीज़ों के बारे में सोचता नहीं हूं। 

आपने संजय लीला भंसाली निर्मित फ़िल्म से डेब्यू किया। अब दूसरी फ़िल्म में प्रियदर्शन जैसे निर्देशक के साथ काम किया। अपने करियर के लिए इसे कैसे देखते हैं?

शुक्रगुज़ार हूं कि करियर में इतनी जल्दी संजय लीला भंसाली और प्रियदर्शन जैसे दिग्गजों के साथ काम करने का मौक़ा मिला। एक बड़ी ज़िम्मेदारी आयी कि मैं उस कैरेक्टर को ठीक से निभा सकूं। प्रियन सर की बतौर निर्देशक 96वीं फ़िल्म है। ऐसे इंसान की फ़िल्मोग्राफी का हिस्सा होना ही बड़ी बात है। जब बड़े-बड़े कलाकारों के साथ काम कर चुका व्यक्ति आपसे आकर कहता है कि आपने फ़िल्म में अच्छा काम किया है तो उससे बड़ा कोई कॉम्पलीमेंट नहीं होता है।

चुराके दिल मेरा... गाने के रीमेक में आपने अक्षय कुमार की जगह ली है। गाने को शूट करते समय किसी तरह का प्रेशर था?

मैं आभारी हूं, इतने बड़े गाने का हिस्सा होने का मौक़ा मिला। इस गाने की जो लीडिंग लेडी हैं शिल्पा जी, वो ख़ुद मेरे साथ हैं। इससे बड़ी बात मेरे लिए हो नहीं सकती। मैं तो न्यूकमर हूं। मेरे करियर में इतनी सारी अच्छी चीज़ेें, इतने अच्छे मौक़े आ रहे हैं। इससे अधिक नहीं सोचता। मैं लोगों के कहने से इफेक्ट नहीं होता हूं। तुलना तो होगी ही कि इस गाने में अक्षय सर थे। लेकिन, मुझे लगता है कि यह गाना अलग है। इसका अलग अंदाज़ है, स्टाइल है। इसे अलग तरह से बनाया गया है, आज के ऑडिएंस के लिए। गाने के फ्लेवर को रखा गया है, लेकिन आज के हिसाब के तड़का डाला गया है।

पुराना गाना 27 साल पहले आया था। लोगों को यह भी नहीं कहना चाहिए कि कुमार सानू ने यह गाना क्यों नहीं गाया। डायरेक्टर और प्रोड्यूसर का मक़सद ही यही था कि इस गाने को अलग फील दिया जाए। 27 साल पहले जो गाना बना था, वो अलग ऑडिएंस के लिए था। वो एक सेंसुअल रोमांटिक नम्बर था। डांस सॉन्ग तो नहीं था। आज इसे डांस नम्बर बनाया गया है। इसीलिए बेनी दयाल सर की आवाज़ चुनी, जिन्होंने बहुत ख़ूबसूरती से गाना गाया है। मैं तो रिज़ल्ट से ख़ुश हूं और बहुत से लोगों को गाना पसंद आ रहा है। लोग उस पर रील्स बना रहे हैं। वीडियो बना रहे हैं। 

शिल्पा शेट्टी ख़ुद बेहतरीन डांसर हैं। उनके साथ परफॉर्म करना कैसा रहा?

बहुत टेंशन था। जैसा आपने कहा, बहुत अच्छी डांसर हैं। आख़िरकार गाना तो उन्हीं का है। उस गाने को अलग लेवल पर लेकर जाना मेरी ज़िम्मेदारी थी। मैंने तो वही कोशिश की है। शिल्पा जी की एनर्जी आज भी वही है। मैंने कोशिश की है कि उनकी एनर्जी मैच कर सकूं। उनकी तरह डांस कर सकूं। परफॉर्म कर सकूं। शिल्पा जी ने भी मेरा बहुत साथ दिया, जिसके उनका शुक्रिया। 

हमें पता चला है कि आप साउथ फ़िल्में बहुत देखते हैं। कोई ख़ास वजह?

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वजह से हम दुनियाभर की फ़िल्में देख रहे हैं। दुनियाभर का टैलेंट हमारे सामने आ रहा है। साउथ में जो सिनेमा बनाते हैं, वो बिल्कुल निडर होकर टॉपिक चुनते हैं। मुद्दों पर बात करते हैं। खुलकर फ़िल्में बनाते हैं। हमारे यहां भी वैसी फ़िल्में बनायी जाती थीं, लेकिन अब हम थोड़ा डर-डरकर चल रहे हैं। ज़्यादातर साउथ के रीमेक्स ही बना रहे हैं।

साउथ की फ़िल्में इसलिए देखता हूं कि उनकी कहानी ओरिजिनल होती है, जो मेरे अलावा दुनियाभर के लोगों को पसंद आती है। सिर्फ़ साउथ नहीं, सभी भाषाओं की अच्छी फ़िल्में देखता हूं। फ़िल्म ऐसा माध्यम है, जिसके लिए भाषा की पाबंदी ज़रूरी नहीं। इसे देखकर भी समझा जा सकता है। कोशिश करता हूं कि इन नई फ़िल्मों से जितना हो सके, सीख सकूं और बतौर एक्टर अपने करियर के लिए यह फ़ैसले ले सकूं कि मुझे कैसा काम करना है। जान सकूं कि ऐसी कौन सी फ़िल्में आ रही हैं, जो लोगों को पसंद आ रही हैं। मेरे जैसे एक्टर के लिए यह होमवर्क जैसा हो जाता है। 

प्रणिता सुभाष ने कहा था कि सेट पर आप ख़ुद को सीनियर मानते थे...

नहीं.. नहीं ऐसी बात नहीं है। प्रणिता जी ने बहुत काम किया है। उन्होंने बहुत बड़े अभिनेताओं के साथ काम किया है। यह उनकी पहली फ़िल्म है और भुज भी आ रही है अजय सर के साथ। लेकिन यह मेरा स्वभाव नहीं है। मैं सेट पर भी रहता हूं तो विनम्र रहने की कोशिश करता हूं। घर पर जो मेरी परवरिश है, वो वैसी ही है। मेरे मां-बाप ने मुझे ऐसे ही बड़ा किया है कि मैं सबको समान समझता हूं। सबको इज़्ज़त देना मेरे लिए अहम है। यही स्वभाव लोगों को आगे लेकर जाता है।

(हंसते हुए) अगर प्रणिता जी को ऐसा लगा हो तो मैं माफ़ी चाहूंगा उनसे। प्रणिता मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं। बहुत प्यारी हैं। आज भी कुछ चाहिए होता है तो मुझे मैसेज करके हेल्प मांगती हैं। प्रणिता के लिए हिंदी सिनेमा की दुनिया अलग थी। हिंदी भाषा उनके लिए नई है। उन्होंने अभी-अभी इसी फ़िल्म के लिए सीखी है। जितना होता था तो मैं उनकी मदद करता था। बतौर को-एक्टर यह मेरा फ़र्ज़ था कि मैं उनकी मदद करूं। उनके साथ डटा रहूं और उनकी जो प्रॉबल्म्स हैं, उनमें उनका साथ दूं। 

किस तरह की फ़िल्में आगे करना चाहते हैं?

कोई फिक्स जॉनर नहीं है। मुझे बस फ़िल्म्स पसंद हैं। जब हंगामा 2 आयी थी, मुझे पता भी नहीं था कि यह कॉमेडी फ़िल्म है। बस इतना पता था कि प्रियदर्शन की फ़िल्म है। मैंने एकदम से हां कह दिया। ऐसा मौक़ा बार-बार नहीं आता। हंगामा 2003 आयी थी। बांद्रा में ग्लोबस थिएटर हुआ करता था। वहां पर मैंने देखी थी। आइकॉनिक फ़िल्म है। आज भी टीवी पर आती है तो रुककर देखते हैं। मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि आइकॉनिक फ़िल्म का हिस्सा बना हूं। उस फ़िल्म में अक्षय खन्ना सर, रिमी सेन मैम, आफताब शिवदसानी सर ने जो मिलकर परफॉर्मेंस दी, वो तो बहुत ही बढ़िया था। मैंने भी पूरी कोशिश की है और वैसे ही एक्टिंग करने की कोशिश की है।

सोशल मीडिया की नेगेटिविटी का सामना कैसे करते हैं?

सबको एक आज़ादी मिल गयी है। सबके हाथ में एक फोन है। सबको लगता है कि एक पॉवर मिल गयी है। किसी के बारे में कुछ भी बुरा बोलेंगे तो उसके परिणाम नहीं भुगतने पड़ेंगे। छिपकर बैठे-बैठे किसी के बारे में कुछ भी कह दें। सोशल मीडिया का एक अच्छी साइड भी है और काफ़ी फ़ायदे भी हैं। जो नेगेटिव्स हैं, उनसे जूझने की कोशिश तो सभी इंडस्ट्री वाले कर ही रहे हैं

मैं उन चीज़ों पर ज़्यादा ध्यान नहीं देता और इन चीज़ों का असर ख़ुद पर नहीं पड़ने देता। मुझे अपना काम करना है। मैं लोगों के ऑर्डर्स फॉलो नहीं करता। अपने निर्देशक के ऑर्डर्स फॉलो करता हूं, क्योंकि फ़िल्म उनकी है। जब फ़िल्म पर्दे पर आती है तो वो एक निर्देशक का विज़न होता है। एक्टर तो उसका सिर्फ़ एक पार्ट होता है। जब प्रियन सर ने मुझसे कहा कि मैंने बहुत अच्छा काम किया है तो मेरा काम तो वहीं हो गया। यह भी ग़लत है कि आजकल लोग बिना देखे चीज़ों को जज करते हैं। 

जगदीप जी और जावेद जाफरी की अदाकारी का अंदाज़ बिल्कुल अलग है। आप ख़ुद को किस तरह के अभिनेता के रूप में देखना चाहेंगे?

मेरे पिता, द लीजेंड जगदीप के बेटे थे, फिर भी उन्होंने अपना एक अलग अंदाज़ लोगों के सामन पेश किया। आज जब लोग जावेद जाफरी के बारे में सोचते हैं तो 'जावेद जाफरी' के बारे में ही सोचते हैं, ना कि जगदीप के बारे में। मैं भी यही कोशिश कर रहा हूं कि जब लोग मीज़ान के बारे में सोचें तो मीज़ान ही ज़हन में हो। वो मेरे लिए सबसे ज़्यादा अहम है। मैं किसी की नकल नहीं करना चाहता। मैं किसी के साये में नहीं जीना चाहता। मेरी फैमिली का जो नाम मुझसे जुड़ा है वो तो है ही। उस नाम को आगे बढ़ाकर यह दिमाग़ में रखूं कि मुझे अपना नाम भी आगे बढ़ाना है।

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