Bihar Chunav 2020: मनाए नहीं मान रहे भाजपा के बागी, अब तक 73 को पार्टी से निकाला

बगावत से होने वाले नुकसान की आशंका बड़े नेताओं को परेशान कर रही, सांकेतिक तस्‍वीर ।
Publish Date:Sat, 31 Oct 2020 07:46 AM (IST) Author: Sumita Jaiswal

पटना, राज्य ब्यूरो । Bihar Chunav 2020  भाजपा के बागियों से एनडीए उम्मीदवार सांसत में हैं। खासकर अपनी ही पार्टी के प्रत्याशियों के लिए पार्टी के बागी ज्यादा मुसीबत बने हुए हैं। आखिरी दौर में चुनाव पहुंच चुका है। उनकी बगावत से होने वाले नुकसान की आशंका बड़े नेताओं को परेशान कर रही।

विरोधियों से ज्‍यादा पुराने साथी ही परेशानी का सबब

कई सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को पार्टी के पुराने साथी ही विरोधियों की तुलना में ज्यादा परेशान कर रहे।  यह स्थिति तब है, जब पार्टी के तमाम दिग्गज नेता अपने-अपने स्तर से बागियों को मनाने-समझाने में जुटे हैं। बात नहीं बनी तो अभी तक भाजपा 73 नेताओं को पार्टी से निकाला भी जा चुका है। भाजपा में निष्कासन की मार झेलने वाले में प्रदेश से लेकर जिले स्तर तक के नेता शामिल हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक किसी भी दल की तुलना में सबसे ज्यादा कार्रवाई भाजपा ने ही की है। यह इस चुनाव का रिकार्ड भी है।

क्‍यों हुए बागी

ऐसा नहीं है कि केवल भाजपा में ही बगावत है। सभी दलों में दागी और बागी नेताओं की कहानियां चल रही हैं। दागी नेताओं की बात छोड़ भी दें तो वर्तमान में जदयू-भाजपा समेत कई दल बागी नेताओं से ही परेशान हैं। दरअसल, इसके पीछे की वजह यह है कि 2015 के चुनाव में भाजपा 166 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। आधी से ज्यादा हारी हुई सीटों पर पार्टी ने इस बार प्रत्याशी बदल दिया है या फिर वैसी सीट जदयू या अन्य के खाते में चली गई है। वहां पिछली बार चुनाव लड़ चुके भाजपा नेता इस बदलाव को को नहीं माने और मैदान में उतर गए। भाजपा के बागियों में पूर्व सांसद, पूर्व विधायक से लेकर पार्टी पदाधिकारी तक शामिल हैं।

दो मौजूदा विधायक मान गए 

भाजपा के मौजूदा विधायकों में टिकट गंवाने वाले दो मान गए। चनपटिया के विधायक प्रकाश राय और बोचहां की विधायक बेबी कुमारी का टिकट कट गया। दोनों ने विरोध भी किया, लेकिन बाद में मान गए।

प्रलोभन भी नहीं आया काम

राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, अमित शाह, धर्मेंद्र प्रधान, सुशील कुमार मोदी, सौदान सिंह, मंगल पांडेय, नित्यानंद राय, गिरिराज सिंह, विवेक ठाकुर, आरके सिंह, नागेंद्र नाथ एवं शिवनारायण महतो जैसे दिग्गज नेताओं के मान मनौव्वल पर भी बात नहीं बनी। स्वजातीय नेताओं को भी लगाया गया। एमएलसी, बोर्ड, निगम और आयोग का प्रलोभन भी काम नहीं आ रहा है।

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