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कारगर उपायों से कोरोना और चीन को मात देकर ही स्वतंत्रता दिवस मनाने का होगा सही मकसद

कारगर उपायों से कोरोना और चीन को मात देकर ही स्वतंत्रता दिवस मनाने का होगा सही मकसद
Publish Date:Fri, 14 Aug 2020 11:28 PM (IST) Author: Bhupendra Singh

इस बार स्वतंत्रता दिवस का उत्सव भिन्न परिस्थितियों में मनाया जा रहा है और इसका कारण है कोरोना वायरस के संक्रमण से उपजी कोविड-19 महामारी। यह महामारी स्वतंत्रता दिवस की धूमधाम पर तो असर डालेगी, लेकिन उसे उन संकल्पों को पूरा करने में बाधक नहीं बनने देना चाहिए जो हर मुश्किल हालात का सामना करने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। यदि हम सब एकजुट होकर राष्ट्रीय दायित्वों के निर्वहन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन कर सकें तो इस महामारी को भी आसानी से परास्त कर सकते हैं और राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य की ओर भी तेजी से बढ़ सकते हैं। यह लक्ष्य हमारी प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन उस तक पहुंचने के पहले हमें उस अवरोध को दूर करना होगा जो इस महामारी ने भी उत्पन्न कर दिया है।

एक ऐसे समय जब शासन-प्रशासन के विभिन्न अंग और विशेष रूप से चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और सुरक्षाकर्मी कोरोना वायरस के संक्रमण को मात देने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं और इस क्रम में अपना बलिदान भी दे रहे हैं तब देश के हर नागरिक का यह फर्ज बनता है कि वह उन उपायों को कारगर बनाने में योगदान दे जो इस महामारी को मात देने के लिए आवश्यक हैं। यह कितना महत्वपूर्ण है, इसे इससे समझा जा सकता है कि इस बात को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी रेखांकित किया।

राष्ट्रपति ने कोरोना योद्धाओं का स्मरण करते हुए सीमाओं की रक्षा करते समय अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले वीर सैनिकों का भी नमन किया। इन सैनिकों का बलिदान देश को हमेशा याद रहना चाहिए। यह अच्छा हुआ कि राष्ट्रपति ने देश-दुनिया का ध्यान इस ओर भी आर्किषत किया कि दुष्ट पड़ोसी देश यानी चीन अपने विस्तारवादी रवैये का प्रदर्शन करने में लगा हुआ है। एक तरह से उन्होंने यही संकेत किया कि हमें देश के भीतर पैदा हो रहे खतरों से निपटने के साथ ही सीमाओं पर खड़े किए जा रहे खतरों का भी सामना करना है। यह तभी संभव है जब हम भारत के लोग मतभेद भूलकर एकजुटता का प्रदर्शन करने और साथ ही अपने हिस्से की जिम्मेदारी का परिचय देने के लिए सचेत रहें।

यही वह रास्ता है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के रूप में हमारी आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है। इससे बेहतर और कुछ नहीं कि स्वतंत्रता का यह पर्व हर किसी को उसकी जिम्मेदारियों का अहसास कराए। 15 अगस्त केवल स्वाधीनता की महत्ता जानने का ही नहीं, बल्कि उसे अक्षुण्ण रखने के लिए सजग रहने का भी अवसर है। इसे इसी रूप में मनाया जाना चाहिए। जय हिंद।

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