एक विवाहित कवि का दुख: कुंवारेपन में आंख पर कविता लिखने वाला कवि शादी बाद सरसों तेल और पेट्रोल पर कविता लिखने लगता है

अविवाहित कवियों को क्या पता कि एक शादी-शुदा कवि को क्या-क्या दुख उठाने पड़ते हैं। कुंवारेपन में आंख कान गर्दन और कमर पर कविता लिखने वाला कवि कब सरसों तेल और पेट्रोल पर कविता लिखने लगता है उसे समझ नहीं आता।

Bhupendra SinghSun, 18 Jul 2021 03:13 AM (IST)
कवि का गुस्सा सरसों तेल के भाव की तरह बढ़ रहा

[ अतुल कुमार राय ]: शाम का मनभावन समय है। बाहर का मौसम रोमांटिक हो चला है। बादलों के गरजने की ध्वनि के साथ बारिश की बूंदें खिड़की से होते हुए कवि चिंगारी जी के बेडरूम तक आ रही हैं। बेडरूम में टीवी चल रही है और कवि ‘चिंगारी’ शवासन में लेटकर पकौड़ों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मुए पकौड़े हैं कि किचन से निकलने का नाम नहीं ले रहे हैं। लगता है वहीं कहीं धरने पर बैठ चुके हैं। कवि हृदय व्याकुल हो रहा है, ‘सुनती हो, पम्मी की मम्मी?’

कवि का गुस्सा सरसों तेल के भाव की तरह बढ़ रहा

कहीं से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। भला इस देश में कवियों की सुनता कौन है जी। अगर इनको सच में सुना गया होता तो यह दुनिया कब की स्वर्ग हो चुकी होती। कवि चिंगारी पकौड़े के नाम पर मुंह में उठते ज्वार-भाटे को किसी आंदोलन की तरह दबाकर सोच रहे हैं कि देर-सवेर उनकी आवाज जरूर गृह मंत्रालय तक जाएगी। इसी उम्मीद में कवि ने करवट बदली। तब तक टीवी पर सरसों तेल का विज्ञापन शुरू हो गया। एक सुंदर नायिका नायक के लिए पकौड़े छान रही है। नायक पकौड़ी खाना भूलकर नायिका के लिए प्रेमगीत गा रहा है। यह देखकर कवि चिंगारी का गुस्सा सरसों तेल के भाव की तरह बढ़ रहा है, ‘ए, पम्मी की मम्मी? कौन से आसमानी पकौड़े बना रही हो कि अब तक नहीं बना। ऊपर से ये टीवी के विज्ञापन। इनको कैसे पता कि आज हमारे यहां पकौड़े बन रहे? लगता है, यह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अब किचन-बेडरूम तक घुस जाएगा।

कवि के काव्यात्मक चिंतन पर स्पीड ब्रेक लग गया

‘पहले तो टीवी बंद करो और चुपचाप जाकर बाजार से सरसों तेल लाओ। तीन दिन से कह रही कि चूल्हा बनवा दो, जल नहीं रहा, पर दिनभर फेसबुक पर बैठकर देश की समस्याओं पर कविता लिखने के लिए टाइम है, घर के लिए नहीं?’ श्रीमती जी के इस अवतार को देखकर कवि के काव्यात्मक चिंतन पर स्पीड ब्रेक लग गया। कवि को गृह मंत्रालय द्वारा सुना जाएगा, लेकिन इस तरह से सुना जाएगा, इसका अंदाजा नहीं था। कवि सोच रहा है। क्या जमाना आ गया प्रभो! रीतिकाल में तो विरह में धधकती नायिका के हृदय की तपन से कुछ भी जलवाया जा सकता है। एक आज का जमाना है कि कवि नायिका से कहकर गैस-चूल्हा भी नहीं जलवा सकता।

अविवाहित कवियों को क्या पता कि शादी-शुदा कवि को क्या-क्या दुख उठाने पड़ते हैं

अब सामने किराना के सामान की एक लिस्ट है। न भीगने के लिए एक छाता है। कवि ने भारी मन से अपनी अलिखित प्रेम कविताओं के साथ बाजार की तरफ रुख कर दिया। साहिर लुधियानवी होते तो यहां चिल्ला पड़ते, ‘मैंने जो गीत तिरे प्यार की खातिर लिक्खे, आज उन गीतों को बाजार में ले आया हूं।’ लेकिन कवि जानता है कि साहिर शादी-शुदा नहीं थे, वरना वह गीत को बाजार में ले जाने से पहले स्वयं उठकर धनिया-जीरा, मिर्च और मसाला लेने बाजार जाते और लौटकर पत्नी से डांट भी सुनते। इन अविवाहित कवियों को क्या पता कि एक शादी-शुदा कवि को क्या-क्या दुख उठाने पड़ते हैं। कुंवारेपन में आंख, कान, गर्दन और कमर पर कविता लिखने वाला कवि कब सरसों तेल और पेट्रोल पर कविता लिखने लगता है, उसे समझ नहीं आता।

कैसे कवि हैं आप, आनलाइन कविता ठेलना आता है, पेमेंट करना नहीं आता

अब चिंगारी जी दुकान के सामने खड़े हैं। एक हाथ में झोला है, दूसरे में छाता और दिमाग में चिंतन। दुकानदार बोल रहा है, ‘कवि जी, कैश दीजिए।’ ‘कैश नहीं है मेरे पास?’ ‘ठीक है, तब आनलाइन पेमेंट कर दीजिए।’ ‘आनलाइन करना तो हमें आता नहीं, खाते में लिख लो।’ ‘कैसे कवि हैं आप? दिन भर आनलाइन कविता ठेलना आता है, पेमेंट करना नहीं आता?’ ‘ज्यादा न बोलो, चुप-चाप लिख लो। घर में कुछ मेहमान आने वाले हैं।’

आजकल अच्छे दोस्त बनने के लिए पहले तलाक लेना पड़ता है

कवि सरसों तेल लेकर घर आ गया, पत्नी मुस्कुरा रही है। सामने एक मुंहबोला साला बैठकर हंस रहा है। नमस्ते ‘जीजू’। ‘कैसे हो पिंटू?’ ‘एकदम ठीक। आप तो कमाल लिखते हैं। मैंने आपकी फेसबुक पोस्ट में देखा था, आपने दीदी को अपना सबसे अच्छा दोस्त बताया था, पढ़कर अच्छा लगा।’ श्रीमती जी मुस्कुरा रही हैं, ‘बिल्कुल पिंटू, तुम्हारे जीजा सच में अच्छे दोस्त हैं।’ कवि सरसों तेल के बोतल का मूल्य पढ़ते हुए बुदबुदा रहा है, ‘चुप रह पगली। आजकल अच्छे दोस्त बनने के लिए पहले तलाक लेना पड़ता है।’

[ लेखक हास्य-व्यंग्यकार हैं ]

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.