कपिल सिब्बल के सही सवाल, कांग्रेस में कोई अध्‍यक्ष नहीं तो कौन ले रहा फैसले?

इसमें कोई दोराय नहीं कि कांग्रेस रसातल में जा रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कांग्रेस को राजनीतिक दल के बजाय प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह ही नहीं चला रहे बल्कि इस क्रम में वह पुराने और निष्ठावान नेताओं को चुन-चुनकर किनारे भी लगा रहे हैं।

TilakrajThu, 30 Sep 2021 08:52 AM (IST)
एक के बाद एक कांग्रेस नेता पार्टी छोड़कर जा रहे, लेकिन लगता है कि उन्हें कोई परवाह ही नहीं

एक ऐसे समय जब कांग्रेस पंजाब में उठापटक से ग्रस्त है, तब वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल का यह सवाल पार्टी नेतृत्व को और अधिक असहज करने वाला है कि जब कोई अध्यक्ष ही नहीं है, तो फिर फैसले कौन ले रहा है? उनका यह सवाल इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि हाल में जहां मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से इस्तीफा लिया गया, वहीं कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी जैसे बाहरी नेताओं को पार्टी से जोड़ा गया।

कपिल सिब्बल ने पार्टी नेतृत्व को केवल अपने चुभते सवालों से ही नहीं घेरा, बल्कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक जल्द बुलाने की भी मांग की। ऐसी ही मांग जी-23 गुट के एक अन्य नेता गुलाम नबी आजाद ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर की। इन दोनों नेताओं के तेवरों से यह साफ है कि उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व को एक ऐसे वक्त घेरा है, जब वह अपने मनमाने फैसलों से पार्टी की फजीहत कराने में लगा हुआ है।

इन नेताओं ने प्रकट रूप में भले ही राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को निशाने पर लिया हो, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने कहीं न कहीं अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी निशाना साधा है। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि पंजाब में राज्य अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री को बदलने के जो फैसले हुए, उसके पीछे उनकी भी सहमति रही। यह सहमति यही बताती है कि उन्होंने सब कुछ राहुल और प्रियंका गांधी पर छोड़ दिया है। शायद इसी कारण वह इसमें दिलचस्पी नहीं ले रही हैं कि कांग्रेस को कोई पूर्णकालिक अध्यक्ष मिले।

लगता है कि सोनिया गांधी को भी यह रास आ रहा है कि राहुल गांधी बिना कोई जिम्मेदारी संभाले पर्दे के पीछे से पार्टी चलाते रहें। पार्टी को परिवार का पर्याय बनाने में उनके चाहे जो स्वार्थ हों, इसमें कोई दोराय नहीं कि कांग्रेस रसातल में जा रही है और वह भी बहुत तेजी के साथ। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कांग्रेस को राजनीतिक दल के बजाय प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह ही नहीं चला रहे, बल्कि इस क्रम में वह पुराने और निष्ठावान नेताओं को चुन-चुनकर किनारे भी लगा रहे हैं।

एक के बाद एक कांग्रेस नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, लेकिन लगता है कि उन्हें कोई परवाह ही नहीं। बात केवल अमरिंदर सिंह को अपमानित कर किनारे करने की ही नहीं, बल्कि उनकी जगह भाजपा से आए नवजोत सिंह सिद्धू को प्राथमिकता देने की भी है। सिद्धू को प्राथमिकता देने से पार्टी को क्या मिला, यह पंजाब कांग्रेस के हालात बता रहे हैं। सिद्धू ने नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खिलाफ विद्रोह करके राहुल और प्रियंका गांधी की जगहंसाई ही कराई है, लेकिन यह उन्हें शायद ही समझ आए।

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