केवल कार्यकर्ता व पार्टी के सदस्य वोट दें तो भी लाखों होंगे प्रत्याशियों के खाते में

बलवंत कुमार, धनबाद: लोकसभा चुनाव का घमासान शुरू हो चुका है। सभी प्रत्याशी और उनके दल अपनी जीत के लिए जोड़ घटाव कर रहे हैं। कहां से कितने वोट मिलेंगे इसका भी आकलन किया जा रहा है।

चुनाव से पूर्व पार्टियों ने सदस्यता अभियान चलाकर पार्टी में जो नए लोग जोड़े हैं, उसका लाभ इस लोकसभा चुनाव में प्रत्याशियों को मिल सकता है। धनबाद में अगर केवल कार्यकर्ता ही वोट करें, तब भी एनडीए और यूपीए प्रत्याशियों के खाते में लाखों वोट आएंगे। वहीं एनडीए के कार्यकर्ताओं की संख्या यूपीए से डेढ़ लाख से अधिक है। ऐसे में महागठबंधन के सामने जहां आम मतदाताओं के साथ एनडीए के समर्थकों को साधने की चुनौती होगी, वहीं एनडीए के लिए अपना कुनबा बचाए रखना महत्वपूर्ण होगा। गठबंधन धर्म निभाते हुए सहयोग करने वाले दलों की सदस्यता दावेदारी भी इस बार भारी पड़ रही है।

पार्टी के सदस्यों से वोट दिलाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है सहयोगी दलों को: बात धनबाद लोकसभा की करें तो यहां भाजपा और कांग्रेस को सहयोग करने वाले दलों के लिए अपनी कुल सदस्यता संख्या के अनुसार प्रत्याशी को वोट दिलवाने की भी जिम्मेवारी है।

पीएन सिंह और कीर्ति झा आमने-सामने: बताते चलें कि धनबाद लोकसभा सीट से भाजपा के पशुपतिनाथ सिंह और कांग्रेस के कीर्ति झा आजाद चुनाव मैदान में आमने-सामने हैं। भाजपा के साथ आजसू, लोजपा और जदयू साथ हैं, तो कांग्रेस के साथ राजद, झामुमो और झाविमो है।

किस पार्टी के कितने सदस्य: जिलाध्यक्षों द्वारा घोषित सदस्यता संख्या के अनुसार, भाजपा के तीन लाख, जदयू के 24 हजार, आजसू को दो लाख और लोजपा के 75 हजार सक्रिय सदस्य धनबाद लोकसभा क्षेत्र में हैं। यानी इन सभी दलों के सदस्यों की संख्या को मिला दें तो भाजपा प्रत्याशी को कम से कम 5,99,000 वोट तो आने चाहिए। इसी प्रकार कांग्रेस के 75000, राजद के 2.5 लाख, झामुमो के एक लाख और झाविमो के 3350 सदस्य हैं। यानी कुल 4,28,350 वोट कांग्रेस प्रत्याशी के खाते में आना चाहिए। यदि बाघमारा और टुंडी के सदस्यों को हटा दें तो चंदनकियारी व बोकारो विधानसभा को मिलाने से संख्या करीब-करीब यही होगी।

परीक्षा की घड़ी: भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह, जदयू के पिंटू कुमार सिंह, आजसू के मंटू महतो, लोजपा के नरेश पासवान, कांग्रेस के ब्रजेंद्र सिंह, राजद के सुबोध यादव, झामुमो के रमेश टुडू और झाविमो के ज्ञानरंजन सिन्हा के पास अब यह चुनौती है कि धनबाद लोक सभा सीट से खड़े गठबंधन के अपने-अपने प्रत्याशी को घोषणा अनुसार वोट भी दिलाने का काम करें। 

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