MP Election 2018: पुत्र मोह सोनिया गांधी को नहीं क्या, मेरे बेटे को 15 साल से टिकट नहीं दे रहे

भोपाल, रवींद्र कैलासिया, नवदुनिया। कांग्रेस के पूर्व सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी अपने बेटे नितिन को छतरपुर जिले की राजनगर विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने पर पार्टी हाईकमान से बेहद खफा हैं। उनका कहना

है कि क्या सोनिया गांधी को पुत्र मोह नहीं है। पार्टी भांग खाकर टिकट बांटती है? मैं अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार कर रहा हूं। संगठन मुझे पार्टी से निकाल दे, देर नहीं करे। यह बात चतुर्वेदी ने 'नवदुनिया" से बातचीत के दौरान कहीं। प्रस्तुत हैं चर्चा के प्रमुख अंश - 

नवदुनिया संवाद

- टिकट वितरण को लेकर आपकी नाराजगी है?

- हां, बिल्कुल है।

- आप नाराजगी जताने के लिए क्या करने वाले हैं?

- मेरा बेटा सपा से चुनाव लड़ रहा है। मैं अपने बेटे का प्रचार कर रहा हूं। 

- आपका अब पार्टी छोड़ने का विचार है क्या?

- मैं नहीं छोड़ूंगा। पार्टी चाहे तो निकाल दे। 

- क्या आप पार्टी को चुनौती दे रहे हैं?

- बिल्कुल। अनुशासनहीनता बताकर, जल्दी निकालें। देर क्यों कर रहे हैं।

- कहा जा रहा है कि पार्टी ने आपको इतना सब कुछ दिया, फिर भी आप नाराज हैं।

- पार्टी ने बहुत कुछ दिया, लेकिन हमने भी पार्टी को वापस दिया है। 45 साल मैंने पार्टी की सेवा की है। मेरे

पिता, मेरी मां ने स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई लड़ी है।

- पुत्र मोह के कारण क्या आप नाराज हैं?

- पुत्र मोह क्या सोनिया गांधी को नहीं है।

- आपकी नाराजगी टिकट नहीं मिलने को लेकर है।

- 48 हजार वोटों से जो हारता है, उसको टिकट दिया जा सकता है। 38 हजार 800 वोटों से हारा उसे टिकट मिल सकता है। मेरा बेटा 15 साल से इंतजार कर रहा है। 2008 में नहीं दिया, बोले 2013 में देंगे और 2013 में नहीं दिया और फिर कहा 2018 में देंगे। 2018 में भी मना कर दिया।

- आपकी नाराजगी कब तक रहेगी?

-  कितनी प्रतीक्षा और करें, कितना धैर्य और दिखाऊं? नाराजगी अपनी जगह है, मैं तो पार्टी को केवल यह साबित करके दिखाना चाहता हूं कि आप लोग भांग खाकर टिकट बांटते हैं। जिसको टिकट दिया है, उसकी इस चुनाव में हैसियत देख लेना। सर्वे हुआ उसमें यह रिपोर्ट आई कि मौजूदा विधायक जीतेगा नहीं। इसके बावजूद उसको टिकट दिया और मेरा बेटा 15 साल से इंतजार कर रहा है। जो तीन-तीन बार पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टियों से कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़े, उनको टिकट दिया। मैं तो केवल जनता के बीच जाकर अपनी बात कह रहा हूं।

जनता की अदालत से फैसला मांग रहा हूं।

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