अब भी परिवारवाद से उबर नहीं पा रही कांग्रेस, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव करेगा गांधी परिवार

नई दिल्ली [संजीव गुप्ता]। Delhi Assembly Election-2020: दिल्ली विधानसभा चुनाव-2020 में छह महीने से भी कम का वक्त बचा है, वहीं प्रदेश स्तर पर रायशुमारी के बाद अब दिल्ली कांग्रेस के नए अध्यक्ष का फैसला पार्टी आलाकमान सोनिया गांधी (Sonia Gandhi), प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) और राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की आपसी मंत्रणा पर अटका है। अंतिम फैसला इन तीनों की संयुक्त बैठक में ही होना है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में नए अध्यक्ष के नाम पर मुहर भले ही लग जाए, लेकिन उसकी घोषणा नवरात्र तक टल सकती है।

एक-दो दिनों में हो सकती है बैठक

गौरतलब है कि 20 जुलाई को शीला दीक्षित का निधन हुआ था, तभी से दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष के बिना चल रही है। पहले मामला इसलिए अटकता रहा क्योंकि पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष ही कोई न था। इसके बाद मामला इसलिए लटका, क्योंकि हरियाणा का विवाद सुलझाना पार्टी के लिए पहली प्राथमिकता थी। अब इसलिए मझधार में है, क्योंकि राहुल गांधी भी बीते कुछ दिनों से लगातार बाहर हैं और प्रदेश प्रभारी पीसी चाको भी। बृहस्पतिवार को दोनों ही दिल्ली वापस आ रहे हैं। ऐसे में एक- दो दिन में नए अध्यक्ष को लेकर फिर से बैठक या चर्चा हो सकती है।

पीसी चाको की राय भी मिली, अब घोषणा का इंतजार

पार्टी सूत्रों की मानें तो सोनिया जिला और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों सहित सभी दिल्ली के प्रमुख नेताओं से रायशुमारी पहले ही कर चुकी हैं। पीसी चाको ने भी अपने सुझाव से आलाकमान को अवगत करा दिया है। अब केवल सोनिया, प्रियंका और राहुल की आपसी मंत्रणा होनी बाकी है।

बता दें कि जनवरी माह में शीला दीक्षित को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का फैसला भी इन तीनों ने इकट्ठे बैठकर आपसी सहमति से लिया था। लिहाजा, इस बार ऐसा ही होना तय है। हालांकि कहा यह भी जा रहा है कि इन दिनों श्राद्धपक्ष चल रहा है, ऐसे में नए अध्यक्ष का नाम तय भले हो जाए, लेकिन उसकी घोषणा नवरात्र शुरू होने तक रोकी जा सकती है।

 

भाजपा के संपर्क में भी कई कांग्रेसी नेता

दिल्ली के कई पूर्व कांग्रेसी विधायक भाजपा और आम आदमी पार्टी में जाने के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। इसमें कांग्रेस के कई बड़े नेताओं का नाम भी है। लेकिन टिकट की शर्तों पर सहमति नहीं बन पा रही है। ऐसे ज्यादातर नेता इसकी भी बाट जोह रहे हैं कि एक बार अध्यक्ष की घोषणा हो जाए, फिर देखते हैं कि कांग्रेस की क्या स्थिति होने वाली है।

पूर्व विधायकों को टिकट देने का शिगूफा

अपने पूर्व विधायकों को टूटने न देने के लिए कांग्रेस आलाकमान सभी पूर्व विधायकों को टिकट देने का शिगूफा भी छोड़ सकती है। कांग्रेस आलाकमान को लगता है कि इससे कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़ कर नहीं जाएंगे। दिल्ली के पूर्व विधायकों को भी इस बात की आस है कि अगर उन्हें अपनी ही पार्टी टिकट दे देती है तो वे चुनाव में खुद ही जोर लगा सकते हैं। फिलहाल तो कांग्रेस के नेता टिकट के लिए ही हाथ-पैर मारने में लगे हैं। किसी भी तरह बस टिकट मिल जाए, फिर वह चाहे खुद की पार्टी से हो या फिर भाजपा या आम आदमी पार्टी से। 

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