Jharkhand Election 2019: सरयू-नीतीश साथ-साथ, ओम माथुर बोले-फर्क नहीं पड़ता; बढ़ रही सियासी तपिश

रांची, राज्य ब्यूरो। झारखंड में भाजपा के टिकट से बेदखल हुए पूर्व मंत्री सरयू राय को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का साथ मिला है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने झारखंड में अकेले सभी सीटों पर चुनाव लडऩे की घोषणा के बावजूद जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ ताल ठोक रहे भाजपा के बागी सरयू राय को समर्थन देने का निर्णय किया है। नीतीश कुमार उनके समर्थन में प्रचार करने जमशेदपुर आएंगे और वहां कैंप करेंगे।

पार्टी ने सोमवार को ऐन वक्त पर जमशेदपुर पूर्वी व पश्चिमी दोनों सीटों पर अपना घोषित उम्मीदवार वापस ले लिया। वहीं, सरयू की बगावत पर भाजपा के प्रदेश चुनाव प्रभारी ओम माथुर ने रांची एयरपोर्ट पर कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। लोकतंत्र में सभी को अधिकार है पर्चा दाखिल करने का, चुनाव लडऩे का। माथुर मंगलवार को सेवा विमान से रांची पहुंचे और सीधे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। वहां उन्होंने चुनावी रणनीति पर मशविरा किया। इधर, बागी रुख अख्तियार करने के बावजूद भाजपा ने अब तक सरयू राय के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। 

जदयू के सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने मंगलवार को यहां कहा कि सरयू राय भ्रष्टाचार के खिलाफ पहले से लड़ाई लड़ते रहे हैं। उनका वर्तमान कदम भी भ्रष्टाचार के विरुद्ध है। चूंकि नीतीश कुमार की भी सोच भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस है, इसलिए पार्टी ने चुनाव में उनका समर्थन करने का निर्णय लिया है। यह भी कहा कि यदि सरयू राय प्रचार में आने का आग्रह करेंगे, तो नीतीश सहित पार्टी के तमाम बड़े नेता उनके समर्थन में जमशेदपुर आएंगे। इसके लिए पार्टी भी उनसे आग्रह करेगी। बता दें कि सरयू राय के नीतीश कुमार के साथ करीबी रिश्ते भी हैं। मौके पर पूर्व मंत्री लालचंद महतो, प्रदेश महासचिव श्रवण कुमार, भगवान सिंह, संजय सहाय आदि उपस्थित थे।

पटना से फरमान आने पर नहीं किया नामांकन

सोमवार को जमशेदपुर पूर्वी के प्रत्याशी संजय ठाकुर उपायुक्त कार्यालय नामांकन दाखिल करने पहुंच गए थे, लेकिन पटना से फरमान मिलने के बाद उन्होंने तत्काल इरादा बदल दिया। पार्टी ने जमशेदपुर पश्चिमी में संजीव आचार्य को प्रत्याशी बनाया था। दोनों ने अपना नामांकन नहीं किया।

बिहार में भाजपा-जदयू के तालमेल पर पड़ेगा असर

हालांकि, सरयू राय के पक्ष में जदयू के चुनाव नहीं लडऩे के फैसले का कोई नफा नहीं दिखता, लेकिन नीतीश के सरयू राय के समर्थन में उतरने से झारखंड का चुनावी समर और रोमांचक होगा। इससे बिहार में भाजपा के साथ जदयू के तालमेल पर भी असर पड़ सकता है।

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