विराट परिवर्तन का वर्ष: गंभीर चुनौती को अवसरों में बदला जा सकता है, यह क्षमता पीएम मोदी ने दिखाई

विराट परिवर्तन का वर्ष: गंभीर चुनौती को अवसरों में बदला जा सकता है, यह क्षमता पीएम मोदी ने दिखाई

किसी गंभीर चुनौती को अवसरों में भी बदला जा सकता है यह क्षमता मोदी जी ने दिखाई है। जिनका प्रभाव आने वाले दशकों तक दिखाई पड़ेगा।

Bhupendra SinghSat, 30 May 2020 12:32 AM (IST)

[ राजनाथ सिंह ]: किसी भी देश के इतिहास में बहुत कम अवसर ऐसे आते हैं जब विराट परिवर्तन देखने को मिलता है। 2014 का वर्ष भारत के राजनीतिक इतिहास में ऐसे ही विराट परिवर्तन का वर्ष था। उस समय देश की जनता अक्षम और भ्रष्ट प्रशासन से निजात पाना चाहती थी। उसने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को बदलाव के लिए जनादेश दिया।

पंडित नेहरू के बाद नरेंद्र मोदी दूसरे नेता बने जिन्हेंं जनता ने लगातार दो बार जनादेश दिया

एक बार जनादेश पाने के बाद बहुत कम ऐसा होता है जब जनता पुन: जनादेश दे, परंतु पंडित नेहरू के बाद नरेंद्र मोदी दूसरे नेता बने जिन्हेंं जनता ने लगातार दो बार जनादेश दिया और वह भी पिछली बार से अधिक मतों के साथ। 2014 का जनादेश परिवर्तन के लिए था तो 2019 का परिवर्तन की उस प्रक्रिया में विश्वास के लिए। जनता जब किसी पर विश्वास करती है तो राजनीतिक व्यक्ति के लिए उस विश्वास को धारण करना एक बड़ी चुनौती होती है। आज राजनीति में विश्वसनीयता एक चुनौती बनी हुई है।

पीएम मोदी ने कई ऐसे फैसले लिए जो साहस और दृढ़ता के साथ मुकाम तक पहुंचाया

मोदी जी के नेतृत्व में जब 2019 में दोबारा हमारी सरकार बनी तो अनेक ऐसे निर्णय लिए गए जो भाजपा के वैचारिक अधिष्ठान के आधार थे। मोदी जी ने उन्हेंं साहस और दृढ़ता के साथ मुकाम तक पहुंचाया। भाजपा के लिए जनसंघ के समय से आज तक विश्वसनीयता एक कसौटी है। बीते एक वर्ष में मोदी जी इस कसौटी पर सौ फीसद खरे उतरे। उन्होंने आम जनमानस में अपनी एवं पार्टी की विश्वसनीयता को बढ़ाया है। ईमानदारी से देखें तो भारत की राजनीति में विश्वसनीयता की दृष्टि से पिछला एक वर्ष मील का पत्थर है। हमारे राजनीतिक विचार चाहे कितने भी भिन्न क्यों न हों, पर कम से कम इस विषय पर संपूर्ण राजनीतिक बिरादरी को नरेंद्र मोदी के योगदान को स्वीकार करना चाहिए।

अनुच्छेद 370, तीन तलाक, राम मंदिर जैसे फैसले इस वर्ष को युगांतकारी वर्ष बनाता है

अनुच्छेद 370, तीन तलाक, आतंकवाद विरोधी अधिनियम में परिवर्तन और श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होना भारत के सामाजिक, राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास में इस वर्ष को युगांतकारी वर्ष बनाता है। मुस्लिम महिलाओं की जान जिस तलाक-ए-बिद्दत के कारण सांसत में होती थी उससे निजात की मुद्दत पिछले एक बरस में ही आई। यह महिलाओं के आत्म-सम्मान का विषय है। श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद संपूर्ण देश में जिस प्रकार शांति, सामंजस्य और सांप्रदायिक सौहार्द बना रहा वह मोदी सरकार की अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हम तो भगवान राम के रामराज्य के उस आदर्श को अपना राजनीतिक दर्शन मानते हैं जो यह कहता है कि सभी अपने-अपने धर्मों के अनुसार आचारण करते हुए प्रेमपूर्वक रहें।

मोदी ने राजनीति में विश्वसनीयता के संकट को कम करने का प्रयास किया

मोदी जी ने राजनीति में विश्वसनीयता के संकट को कम करने का प्रयास किया, परंतु विपक्ष ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पर वितंडावाद उत्पन्न किया। भारत दक्षिण एशिया का एकमेव पंथनिरपेक्ष राष्ट्र है। चूंकि अब हम एक वैश्विक शक्ति हैं इसलिए इस क्षेत्र में मजहबी जुल्म के शिकार लोगों की मदद करना एक पंथनिरपेक्ष देश के रूप में हमारी संवैधानिक प्रतिबद्धता थी।

मोदी ने सीएए के द्वारा प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए जो किया वह अभूतपूर्व कदम है

मोदी जी ने नागरिकता संशोधन कानून के द्वारा धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए जो किया वह एक अभूतपूर्व कदम है। निहित राजनीतिक कारणों से मुस्लिम समुदाय के मन में इस विषय को लेकर एक निराधार भ्रम पैदा करने का जो प्रयास किया गया वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। कार्यकाल की शुरुआत किसानों को सम्मान निधि देने और साथ ही मजदूरों, छोटे दुकानदारों एवं अन्य र्किमयों के लिए बेहतर कार्य की व्यवस्थाएं और वृद्ध हो जाने पर पेंशन की सुविधाएं सुनिश्चित करने के साथ हुई।

देश की सभी सेनाओं के मध्य बेहतर समन्वय के लिए सीडीएस की व्यवस्था को मूर्त रूप प्रदान किया

यदि मैं रक्षा मंत्री के रूप में विचार करूं तो लंबे समय तक भारत की सभी सेनाओं के मध्य बेहतर कार्यकारी समन्वय के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ की व्यवस्था का जो विषय विचाराधीन था उसे बीते 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने मूर्त रूप प्रदान किया। विश्व के अधिकांश बड़े और शक्तिशाली देशों में यह व्यवस्था है। पिछली सरकार में वन रैंक वन पेंशन विषय का समाधान हुआ था और इस बार चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ विषय का समाधान हुआ।

अस्त्र-शस्त्रों का भारत में निजी क्षेत्र के सहयोग से उत्पादन, तेजस का वायु सेना में कमीशन

भारत को सुरक्षा की दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने के लिए अस्त्र-शस्त्रों का भारत में निजी क्षेत्र के सहयोग से उत्पादन, आर्डिनेंस फैक्ट्री को व्यावसायिक दक्षता का स्वरूप देना, आधुनिकतम युद्धक विमान राफेल की उपलब्धता और पूर्णत: भारत में निर्मित युद्धक विमान तेजस का वायु सेना में कमीशन राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अभूतपूर्व कदम थे। संयोगवश इन दोनों ही विमानों को उड़ाने का मुझे अवसर मिला। जो उपलब्धियां विगत एक वर्ष में हासिल हुईं उस पर हम गर्व का अनुभव कर सकते हैं।

मोदी ने सही समय पर लॉकडाउन लगाकर कोरोना महामारी से लड़ने में सजगता और सक्षमता दिखाई

आज कोरोना महामारी के रूप में विश्व मानव जाति के ज्ञात इतिहास के सबसे व्यापक संकट का सामना कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी सतर्कता के साथ सही समय पर लॉकडाउन लगाते हुए इस महामारी से लड़ने में सजगता और सक्षमता, दोनों दिखाई। आज गरीब मजदूर और किसान अत्यंत कठित चुनौती से गुजर रहा है, परंतु सरकार ने जिस संवेदनशीलता के साथ कार्य किया वह सराहनीय है। करोड़ों गरीबों के खाते में सीधे धन पहुंचाना, गरीबों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराने से लेकर राजनीति के साथ समाज के सभी वर्गों के साथ विचार-विमर्श करके प्रधानमंत्री ने इस कठिन काल में अपने कुशल प्रशासन द्वारा एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

किसी गंभीर चुनौती को अवसरों में बदला जा सकता है, यह क्षमता मोदी ने दिखाई

किसी गंभीर चुनौती को अवसरों में भी बदला जा सकता है, यह क्षमता मोदी जी ने दिखाई है। चाहे किसानों को अपनी फसल कहीं भी बेचने का अधिकार हो, मजदूरों के लिए एक राष्ट्र एक राशन कार्ड की व्यवस्था हो, लघु और मध्यम उद्योग की परिभाषा बदलनी हो अथवा बड़े स्तर पर भारत को विमानों के एक बड़े रिपेयर, मेंटीनेंस और ओवरहॉलिंग हब के रूप में विकसित करना हो-ये सब विगत एक वर्ष के ऐसे निर्णय हैं जिनका प्रभाव आने वाले दशकों तक दिखाई पड़ेगा।

तिलक के स्वराज्य के संकल्प को साकार करने में मोदी अवश्य सफल होंगे

यह वर्ष भारत को पूर्ण स्वराज्य का नारा देने वाले लोकमान्य तिलक की पुण्यतिथि का शताब्दी वर्ष है। मोदी जी ने जिस प्रकार के कार्य किए हैं उसे देखते हुए हम विश्वास से कह सकते हैं कि स्वराज्य का वह संकल्प जो तिलक जी ने बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में लिया था, इक्कीसवीं शताब्दी के इस तीसरे दशक में मां भारती की सेवा करते हुए साकार करने में मोदी जी अवश्य सफल होंगे।

( लेखक रक्षा मंत्री हैं )

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