कोरोना से भी बचना और अर्थव्यवस्था को भी बचाना, उद्योग-धंधे पकड़ें रफ्तार, लाकडाउन में पर्याप्त छूट देने की जरूरत

लाकडाउन में पर्याप्त छूट देने की आवश्यकता है। आज जरूरत है आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियों में तेजी लाने की। जिन क्षेत्रों को लाकडाउन से मुक्त किया गया है वे गति तभी पकड़ सकेंगे जब उनसे संबंधित क्षेत्रों को भी पाबंदी से बाहर किया जाए।

Bhupendra SinghWed, 02 Jun 2021 02:06 AM (IST)
आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियों में तेजी लाई जाए। कोरोना से भी बचना है और अर्थव्यवस्था को भी बचाना है।

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर जितनी तेजी से कम हो रही है, उससे लाकडाउन से बाहर आने की आवश्यकता उतनी ही बढ़ती जा रही है। समस्या यह है कि लाकडाउन से बाहर निकलने की प्रक्रिया बहुत धीमी है। इस धीमी प्रक्रिया से आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियों को बल मिलने की कोई प्रबल संभावना इसलिए नहीं, क्योंकि जिन क्षेत्रों को लाकडाउन से मुक्त किया गया है, वे गति तभी पकड़ सकेंगे जब उनसे संबंधित क्षेत्रों को भी पाबंदी से बाहर किया जाए। ऐसे उद्योग-धंधों की पहचान की जानी चाहिए, जो अन्य किसी पर निर्भर हैं और उन्हेंं भी खोला जाना चाहिए। दिल्ली में कारखाने खोल दिए गए हैं और निर्माण कार्य शुरू करने की भी अनुमति दे दी गई, लेकिन जहां कारखाने कामगारों की कमी का सामना कर रहे हैं, वहीं निर्माण क्षेत्र के समक्ष यह मुश्किल खड़ी हो गई है कि उसे जिन वस्तुओं की आवश्यकता है, उनसे संबंधित प्रतिष्ठान बंद हैं। आखिर ऐसे कैसे काम चलेगा? कम से कम उन राज्यों और इलाकों में तो लाकडाउन से बाहर आने के ठोस उपाय किए ही जाने चाहिए, जहां संक्रमण इतना कम हो गया है कि हाल-फिलहाल उसके सिर उठाने की कोई संभावना नहीं है। यह ठीक नहीं कि कई शहरों में कोरोना मरीजों की संख्या उससे भी कम है, जब किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं थी, लेकिन वे अभी भी लाकडाउन के दायरे में हैं।

आज जरूरत इस बात की है कि अनुकूल अवसर का लाभ उठाया जाए और आर्थिक-व्यापारिक गतिविधियों में तेजी लाई जाए। इससे ही उस नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी, जो लाकडाउन के कारण हुआ है। यह ध्यान रखा जाए तो बेहतर कि कोरोना से भी बचना है और अर्थव्यवस्था को भी बचाना है। यह बचाव तभी हो सकेगा जब इसकी चिंता की जाएगी कि उद्योग-धंधे अपनी रफ्तार पकड़ें। जिस तरह लाकडाउन में पर्याप्त छूट देने की आवश्यकता है, उसी तरह इसके लिए भी तैयार रहने की जरूरत है कि यदि कहीं कोरोना संक्रमण एक निश्चित मानक से अधिक ऊपर जाता दिखे तो पुन: लाकडाउन लगाने में देर न की जाए। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती कि संक्रमण की दूसरी लहर जब उठान पर थी, तब कई राज्य सरकारें लाकडाउन लगाने से बच रही थीं। वास्तव में इसके कारण ही संक्रमण की दूसरी लहर ने इतना प्रचंड रूप धारण किया। लाकडाउन लगाने का जो काम अप्रैल के पहले सप्ताह में किया जाना चाहिए था, वह तीसरे-चौथे सप्ताह में किया गया। कम से कम अब तो इस तरह की गफलत नहीं होनी चाहिए। यह सही है कि तीसरी लहर आने की आशंका है, लेकिन यदि पर्याप्त सावधानी बरती जाए तो उससे बचा भी जा सकता है।

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