प्रियंका गांधी के कदम खींचने से दिलचस्प जंग का गवाह बनते-बनते रह गया बनारस

वाराणसी [मुकेश कुमार]। इस लोकसभा चुनाव में उप्र के पूर्वांचल को लेकर देशभर की दिलचस्पी इसलिए भी बढ़ गई थी कि वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रियंका वाड्रा को उतारने को लेकर कांग्रेस ने सस्पेंस बना रखा था। कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की चुनाव प्रभारी प्रियंका अपनी इच्छा जाहिर कर चुकी थीं। अगर ऐसा होता तो एक दिलचस्प चुनावी जंग का गवाह बनता बनारस। मगर यह हो न सका। कांग्रेस प्रियंका को मोदी के सामने उतारने की हिम्मत नहीं जुटा पाई।

चूंकि पूर्वी उत्तर प्रदेश की अधिकांश सीटों पर आखिरी दो चरणों में मतदान होना है, इसलिए चुनावी शोर अभी चरम पर नहीं पहुंचा है। हां, नामांकन शुरू हो चुके हैं और प्रचार भी। ज्यादातर सीटों पर सपा-बसपा महागठबंधन और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। कुछ सीटों पर कांग्रेस ने लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है। चुनावी पारा चढ़ने से पहले स्टार प्रचारकों का इंतजार है।

पूर्वांचल में इस बार दो लहरें समानांतर चल रही हैं। एक है मोदी लाओ, दूसरी है मोदी हटाओ। मोदी लाओ लहर के पीछे राष्ट्रवाद का ज्‍वार है तो मोदी हटाओ के पीछे जातीय गोलबंदी। मोदी ही मुद्दा हैं, मोदी ही चेहरा हैं। पूरा चुनाव इसी के इर्द-गिर्द सिमटता हुआ नजर आ रहा है। हालांकि मोदी सरकार के काम भी गिना रहे हैं। 2014 के मोदी लहर में पूर्वांचल में आजमगढ़ को छोड़कर सारी सीटें भाजपा की झोली में चली गई थीं। यही कारण है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए करो या मरो जैसी स्थिति बन गई है। शुरुआत वाराणसी से।

बनारस पूर्वांचल की सियासत का केंद्र बिंदु है। प्रधानमंत्री मोदी दूसरी बार यहां से मैदान में हैं। वहीं, महागठबंधन की ओर से लंबे इंतजार के बाद सपा ने शालिनी यादव को टिकट थमा दिया है। शालिनी कल तक कांग्रेस में थीं और मेयर का पिछला चुनाव हार चुकी हैं। लंबे सस्पेंस के बाद कांग्रेस ने आखिरकार यहां अजय राय को उतार दिया है। अजय राय पिछली बार यहां तीसरे स्थान पर रहे थे। यक्ष प्रश्न यह कि क्या कांग्रेस या महागठबंधन मोदी को चुनौती दे पाएगा?

दिग्गजों का दंगल

पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिन कुछ सीटों पर देशभर की नजरें टिकी हैं, उनमें से एक है गाजीपुर। केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के खिलाफ महागठबंधन से बसपा ने अफजाल अंसारी को उतारा है। वह माफिया मुख्तार अंसारी के भाई हैं। सीधी लड़ाई भाजपा और बसपा के बीच है। मोदी लहर में भी बमुश्किल जीते मनोज सिन्हा ने अपने क्षेत्र में बहुत काम कराए हैं। मोदी का नाम और अपना काम ही उनका सहारा है। जातीय गोलबंदी के चलते यहां कांटे की लड़ाई है। आजमगढ़ से इस बार सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मैदान में हैं। पिछली बार सपा से मुलायम सिंह यादव जीते थे। भाजपा ने यहां भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को उतारा है।

मीरजापुर में भाजपा गठबंधन से अपना दल की प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल, कांग्रेस के ललितेश त्रिपाठी व महागठबंधन के रामचरित्र निषाद के बीच त्रिकोणीय जंग है। गोरखपुर से इस बार भाजपा ने भोजपुरी फिल्म स्टार रवि किशन को उतारकर मुकाबला रोचक बना दिया है। रवि किशन फिल्मी ग्लैमर और मोदी-योगी नाम के सहारे धुआंधार प्रचार में जुट गए हैं। यह वही सीट है, जहां उपचुनाव में महागठबंधन प्रत्याशी प्रवीण निषाद से भाजपा हार गई थी। प्रवीण निषाद ने इस बार भाजपा से हाथ मिला लिया है और संतकबीरनगर से चुनाव मैदान में हैं। संतकबीरनगर में मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प है कि तीन सांसद मैदान में हैं। 

बसपा ने पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे भीष्म शंकर उर्फ कुशल तिवारी को उतारा है तो कांग्रेस ने पूर्व सांसद भालचंद्र यादव को लाकर लड़ाई को रोमांचक बना दिया है। डुमरियागंज में दो बार के सांसद जगदंबिका पाल की प्रतिष्ठा दांव पर है। बस्ती, देवरिया, महराजगंज और सलेमपुर में भी लड़ाई त्रिकोणीय है। कुशीनगर में कांग्रेस प्रत्याशी आरपीएन सिंह के खिलाफ भाजपा ने अपने सांसद राजेश पांडेय का टिकट काटते हुए विधायक विजय दुबे को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने एनपी कुशवाहा को मैदान में उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।

प्रयागराज और आसपास की सीटों पर भी भाजपा को कड़ी चुनौती मिल रही है। इलाहाबाद सीट पर भाजपा ने प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को उतारा है तो सपा ने नए चेहरे राजेंद्र सिंह पटेल को। कांग्रेस ने भाजपा के बागी योगेश शुक्ला को उतारकर लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है। प्रतापगढ़ में कांग्रेस से पूर्व सांसद रत्ना सिंह और कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की जनसत्ता लोकतांत्रिक पार्टी से अक्षय प्रताप सिंह भाजपा और महागठबंधनको कड़ी चुनौती दे रहे हैं।

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