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Delhi Assembly Election 2020: केजरीवाल को मिला PK का साथ, अब AAP को जिताएंगे चुनाव !

नई दिल्ली, एजेंसी। Delhi Assembly Election 2020: बिहार में सत्तासीन जनता दल यूनाइटेड (Janta Dal United) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) अब दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) को दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 जिताने में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। दरअसल, टीम प्रशांत किशोर की कंपनी आइ-पैक (Indianpak) अब आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रचार के प्रबंधन का काम भी देखेगी।

वहीं, इस खबर की पुष्टि करते हुए AAP के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा का भी कहना है कि अगर कोई आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ता है तो उसका स्वागत है, वह चाहे किसी भी रूप में क्यों न हो।

बता दें कि अगले साल जनवरी में दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों पर चुनाव होना है, वहीं माना जा रहा है कि 31 दिसंबर से पहले भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) दिल्ली में चुनाव की तारीखों को एलान कर सकता है। 

वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने खुद ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। सीएम केजरीवाल ने ट्वीट किया है- 'यह बताते हुए खुशी हो रही है कि @indianpac हमारे साथ आ रही है। हम उसका स्वागत करते हैं।'

समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मुताबिक, जदयू के दिग्गज प्रशांत किशोर की कंपनी आइ-पैक (Indianpak) आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रचार के प्रबंधन का काम देखेगी।

मोदी-भाजपा को लोकसभा 2014 में दिलाई जीत

वर्ष, 2014 में प्रशांत किशोर भारतीय जनता पार्टी को लोकसभा चुनाव में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं। इसके बाद से उनका नाम तेजी से चुनाव प्रबंधन की दुनिया में आगे आया। बताया जाता है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत के लिए मोदी-शाह ने पूरी तरह से प्रशांत किशोर पर भरोसा किया था और उसका नतीजा भी सकारात्मक निकला।

मोदी ने गुजरात में ली थी पीके की मदद

बता दें कि वर्ष 2011 के गुजरात विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरी जीत के लिए प्रशांत किशोर पर दांव खेला था, जो रंग लाया। इस चुनाव में पीके ने भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार की कमान संभाली और लगातार तीसरी बार गुजरात में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बड़ी जीत मिली।

 नीतीश कुमार को जिता चुके हैं चुनाव

गौरतलब है कि वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी तो लोकसभा चुनाव जीत गई, लेकिन कुछ समय बाद ही प्रशांत किशोर का साथ मोदी-शाह से छूट गया। दरअसल, वर्ष 2015 में राजद और जदयू गठबंधन के साथ जुड़कर उन्होंने भाजपा को हराया था। इसमें प्रशांत की अहम भूमिका रही थी।

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