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लोगों की लापरवाही पूरे देश के लिए महंगी साबित हो रही है, इसके चलते कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा

कोरोना वायरस के संक्रमण को थामने की तमाम चेष्टा के बाद भी उसके मरीजों की बढ़ती संख्या चिंतित करने वाली है। कुछ समय पहले तक कोरोना संक्रमण से ग्रस्त होने वालों की जो संख्या 10 हजार प्रतिदिन थी वह 15 के बाद 20 हजार हुई और अब 25 हजार का आंकड़ा पार करती दिख रही है। यदि इस रफ्तार को थामा नहीं गया तो भारत कोरोना मरीजों की दृष्टि से अमेरिका और ब्राजील के बाद खड़ा नजर आएगा। हालांकि इन दोनों देशों के मुकाबले भारत की आबादी कहीं अधिक है और कोरोना मरीजों की संख्या को कुल आबादी के सापेक्ष ही देखा जाना चाहिए। इसके बावजूद कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या कोई शुभ संकेत नहीं।

नि:संदेह केंद्र और राज्य सरकारों के साथ उनकी विभिन्न एजेंसियों को कोरोना संक्रमण पर लगाम लगाने के लिए और अधिक सक्रियता दिखाने और खासकर टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने की जरूरत है, लेकिन बात तो तभी बनेगी जब आम लोग आवश्यक सतर्कता का परिचय देंगे। यह खेद की बात है कि खतरा सामने दिखने के बावजूद लोग अपेक्षित सावधानी का परिचय देने से इन्कार कर रहे हैं।

सार्वजनिक स्थलों पर न जाने कितने ऐसे लोग दिख जा रहे हैं जो फिजिकल डिस्टेंसिंग को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं। इससे भी खराब बात यह है कि तमाम लोग या तो मास्क लगाते ही नहीं या फिर केवल दिखावे के लिए गले या ठुड्डी पर लटकाए रहते हैं। ऐसा करके वे खुद के साथ औरों को खतरे में डालने का ही काम नहीं कर रहे, बल्कि शासन-प्रशासन को इसके लिए बाध्य भी कर रहे कि वे उस लॉकडाउन को लेकर सख्ती बरतें जिससे बाहर निकलने की कोशिश की जा रही है। यदि देश के कुछ हिस्सों में लॉकडाउन की सख्ती बढ़ानी पड़ रही है तो लोगों की लापरवाही के कारण ही। हैरानी इस पर है कि लोग यह देख रहे हैं कि अब एक सप्ताह से भी कम समय में एक लाख कोरोना मरीज बढ़ जा रहे हैं, फिर भी जरूरी सावधानी नहीं दिखा रहे हैं।

चोरी-छिपे किस्म-किस्म के आयोजन करना और उनमें भीड़ एकत्रित करना एक किस्म की आपराधिक लापरवाही ही है। इस तरह की लापरवाही पूरे देश के लिए बहुत महंगी साबित हो रही है, क्योंकि इसके चलते कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है और उसके नतीजे में कारोबारी एवं अन्य जरूरी गतिविधियों को गति देने में बाधा आ रही है। नि:संदेह यह राहतकारी है कि कोरोना मरीजों के ठीक होने की दर बढ़ रही है और कई राज्यों में यह दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, लेकिन यदि संक्रमण की रफ्तार पर लगाम नहीं लगी तो हालात सामान्य होने में और अधिक समय लगेगा।

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