साढ़े पांच दशक से सक्रिय सचिन पिलगांवकर बोले बदलाव ही नियत सत्य है, सिटी आफ ड्रीम्स 2 को लेकर भी की बात

डिज्नी प्लस हाटस्टार पर आज रिलीज वेब सीरीज ‘सिटी आफ ड्रीम्स 2’ में अभिनेता सचिन पिलगांवकर एक बार फिर राजनेता जगदीश गौरव के किरदार में नजर आएंगे। यह साल 2019 में आई वेब सीरीज ‘सिटी आफ ड्रीम्स’ का दूसरा सीजन है।

Pratiksha RanawatFri, 30 Jul 2021 04:16 PM (IST)
सचिन पिलगांवकर की तस्वीर, फोटो साभार: Instagram

 दीपेश पांडेय, मुंबई। डिज्नी प्लस हाटस्टार पर आज रिलीज वेब सीरीज ‘सिटी आफ ड्रीम्स 2’ में अभिनेता सचिन पिलगांवकर एक बार फिर राजनेता जगदीश गौरव के किरदार में नजर आएंगे। यह साल 2019 में आई वेब सीरीज ‘सिटी आफ ड्रीम्स’ का दूसरा सीजन है।

दूसरे सीजन में क्या नया है?

नए सीजन में नई चीजें होना स्वाभाविक हैं। इस बार शो में पिता अमेय राव गायकवाड़ और उनकी बेटी पूर्णिमा के बीच द्वंद्व होगा। दोनों के बीच एक तकरार है, जिसका कारण पहले सीजन के अंत में दिखाया गया था कि उम्मीद है लोग इसे भी प्यार देंगे।

बतौर कलाकार क्या प्रोजेक्ट की सफलता या असफलता का दबाव आप लेते हैं?

ये चीज सभी के साथ होती है। बतौर फिल्ममेकर भी पहले बनाई फिल्मों से अच्छा करने का दबाव रहता है। स्कूल में जब कोई छात्र अच्छे नंबर के साथ पास होता है तो अगली कक्षा में बेहतर परफार्मेंस की उससे उम्मीदें बढ़ जाती हैं। पहले से बेहतर करने लिए अभ्यास और मेहनत जरूरी है। सफलता या असफलता का दबाव निर्माता, निर्देशक, कलाकार और लेखक समेत पूरी टीम पर होता है। अच्छा काम कोई करता नहीं, वह तो बस सहज हो जाता है।

साढ़े पांच दशक से हिंदी सिनेमा में सक्रिय रहने के बाद किरदारों की तैयारी की प्रक्रिया में क्या बदलाव आया है?

बदलाव ही तो एक नियत सत्य है। बदलावों को अपनाना हम कलाकारों का काम है। डिजिटल प्लेटफार्म के परफार्मेंस और सिनेमा के परफार्मेंस में अंतर है। अगर हम सिनेमा की तरह ही किरदार की पिच डिजिटल प्लेटफार्म पर भी रखें तो यह सूट नहीं करेगा। थिएटर में लाइव आडियंस होती है और सभी कलाकारों के लिए सिर्फ लॉन्ग शॉट फ्रेम ही होता है, जबकि सिनेमा में सभी किरदारों का अलग-अलग फ्रेम होता है। प्लेटफार्म के अनुसार खुद को ढालने में कलाकार को निर्देशक की जरूरत पड़ती है और खुशकिस्मती से हमारे निर्देशक नागेश कुकुनूर को ये चीजें अच्छी तरह पता हैं।

प्रत्येक प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक पृष्ठभूमि की कहानियां निर्माताओं को लगातार आकर्षित कर रही हैं...

संघर्ष ऐसी चीज है, जो अगर किताब में हो तो पढ़ने में मजा आता है, फिल्म या वेब सीरीज में हो तो देखने में मजा आता है। राजनीति तो एक बहुत बड़ा संघर्ष है। अगर राजनीति की वजह से किसी के जीवन में संघर्ष उत्पन्न होता है तो वह ज्यादा दिलचस्प हो जाता है। हमारे शो के दोनों सीजन में इसी संघर्ष को अलग तरह से पेश किया गया है।

मुंबई को सपनों की नगरी कहा जाता है। इससे जुड़े आपके क्या सपने रहे हैं?

इस शहर के सपने खत्म नहीं होते हैं। मुंबई तो एक मायानगरी है, इसके सपने देखना पाप नहीं है, लेकिन वह सपना पूरा होना आसान भी नहीं होता है। कोरोना काल में इंडस्ट्री में आर्थिक तंगी ने लोगों को परेशान किया। मैं कलाकारों और तकनीशियनों से यही कहूंगा कि स्वयं को सक्षम बनाएं, बचत करें। बड़े-बड़े फोन और गाड़ियां हमेशा आपके साथ नहीं रहती हैं। सिर्फ आपका आत्मविश्वास आपके साथ हमेशा रहता है। उसे संभाल के रखिए, भविष्य की चिंता कीजिए। बचत करते हुए सुखी जीवन बिताएं।

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