सुबह बनारस, शाम बनारस, मोदी तेरे नाम बनारस, ऐसी ही है यहां पीएम की रंगत

वाराणसी, राकेश पांडेय। इस बार भी पूरे देश की निगाह वाराणसी संसदीय सीट पर है। 2014 के चुनाव में यहां से भाजपा ने नरेंद्र मोदी को बतौर पीएम उम्मीदवार प्रत्याशी बनाया था। उस वक्तसियासत के नए उभरे सितारे अरविंद केजरीवाल ने उन्हें चुनौती देकर मुंह की खाई थी जबकि कांग्रेस ने प्रत्याशी उतार महज खानापूरी की थी। इस बार प्रियंका को उतारे जाने की अटकलें थीं, लेकिन अब मोदी के सामने मानो मैदान खाली है।

धर्म-कला-संस्कृति और राजनीति का केंद्र है काशी

धर्म-कला और संस्कृति की राजधानी काशी शुरू से राजनीति का केंद्र रही। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री सहित कमलापति त्रिपाठी, डा. लोहिया, अर्जुन सिंह, रामकृष्ण हेगड़े, गोविंदाचार्य, मनोज सिन्हा जैसे दिग्गज राजनीतिज्ञ भी काशी की धरती से ही राजनीतिक का ककहरा सीखे। वाराणसी संसदीय सीट शुरू से ही हॉट सीट मानी जाती है। यहां का मिजाज कुछ ऐसा रहा कि ‘पैराशूट प्रत्याशी’ को खूब मौका दिया। श्रीशचंद दीक्षित, चंद्रशेखर सिंह, मुरली मनोहर जोशी से लेकर नरेंद्र मोदी तक को मौका दिया।

मोदी काल में कल-कल करती रही विकास की गंगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां विकास की गंगा बहुत तेजी से बही। पौराणिक थाती सहेजने के साथ ही मोदी सरकार ने आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई। रंग-बिरंगी रोशनी से झिलमिला रहे बनारस की आज अनुपम छटा देखते बनती है। रिकार्ड समय में बाबतपुर एयरपोर्ट से गिलट बाजार तक लगभग 18 किलोमीटर लंबे फोरलेन के साथ ही गाजीपुर-आजमगढ़ समेत पूर्वांचल के अन्य जिलों को जोड़ने वाले रिंग रोड फेज वन का निर्माण हुआ। बुनकरों के लिए महत्वपूर्ण ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर का तोहफा मोदी सरकार ने दिया। मंडुआडीह, वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन का सुंदरीकरण हुआ। गंगा के रास्ते परिवहन की सुविधा के लिए गंगा में देश का पहला टर्मिनल बनारस को तोहफे के रूप में मोदी ने दिया। फोरलेन की सौगात के साथ ही महमूरगंज- मंडुआडीह फ्लाईओवर तय समय में तैयार हुआ तो शहर की जाम समस्या समाप्त करने को फुलवरिया, आशापुर में फ्लाईओवर निर्माण का काम चल रहा है। किसानों को पेरिशेबल कार्गो मिला जहां किसान अपनी सब्जियां सुरक्षित रख सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र ने बनारस का मान बढ़ाया। पर्यटन के सेक्टर में यहां जबरदस्त उछाल आया।

1952 से लेकर अब तक

यहां से चुने गए प्रतिनिधियों ने केंद्र की राजनीति में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिलकी। 52 से लेकर 1962 तक यहां से कांग्रेस प्रत्याशी जीते। 1967 के लोकसभा चुनाव में भाकपा ने पहली और आखिरी बार यहां परचम फहराया था। 1971 में एक बार फिर कांग्रेस ने काशी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई लेकिन इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए चुनाव में यहां से चंद्रशेखर सिंह ने परचम लहराया। 1980 में एक बार फिर कांग्रेस लौटी और इंदिरा गांधी के करीबी वरिष्ठ नेता कमलापति त्रिपाठी वाराणसी से जीतकर संसद में पहुंचे। कमलापति त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। इसके बाद 1984 और 2004 में ही कांग्रेस यहां से जीत सकी। 1989 में जनता दल से अनिल कुमार शास्त्री जीते। शेष पांच चुनावों में भाजपा का ही परचम फहरा है। एक बार श्रीशचंद दीक्षित, तीन बार शंकर प्रसाद जायसवाल और 2009 में डा. मुरली मनोहर जोशी यहां से चुनाव जीते।

अलग ही मिजाज है काशी की जनता का

मोदी द्वारा वाराणसी में कराए गए कार्यों में सबसे अहम रहा विश्वनाथ धाम कारिडोर। विश्वनाथ कारिडोर का निर्माण धार्मिक और पर्यटन, दोनों ही दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होगा। कहना गलत नहीं होगा कि मोदी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि विश्वनाथ धाम की आधारशिला रखी गई वरना अन्य कोई सरकार इस पर कदम बढ़ाने को कभी तैयार नहीं होती। लिहाजा, काशी की जनता इस विकास यात्रा से संतुष्ट नजर आती है। वाराणसी संसदीय सीट के मतदाताओं का मन मिजाज कुछ अलग ही है। यहां से अब तक सपा और बसपा का खाता नहीं खुल सका है। विस चुनाव में तो सपा-बसपा के कई नेता जीते, लेकिन संसद का रास्ता यहां का कोई नेता तय नहीं कर पाया। इस बार महागठबंधन से सपा यहां दावा ठोंक रही है। मुस्लिम वोट बैंक के सहारे मुरली मनोहर जोशी के खिलाफ बाहुबली मुख्तार अंसारी को भी बनारस में मुंह की खानी पड़ी थी।

ऐसा रहा था 2014 का परिणाम

काशी में 17 लाख 96 हजार 930 मतदाता हैं। 2014 में मोदी को कुल 5 लाख 81 हजार 22 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर थे आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल। केजरीवाल को कुल 2 लाख 9 हजार 238 मत मिले थे। कांग्रेस प्रत्याशी अजय राय को 75,614 वोट मिले थे। बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी विजय प्रकाश जायसवाल चौथे स्थान पर रहे। उन्हें 60,579 मत मिले थे जबकि समाजवादी पार्टी के कैलाश चौरसिया 45,291 मत पाकर पांचवें स्थान पर थे। केजरीवाल को छोड़कर अन्य कोई प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा सका था।

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