Jharkhand LokSabha Elections 2019: 70 के दशक में महाजनी प्रथा बना था चुनावी मुद्दा

संवाद सहयोगी, नारायणपुर (जामताड़ा): दुमका लोकसभा क्षेत्र के नारायणपुर निवासी 67 वर्षीय रंजीत वैद्य ने 1977 के आम चुनाव में पहली बार मतदान किया था। अतीत के पन्ने पलटते हुए उन्होंने उस चुनाव से जुड़ी कई बातें दैनिक जागरण के साथ साझा की।

रंजीत बताते हैं कि उस चुनाव में कांग्रेस के सत्यचरण बेसरा की जीत दुमका से हुई थी। उन्होंने बताया कि उस समय इस क्षेत्र में महाजनी प्रथा के खिलाफ आंदोलन चरम पर था। चुनाव में इसका खासा प्रभाव पड़ा था। एक बड़ा वर्ग इससे प्रभावित हुआ था। महाजनी प्रथा के आंदोलन ने 1977 के बाद के चुनावों की दशा ही बदलकर रख दी थी।

(रंजीत वैद्य)

बताया कि उस समय सोशल मीडिया नहीं हुआ करता था। क्षेत्र में अखबार भी पढऩे को नहीं मिलता था। मतदान के बाद रेडियो पर सामाचार के माध्यम से परिणाम जान पाते थे। तब रेडियो का चलन खूब था। हर घर में रेडियो सुना जाता था।

पैसे का नहीं था इतना जोर: उन्होंने कहा कि तब चुनाव में पैसे का खेल भी इतना नहीं चलता था, जितना आज है। तब बैलेट पेपर पर चुनाव होता था। मतगणना चार-पांच दिनों तक चलती थी। आज ईवीएम से मतदान हो रहा है। परिणाम भी जल्द मिल रहा है। ईवीएम में मतदान करना आसान है। कहा कि अब नई व्यवस्था के तहत बीएलओ मतदाताओं को वोट से पूर्व ही मतदान की पर्ची दे रहें हैं जिसमें बूथ संख्या, मतदाता क्रमांक संख्या, नाम आदि का उल्लेख रहता है।

रंजीत बताते हैं कि पूर्व में मतदान केंद्र के समीप बैठे पार्टी के एजेंटों से नाम और मतदाता क्रमांक खोजने में ही काफी वक्त लग जाता था, लेकिन चुनाव में अलग ही जुनून होता था। लोग साइकिल पर चलकर चुनाव प्रचार करते थे। रास्ते में जो कुछ मिल गया खा लिये, फिर काम में लग जाते थे। 

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