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Delhi Assembly Election: टॉर्च ने जब बिगाड़ दिया था अरविंद केजरीवाल का खेल, पढ़िए चुनावी किस्‍से

नई दिल्ली [निहाल सिंह]। Delhi Assembly Election 2020: 2013 में हुए विधानसभा चुनाव से महज एक साल पहले बनाई गई आम आदमी पार्टी (AAP) को 70 विधानसभा सीटों में से 28 सीटें जीतकर दूसरी बड़ी पार्टी बनी थी। इसमें भाजपा को 32 सीटें तो कांग्रेस को आठ सीटें ही मिली थीं। इसके बाद आप ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में 49 दिन की सरकार चलाने के बाद मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दे दिया था। लेकिन, उस समय आप ने दावा किया था कि वह सबसे बड़ा दल बनते, लेकिन पार्टी का चुनाव चिह्न् झाड़ू व निर्दलीय प्रत्याशियों के चुनाव चिह्न् टॉर्च में समानता होने के चलते सबसे बड़ा दल नहीं बन सके।

टॉर्च और झाड़ू में फंसा था फेर

दरअसल, वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में 15 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव आयोग द्वारा टॉर्च चुनाव चिह्न् आवंटित किया गया था। इन 15 में से दो सीटें तो आप इसलिए सीधे तौर पर हार गई, क्योंकि टॉर्च चुनाव चिह्न् वाले निर्दलीय प्रत्याशियों को मिले मत दूसरे नंबर पर रहे आप प्रत्याशियों के मार्जिन से ज्यादा थे।

भाजपा के प्रत्‍याशी जीते थे चुनाव

इसमें कालकाजी विधानसभा में भाजपा के प्रत्याशी हरमीत सिंह 2044 मतों से जीत गए और आप के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे। जबकि टॉर्च चुनाव चिह्न् पर निर्दलीय प्रत्याशी धर्मेंद्र कुमार को 3092 मत मिले। इसी तरह जनकपुरी विधानसभा में भाजपा प्रत्याशी जगदीश मुखी ने 2644 से विजय हासिल किए और आप के राजेश ऋषि दूसरे स्थान पर रहे। यहां पर भी निर्दलीय प्रत्याशी संजय पुरी 4321 मत मिले।

टॉर्च चिह्न वाले निर्दलीय को मिले थे 23 सौ से ज्‍यादा सीटें

इसके साथ ही त्रिनगर सीट पर भाजपा ने 2809 मतों से विजय हासिल की। टॉर्च चुनाव चिह्न् वाले निर्दलीय प्रत्याशी को 2313 मत मिले। इसी तरह द्वारका में टॉर्च चुनाव चिह्न् को 4398 मत मिले, तो वहीं पालम में 3631 और मटियाला में 2718 मत मिले। वहीं संगम विहार में आप प्रत्याशी तो हारते-हारते बचे। वह 777 मतों से जीते थे, जबकि टॉर्च को 1500 मत मिले टॉर्च चुनाव चिह्न् वाले निर्दलीय प्रत्याशी को 800 वोट और मिल जाते तो आप की एक सीट कम हो जाती।

योगेंद्र यादव ने कहा था टॉर्च से मतदाता हो गए थे भ्रमित

वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के तत्कालीन रणनीतिकार योगेंद्र यादव पूरे चुनाव की कमान संभाले हुए थे। चुनाव से ठीक पहले आप ने सर्वे भी जारी कर दिया था। जिसमें पार्टी को 40 सीटें जीतने का दावा भी किया था और यह भी कहा था कि 50 का आंकड़ा पार्टी पार करे तो कोई बड़ी बात नहीं। यादव ने नतीजे जारी होने के बाद पार्टी का सबसे बड़ा दल न बनने के पीछे टॉर्च चुनाव चिह्न् को जिम्मेदार बताया था। उनका कहना था कि टॉर्च चुनाव चिह्न् में रोशनी की किरणों निकलती हुई दिखाई देती हैं। इससे मतदाताओं ने झाड़ चुनाव चिह्न् समझकर टॉर्च को मत दे दिया।

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