MP Election 2018 : चुनावी फिजा में तैर रहे महंगाई, महिला सुरक्षा, बेरोजगारी और व्यापमं जैसे मुद्दे

राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही महंगाई, कर्मचारी असंतोष, महिला सुरक्षा, अवैध उत्खनन, व्यापमं, किसान और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे चुनावी फिजाओं में तैरने लगे हैं।

भाजपा को घेरने के लिए कांग्रेस और अन्य दल इन्हीं मुद्दों के इर्द-गिर्द आक्रामक प्रचार और चुनावी रणनीति बुनने में जुटे हैं। बेलगाम ब्यूरोक्रेसी के मुद्दे को भी हवा दी जा रही है, भाजपा ने अपने प्रचार में 15 साल के विकास कार्यों की तुलनात्मक उपलब्धियां और 'कांग्रेस के पाप" जैसी आक्रामक पब्लिसिटी पर फोकस किया है।

टिकट वितरण की कवायद के बाद उम्मीदवारों के पास बमुश्किल दो सप्ताह का समय ही बचा है। इसके बाद चुनावी शोर थम जाएगा। आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी जुमलों के बीच मतदाता अब तक मुखर नहीं हुआ, उसके मन की थाह पाने को सियासी दल परेशान हैं।

महंगाई और रोजगार की समस्या के लिए काफी हद तक केंद्र सरकार की जवाबदेही है लेकिन 900 रुपए का गैस सिलेंडर और 82 रुपए प्रति लीटर बिक रहे पेट्रोल की नाराजगी की शिकार राज्य सरकार भी हो सकती है। कांग्रेस और विपक्षी दल विशेष रूप से महिला सुरक्षा, कर्मचारी असंतोष, व्यापमं एवं नर्मदा सहित प्रदेश की अन्य नदियों में अवैध उत्खनन पर भी सरकार को घेरने में जुटे हैं। इससे हटकर भाजपा ने अपने चुनावी प्रचार में 'कांग्रेस के पाप, कांग्रेस की हकीकत और कांग्रेस के झांसे..." के अलावा बिजली,सड़क और सिंचाई के रकबे में वृद्धि जैसी उपलब्धियों पर फोकस किया है।

निर्णायक भूमिका में रहेंगे मैदानी कर्मचारी

जहां तक कर्मचारियों का मसला है तो वन,स्वास्थ्य, शिक्षा एवं राजस्व जैसे महकमों का मैदानी अमला अपनी समस्याओं के लिए सत्ताधारी दल को कटघरे में खड़ा कर रहा है। आशा-ऊषा कार्यकर्ता, स्वास्थ्य सहायिका, संविदा शिक्षक-अध्यापक, कोटवार-राजस्व अधिकारी/कर्मचारी और दैनिक वेतन भोगी जैसे मैदानी अमले के असंतोष को भी भड़काने और भुनाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के वेतनमान और वेतन-विसंगति का मुद्दा भी अटका पड़ा है। देखा जाए तो कर्मचारियों की यह समूची मैदानी जमात चुनाव के दौरान निर्णायक भूमिका में रहती है।

औद्योगिक विकास और रोजगार का मुद्दा

महंगाई, नोटबंदी और जीएसटी जैसे राष्ट्रव्यापी मसलों के अलावा प्रदेश के अपने छोटे-छोटे मुद्दे भी हैं। औद्योगिक विकास और रोजगार का मामला एकदूसरे से जुड़ा है। इन दोनों ही मोर्चे पर सरकार की योजनाएं और वादे जमीन पर नजर नहीं आ रहे। रोजगार के अवसर नहीं पनपने और बेलगाम ब्यूरोक्रेसी का मुद्दा भी सुशासन के दावों पर भारी पड़ता दिख रहा है।

ढाई दशक पहले विश्वव्यापी मंदी के दौर में देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर बनाए रखने में सहायक बनी घरेलु अर्थव्यवस्था और बचत (डोमेस्टिक इकोनॉमी) भी नोटबंदी की भेंट चढ़ चुकी है। बच्चों की बचत और महिलाओं की निजी गुल्लक जैसी परिवार की यह पारंपरिक समानांतर अर्थव्यवस्था भी चौपट हो गई। नोटबंदी के फायदे भी गिनाए जाते हैं लेकिन पीथमपुर, मंडीदीप और मालनपुर जैसे औधोगिक क्षेत्रों के अलावा प्रदेश भर में दिहाड़ी पर मजदूरी करने वालों के लिए यह अभिशाप ही साबित हुई नियोक्ता उन्हें ऑनलाइन भुगतान कर नहीं सकते नकदी बांटने में झंझटें बढ़ गईं हैं।

किसानों का असंतोष और ऋण माफी का पांसा...

मध्यप्रदेश के किसानों का मसला देश भर के मीडिया की सुर्खियों में रह चुका है। राज्य सरकार ने किसानों के लिए भावांतर, जीरो प्रतिशत ब्याज, सिंचाई और समर्थन मूल्य जैसी कई रियायतें दीं लेकिन इसके बावजूद उनके चेहरे पर प्रसन्नाता के भाव नजर नहीं आ रहे। यही असंतोष भुनाने कांग्रेस ने ऋण माफी का पांसा फेंककर सत्ताधारी दल की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी के बाद बस आनर्स और ट्रांसपोर्ट कारोबारी 25 फीसदी भाड़ा बढ़ाने का दबाव बढ़ा रहे हैं। जाहिर है किराया-भाड़ा बढ़ते ही अन्य कई दैनंदिनी वस्तुओं के भाव फिर उछलेंगे।

पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई रोकने ढूंढ रहे स्थायी समाधान

कुछ मुद्दे समयकाल और परिस्थिति के अनुसार बदल भी जाते हैं। पेट्रोलियम उत्पादों की महंगाई रोकने के लिए हमारी सरकार स्थायी समाधान ढूंढ रही है। मप्र में एग्रो सहित जिन क्षेत्रों में अच्छी संभावनाएं हैं वहां प्रयास चल रहे हैं। ऐसी नीतियां बन रही हैं जिनसे प्रदेश जल्दी ही लाजिस्टिक हब बनेगा और तेजी से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

- रजनीश अग्रवाल, प्रवक्ता मप्र भाजपा

भ्रष्टाचार-महंगाई जैसे मुद्दों पर कांग्रेस गंभीर

भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, किसान, उद्योग धंधे और महिला सुरक्षा सहित अन्य सभी मुद्दों पर कांग्रेस बहुत गंभीर है। आम आदमी के जन-जीवन से जुड़े हर मामले पर हमारी नजर है। इन सभी को हमने अपने वचन पत्र में भी शामिल किया है। 'वचन पत्र" कांग्रेस की बदलाव की सोच को परिलक्षित करता है।

- पंकज चतुर्वेदी, प्रवक्ता मप्र कांग्रेस  

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.