Lok Sabha Election 2019: झारखंड के इन सांसदों पर आफत, टिकट काट सकती है भाजपा

रांची, राज्‍य ब्‍यूरो। भारतीय जनता पार्टी में आधा दर्जन के करीब भाजपा सांसदों के टिकट कट सकते हैं। एक-दो के संसदीय क्षेत्र को बदलने की भी बात चल रही है। हालांकि एक-दो दिनों में सूची भी सार्वजनिक हो जाएगी। अभी तक टिकटों कटने को लेकर जो प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं उनमें अधिक उम्र से लेकर संगठन और आरएसएस की पसंद-नापसंद भी शामिल है।

राज्य सरकार से बेहतर संबंध नहीं होना और रघुवर सरकार की नीतियों की आलोचना अथवा सार्वजनिक तौर पर अवहेलना करना भी सांसदों पर भारी पड़ सकता है। पार्टी सूत्रों की मानें तो सबसे बड़ा कारण उम्रदराज होना ही है और पार्टी यह मानकर चल रही है कि संगठन मजबूत होगा तो कोई भी जीत जाएगा। लंबे समय से पार्टी के वरिष्ठ नेता और आठ बार के सांसद कडिय़ा मुंडा के टिकट कटने की चर्चा चल रही है। इसमें सबसे बड़ा फैक्टर उनकी उम्र है। इसके अलावा वे कई बार राज्य सरकार की नीतियों (खासकर सीएनटी एक्ट में संशोधन और स्थानीय नीति पर सरकार के रुख) का विरोध कर चुके हैं।

रांची सांसद रामटहल चौधरी और धनबाद सांसद पीएन सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आ रहा है। स्कूलों का मर्जर करने के केंद्र के आदेश के खिलाफ पत्र सार्वजनिक करनेवाले सांसद भी निशाने पर रहेंगे। पब्लिक डोमेन पर राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना को केंद्रीय संगठन ने गंभीरता से लिया है। इसके अलावा चतरा सांसद का क्षेत्र बदलने की भी बात चल रही है।

पार्टी सूत्रों की मानें तो पलामू सांसद को संगठन से दूरी बरतने की सजा मिल सकती है। मृदुभाषी लोहरदगा सांसद को लेकर भी संशय है और उन्हें बदलने पर विचार चल रहा है। मोदीलहर में सबसे कम अंतर से जीत दर्ज करनेवालों में शामिल लोहरदगा सांसद यहां विधानसभा उपचुनाव में राजग उम्मीदवार के लिए कुछ खास नहीं कर पाए और नतीजा यह रहा कि कांग्रेस को जीत मिल गई। अभी हाल ही में जिस प्रकार भाजपा सांसदों के टिकट कटे हैं उससे इन दावों को भी बल मिल रहा है।

इन पांच कारणों से कट सकते हैं टिकट
- उम्रदराज होना
- संगठन और आरएसएस से दूरी
- उपचुनावों में भाजपा-राजग प्रत्याशी की हार
- पार्टी कार्यक्रमों में कम भागीदारी
- अपनी ही सरकार की नीतियों की आलोचना 

इन सांसदों को टिकट पर है संशय
खूंटी सांसद कडिय़ा मुंडा
1. उम्रदराज हैं। 83 साल में चलने-फिरने में भी कठिनाई।
2. राज्य संगठन से दूरी बनाकर रखते हैं।
3. कोलेबिरा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार की करारी हार।
4. सीएम की आलोचना से बाज नहीं आते हैं।

रांची सांसद रामटहल चौधरी
1. उम्र 77 साल हो चुके हैं।
2. जिला संगठन में हस्तक्षेप लेकिन राज्य संगठन से दूरी।
3. आरएसएस की पसंद नहीं।
4. सीएम की अपरोक्ष आलोचना करने से भी बाज नहीं आते।
5. सिल्ली उपचुनाव में राजग प्रत्याशी सुदेश महतो की हार। सुदेश से इनकी बनती भी नहीं।

धनबाद सांसद पीएन सिंह
1. उम्र 70 वर्ष से अधिक।
2. जिला संगठन पर पकड़ लेकिन बोकारो के दो क्षेत्रों में कमजोर पकड़ और जिला कमेटी से विरोध भी।
3. मुख्यमंत्री का विरोध नहीं लेकिन संबंध बेहतर भी नहीं।
4. संसदीय क्षेत्र के चार भाजपा विधायकों में से दो का विरोध, एक न्यूट्रल। एक विस क्षेत्र मासस तो एक झाविमो के पास है।

पलामू सांसद वीडी राम 
1. संगठन का विरोध नहीं लेकिन बेहतर तालमेल का भी अभाव। आरएसएस के करीब नहीं आ सके
2. एक विधायक (रिश्तेदार भी हैं) के अलावा अन्य का विरोध।
3. संसदीय क्षेत्र का फीडबैक इनके खिलाफ।
4. जातिगत मतों का धु्रवीकरण तो संभव लेकिन दूसरी बिरादरी से नाराजगी।

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