आखिर, क्‍यों आर्यन खान से जुड़े क्रूज ड्रग्स मामले की जांच को लेकर हो रही राजनीति

महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक भी शामिल हैं। उन्होंने इस मामले की जांच कर रहे अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ जिस तरह मोर्चा खोल दिया है उससे तो यह लगता है कि उन्हें एक मंत्री के रूप में यही जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

TilakrajWed, 27 Oct 2021 10:01 AM (IST)
क्या आर्यन खान शाह रुख खान के बेटे नहीं होते तो क्या वही सब कुछ होता जो हो रहा है?

मुंबई के चर्चित क्रूज ड्रग्स मामले की जांच को लेकर जैसी राजनीति हो रही है और जैसे नित नए आरोप-प्रत्यारोप सामने आ रहे हैं, उन्हें देखते हुए जांच की दशा-दिशा का अनुमान लगाना कठिन है। चूंकि मामला फिल्म स्टार शाह रुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़ा है, इसलिए उन पर कुछ ज्यादा ही ध्यान केंद्रित है। इसके चलते इसकी भी अनदेखी हो रही है कि आर्यन खान के अलावा अन्य युवा भी जमानत का इंतजार कर रहे हैं। जब तक जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती तब तक आर्यन खान और उनके साथियों पर लगे आरोपों के बारे में किसी के लिए कुछ कहना कठिन है, लेकिन न जाने कितने आम और खास लोग सरलता से निष्कर्ष पर पहुंचे जा रहे हैं।

इनमें महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक भी शामिल हैं। उन्होंने इस मामले की जांच कर रहे अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ जिस तरह मोर्चा खोल दिया है, उससे तो यह लगता है कि उन्हें एक मंत्री के रूप में यही जिम्मेदारी सौंप दी गई है। आखिर वह किसके इशारे पर एक केंद्रीय जांच एजेंसी के खिलाफ खड़े हो गए हैं? यदि मंत्री इस तरह का व्यवहार करेगा, तो फिर किसी मामले की जांच सही तरह होना मुश्किल है। दुर्भाग्य से महाराष्ट्र के करीब-करीब हर उस मामले की जांच में वैसी ही क्षुद्र राजनीति होने लगी है, जो किसी केंद्रीय एजेंसी के पास पहुंचती है।

नि:संदेह क्रूज ड्रग्स मामले की गहन जांच होने के साथ उन तत्वों की पहचान और पकड़ भी होनी चाहिए, जो मादक पदार्थों की आपूर्ति करते हैं- न केवल मुंबई में, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी, लेकिन इस क्रम में इस कारण उदाहरण पेश करने का काम भी नहीं होना चाहिए कि आर्यन खान एक बड़ी हस्ती के बेटे हैं और उनके साथ अभिनेत्री अनन्या पांडे भी संदेह के घेरे में आ गई हैं। यह बात जितनी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो पर लागू होती है, उतनी ही अदालतों पर भी, जिन्हें आरोपितों की जमानत का फैसला करना है।

आवश्यक केवल यह नहीं कि इस मामले के सभी आरोपितों के साथ उसी तरह व्यवहार हो जैसा आम आदमी के साथ होता है, बल्कि यह भी कि ऐसा होते हुए दिखना भी चाहिए। जांच एजेंसी अथवा अदालतों के आचरण से यही रेखांकित होना चाहिए कि उनकी नजर में सब बराबर हैं, भले ही आरोपों के घेरे में कोई आम आदमी खड़ा हो या फिर जानी-मानी शख्सियत। जांच एजेंसी और अदालतों को यही प्रतीति करानी चाहिए कि उन्हें केवल अपराध की गंभीरता से लेना-देना होता है, क्योंकि ऐसे सवाल उठ रहे कि क्या आर्यन खान शाह रुख खान के बेटे नहीं होते तो क्या वही सब कुछ होता जो हो रहा है?

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