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Delhi Election 2020 : दिल्ली फतह के लिए भाजपा ने रचा चक्रव्यूह, 80 सांसदों को मिली जिम्मेदारी

नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। चुनावी रण में दमखम दिखाने के लिए भाजपा मजबूत चक्रव्यूह रचने में लगी हुई है। बूथ प्रबंधन से लेकर चुनाव प्रचार को अचूक बनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व दिल्ली के नेताओं के साथ मिलकर रणनीति बनाने में व्यस्त है। अलग-अलग राज्यों के संगठनकर्ताओं और केंद्रीय मंत्रियों को इस अभियान में लगाने के साथ ही सांसदों को भी चुनावी जिम्मेदारी दी जा रही है।

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव अभियान की कमान संभालने के लिए 80 सांसदों की टीम उतारी जा रही है। अमूमन एक सीट पर एक सांसद को तैनात किया जाएगा, लेकिन दो लाख से ज्यादा मतदाताओं वाली सीट की जिम्मेदारी दो सांसद मिलकर संभालेंगे। अगले एक-दो दिनों में यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। नगर निगम और लोकसभा चुनाव जीतने के बाद पार्टी की नजर दिल्ली की सत्ता पर है।

दूसरे राज्यों के नेता भी करेंगे चुनाव प्रचार

इस समय आप यहां की सत्ता पर काबिज है, जिसके पास अरविंद केजरीवाल जैसा मजबूत चेहरा है। इसके साथ ही केजरीवाल सरकार की मुफ्त योजनाओं से पार पाना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। इसे ध्यान में रखकर भाजपा अपने चुनाव प्रचार अभियान व बूथ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दे रही है। प्रत्येक मतदाता तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश हो रही है। इसमें कहीं कोई खामी न रह जाए, इसके लिए स्थानीय नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ ही केंद्रीय मंत्री, सांसद सहित दूसरे राज्यों के नेताओं को भी प्रचार अभियान में उतारा जा रहा है।

प्रत्येक लोकसभा स्तर पर एक केंद्रीय मंत्री या पूर्व मंत्री के साथ ही किसी राज्य का संगठन महामंत्री की तैनाती की गई है। उनकी निगरानी में उस लोकसभा क्षेत्र में आने वाले सभी विधानसभा सीटों पर चुनावी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्येक विधानसभा की कमान किसी सांसद को दी जा रही है। वह स्थानीय नेताओं व लोकसभा स्तर पर तैनात केंद्रीय मंत्री के बीच सामंजस्य स्थापित करके सीट जीतने की रणनीति बनाकर उस पर अमल करेगा।

पूर्वांचल और उत्तराखंड के लोगों के बीच जाएंगे सांसद

भाजपा नेताओं ने बताया कि मंगलवार को नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। उसके साथ ही सभी विधानसभा क्षेत्रों में सांसदों की तैनाती कर दी जाएगी। सांसदों की तैनाती करते समय उस सीट के चुनावी समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा। यदि किसी सीट पर पूर्वांचल या उत्तराखंड के लोग ज्यादा होंगे तो वहां उसी प्रदेश से संबंधित सांसद को जिम्मेदारी दी जाएगी ताकि वह लोगों के बीच बेहतर संवाद स्थापित कर सके।

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