Himanshi Khurana ने किसान प्रदर्शन में लिया हिस्सा, आसिम रियाज ने ऐसे की तारीफ

हिमांशी खुराना और आसिम रियाज (फोटो- Instagram)
Publish Date:Sat, 26 Sep 2020 02:46 PM (IST) Author: Mohit Pareek

नई दिल्ली, जेएनएन। केंद्र सरकार की ओर से कृषि से जुड़े बिल के विरोध में देशभर में किसानों ने प्रदर्शन किया। किसानों को जमीन से लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी समर्थन मिला। कई फिल्मी हस्तियों ने भी किसानों की मांगों के समर्थन में अपनी बात रखी और किसानों को सपोर्ट किया। इसी विरोध के बीच, पंजाबी एक्ट्रेस और सिंगर हिमांशी खुराना ने सिर्फ सोशल मीडिया पर ही इसका समर्थन नहीं किया, बल्कि वो किसानों की बीच प्रदर्शन करने पहुंच गईं।

हिमांशी खुराना ने पंजाब में किसानों के प्रदर्शन को ज्वॉइन किया। एक्ट्रेस लंबे समय से किसानों का समर्थन कर ही हैं और सोशल मीडिया पर किसानों को लेकर पोस्ट कर रही हैं। हिमांशी का कहना है कि जो किसान साल भर मेहनत करते हैं, सरकार उनके साथ नहीं हैं। साथ ही उन्होंने किसानों के कई मुद्दों को उठाया, जिन्हें लेकर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। कई पंजाबी सिंगर्स ने भी किसानों का समर्थन किया है।

वहीं, हिमांशी के बॉयफ्रेंड असीम रियाज ने हिमांशी के इस कदम को सपोर्ट किया है। आसिम ने इंस्टाग्राम पर हिमांशी की तस्वीर अपलोड की है और इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए हिमांशी की तारीफ की है। आसिम ने हिमांशी की तारीफ में लिखा है- वेलडन हिमांशी। हिमांशी खुराना ने इससे पहले किसानों के मुद्दों पर कंगना रनोट पर भी गुस्सा जाहिर किया था। साथ ही उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किए थे और किसान पर किए गए कमेंट पर आपत्ति दर्ज की।

बता दें कि कंगना ने पीएम मोदी के ट्वीट पर लिखा है- 'प्रधानमंत्री जी कोई सो रहा हो उसे जगाया जा सकता है, जिसे ग़लतफ़हमी हो उसे समझाया जा सकता है, मगर जो सोने की ऐक्टिंग करे, नासमझने की ऐक्टिंग करे उसे आपके समझाने से क्या फ़र्क़ पड़ेगा? ये वही आतंकी हैं, CAA से एक भी इंसान की सिटिज़ेन्शिप नहीं गयी, मगर इन्होंने ख़ून की नदियां बहा दी।

इसके बाद हिमांशी ने लिखा, 'हम सभी के लिए कलाकार के तौर पर पैसे कमाना आसान है। हमारा रोटी वाला स्ट्रगल बहुत दूर रह गया अब। लेकिन फिर भी आप महसूस करो जब एक फिल्म बनाने के बाद उसका उतना रिटर्न नहीं आता तो कितना दुख होता है। आपको भी पता है कोई भी फिल्म घाटे में नहीं की जाती। किसान इतने महीने इंतजार करते हैं और फिर भी उन्हें मेहनत का मूल्य नहीं मिलता।'

 

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