जब देश में टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने की जरूरत है, तब कोविड रोधी टीकों की कमी सामने आना चिंताजनक

केंद्र सरकार को टीकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करने चाहिए।

टीकाकरण की मौजूदा रफ्तार संतोषजनक नहीं। हालांकि टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने के लिए यह भी आवश्यक है कि टीका लगवाने को लेकर लोगों की हिचक टूटे लेकिन पहली जरूरत तो टीके की कमी दूर करना है। प्रतिदिन लगभग एक करोड़ लोगों का टीकाकरण हो।

Bhupendra SinghWed, 12 May 2021 08:37 PM (IST)

एक ऐसे समय जब टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने की सख्त जरूरत है, तब कोविड रोधी टीकों की कमी सामने आना चिंताजनक है। पर्याप्त टीके उपलब्ध न होने के कारण कई राज्यों में टीकाकरण या तो धीमा पड़ गया है या फिर उन्हें अपने कुछ टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ रहा है। यह स्थिति एक तरह से कोरोना से जंग में सबसे भरोसेमंद हथियार के कमजोर पड़ जाने जैसी है। केंद्र सरकार को टीकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करने चाहिए। इस क्रम में लीक से हटकर तौर-तरीके भी अपनाए जाने चाहिए। भारत को इस भरोसे नहीं रहना चाहिए कि विश्व व्यापार संगठन जल्द ही टीका उत्पादन के मामले में बौद्धिक संपदा अधिकार से जुड़े कानून में रियायत देने की पहल करेगा। इस पहल को अंजाम तक पहुंचने में लंबा समय लग सकता है। कम से कम भारत अधिक समय तक इंतजार करने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका सिर उठाए हुए है। केंद्र सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राज्यों को वांछित संख्या में टीके कब उपलब्ध होंगे? यदि वह अपने स्तर पर टीके उपलब्ध करा पाने में समर्थ नहीं है तो फिर उसे सभी राज्य सरकारों को विदेश से टीके खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ उनकी मदद भी करनी चाहिए।

कुछ राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार से टीके खरीदने की जैसी पहल की है, वैसी ही अन्य राज्य सरकारें क्यों नहीं कर रही हैं? क्या वे केंद्र के भरोसे हैं या फिर उन्हें कोवैक्सीन और कोविशील्ड टीका बनाने वाली कंपनियों से उम्मीद है कि वे समय पर टीके उपलब्ध करा देंगी? यदि ऐसा है तो फिर टीकों को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला क्यों कायम हो गया है? यह ठीक नहीं कि कुछ राज्य सरकारें आधे-अधूरे तथ्यों के साथ केंद्र पर यह आरोप लगा रही हैं कि उसने बड़ी संख्या में टीके निर्यात कर दिए। कम से कम इस मामले में तो गलतबयानी नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि तथ्य यही है कि भारत ने करीब एक करोड़ टीके ही दूसरे देशों को दिए हैं। एक बड़ी संख्या में टीके इसलिए निर्यात करने पड़े, क्योंकि टीके बनाने वाली भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय नियम-कानूनों से बंधी थीं। एक अनुमान के अनुसार जुलाई से प्रतिमाह करीब 13 करोड़ टीके उपलब्ध होने लगेंगे। यह संख्या पर्याप्त नहीं, क्योंकि जरूरत इसकी है कि प्रतिदिन लगभग एक करोड़ लोगों का टीकाकरण हो। टीकाकरण की मौजूदा रफ्तार संतोषजनक नहीं। हालांकि टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाने के लिए यह भी आवश्यक है कि टीका लगवाने को लेकर लोगों की हिचक टूटे, लेकिन पहली जरूरत तो टीके की कमी दूर करना है।

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